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गुणवत्तापरक शिक्षा का अवसर देता है इग्नू: डॉ. संजय
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
Updated Mon, 16 Mar 2015 02:03 AM IST
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शुभारंभ इग्नू केंद्र वाराणसी के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. संजय कुमार सिंह ने सरस्वती चित्र पर माल्यार्पण करके किया। उन्होंने इग्नू के बारे में विस्तार से जानकारी दी, दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया।
डॉ.सिंह ने कहा कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) की दूरस्थ शिक्षा छात्रों को कौशल निखारने का प्रमुख माध्यम है। बीच में पढ़ाई छोड़ चुके या दूरदराज के युवाओं के लिए सुनहरा अवसर भी है।
खासतौर से महिलाओं, अल्पसंख्यक, नि:शुक्त और समाज के उपेक्षित तबकों के लिए भी। उन्हें गुणवत्तापरक शिक्षा हासिल करने के लिए इग्नू अवसर उपलब्ध कराता है।
ऐसे लोगों को लाभ जरूर उठाना चाहिए। क्षेत्रीय निदेशक ने बताया कि इग्नू की शिक्षाप्रणाली बहुत ही लोचपूर्ण है। इसलिए छात्रों को पहले ही प्रयास में परीक्षाएं उत्तीर्ण करने का प्रयास करना चाहिए।
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कहा कि इग्नू के सभी पाठ्यक्रम भारतीय विश्वविद्यालय संघ के संस्थानों से मान्यता प्राप्त है। इस दौरान इग्नू के बीएड छात्रों को बताया कि उन्हें दो साल में 12-12 दिन का दो वर्कशाप करना है।
पाठ्यक्रम पूर्ण करने के लिए सत्रीय कार्य को अनिवार्य और समय पर जमा करने करना भी जरुरी बताया। इग्नू केंद्र के समन्वयक डॉ. एसएन पांडेय ने सत्रीय कार्य को हस्तलिखित होना जरूरी बताया।
कहा कि सत्रीय कार्य के लिए सहायक पुस्तकों का भी सहारा लिया जा सकता है। सत्रीय कार्य जमा न होने पर परीक्षा से वंचित हो सकते हैं। कार्यक्रम में डॉ. लोकपति त्रिपाठी, डॉ. सुधीर रंजन, डॉ. मोनिका सरोज, डॉ. जयसिंह यादव, डा. जय प्रकाश आदि रहे।
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डॉ.सिंह ने कहा कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) की दूरस्थ शिक्षा छात्रों को कौशल निखारने का प्रमुख माध्यम है। बीच में पढ़ाई छोड़ चुके या दूरदराज के युवाओं के लिए सुनहरा अवसर भी है।
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खासतौर से महिलाओं, अल्पसंख्यक, नि:शुक्त और समाज के उपेक्षित तबकों के लिए भी। उन्हें गुणवत्तापरक शिक्षा हासिल करने के लिए इग्नू अवसर उपलब्ध कराता है।
ऐसे लोगों को लाभ जरूर उठाना चाहिए। क्षेत्रीय निदेशक ने बताया कि इग्नू की शिक्षाप्रणाली बहुत ही लोचपूर्ण है। इसलिए छात्रों को पहले ही प्रयास में परीक्षाएं उत्तीर्ण करने का प्रयास करना चाहिए।
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कहा कि इग्नू के सभी पाठ्यक्रम भारतीय विश्वविद्यालय संघ के संस्थानों से मान्यता प्राप्त है। इस दौरान इग्नू के बीएड छात्रों को बताया कि उन्हें दो साल में 12-12 दिन का दो वर्कशाप करना है।
पाठ्यक्रम पूर्ण करने के लिए सत्रीय कार्य को अनिवार्य और समय पर जमा करने करना भी जरुरी बताया। इग्नू केंद्र के समन्वयक डॉ. एसएन पांडेय ने सत्रीय कार्य को हस्तलिखित होना जरूरी बताया।
कहा कि सत्रीय कार्य के लिए सहायक पुस्तकों का भी सहारा लिया जा सकता है। सत्रीय कार्य जमा न होने पर परीक्षा से वंचित हो सकते हैं। कार्यक्रम में डॉ. लोकपति त्रिपाठी, डॉ. सुधीर रंजन, डॉ. मोनिका सरोज, डॉ. जयसिंह यादव, डा. जय प्रकाश आदि रहे।