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फाइलों में हरे, जमीन पर वीरान
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पुरानी कलेक्ट्री ज्ञानपुर में सूखे पौधे।
- फोटो : BHADOHI
ज्ञानपुर। पर्यावरण को हराभरा बनाने की मुहिम धरातल पर फेल हो रही है। फाइलों में जो पौधे हर-भरे हैं, उसी जमीन पर वीरानी है। संरक्षण न होने से ज्यादातर पौधे सूख गए या उन्हें मवेशी चट कर गए हैं। खोदे गए गड्ढों में पौध लगाकर अफसर से लेकर कर्मचारी तक भूल गए। आलम यह है कि तीन साल में 30 लाख से अधिक पौधे रोपे गए, लेकिन शून्य वन क्षेत्र का ठप्पा नहीं हट सका।
औद्योगिक, शैक्षिक, चिकित्सकीय विकास, सड़क निर्माण, रेलवे दोहरीकरण के नाम पर हर साल बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होती है। अवैध एवं वैध आरा मशीनों पर भी गुपचुप तरीके से हरियाली को नष्ट किया जाता है। प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए हर साल शासन के निर्देश पर पौधरोपण होता है, लेकिन संरक्षण न होने से अधिकतर पौधे चंद दिनों में सूखकर नष्ट हो जाते हैं। गुजरे पांच जुुलाई से एक सप्ताह तक 10.35 लाख पौधे सरकारी दफ्तरों से लेकर ग्राम समाज की जमीन पर रोपे गए, लेकिन इसमें ज्यादातर सूख गए। गांवों में छुट्टा मवेशी पौधों को या तो चर गए या तोड़ दिए। सरकारी दफ्तरों में भी 10 फीसदी पौधे नहीं बच सके। आंकड़ों पर गौर करें तो 2018 में 17 लाख, 2019 में सात लाख जबकि 2020 में 10.35 लाख पौधे लगे, कितने पौधे बचे इसका जवाब वन विभाग के पास भी नहीं है। पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड भी गिने-चुने स्थानों पर ही लगाए गए।
प्रभागीय वनाधिकारी आलोक सक्सेना ने कहा कि शासन से मात्र 185 ट्री गार्ड का पैसा मिला। जिला मुख्यालय पर पौधों की सुरक्षा के लिए लगाया जा चुका है। सभी ध्यान देंगे तभी पौधे सुरक्षित रह पाएंगे।
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केस-1
ज्ञानपुर नगर के पुरानी कलेक्ट्रेट परिसर में फल संरक्षण विभाग कार्यालय के सामने 50 पौधे 10 दिन पूर्व रोपे गए, लेकिन अब वहां दो पौधे बचे हैं। शेष पौधे सूखकर नष्ट हो चुके हैं। कुछ गड्ढों में पौधे भी नहीं दिख रहे। ये पौधे लगे भी थे या नहीं, यह तो जांच का बिंदु है लेकिन हालात पौधारोपण अभियान की कलई यकीनन खोल रहे।
केस-2
डीघ और सुरियावां ब्लॉक में पौधरोपण अभियान में 200-200 पौधे लगाए गए। वर्तमान में 50-50 पौधे ही बचे हैं। 150 पौधे सूख गए या किसी ने उखाड़ दिए। कमोबेश यही स्थिति दूसरे ब्लॉकों की भी है।
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औद्योगिक, शैक्षिक, चिकित्सकीय विकास, सड़क निर्माण, रेलवे दोहरीकरण के नाम पर हर साल बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होती है। अवैध एवं वैध आरा मशीनों पर भी गुपचुप तरीके से हरियाली को नष्ट किया जाता है। प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए हर साल शासन के निर्देश पर पौधरोपण होता है, लेकिन संरक्षण न होने से अधिकतर पौधे चंद दिनों में सूखकर नष्ट हो जाते हैं। गुजरे पांच जुुलाई से एक सप्ताह तक 10.35 लाख पौधे सरकारी दफ्तरों से लेकर ग्राम समाज की जमीन पर रोपे गए, लेकिन इसमें ज्यादातर सूख गए। गांवों में छुट्टा मवेशी पौधों को या तो चर गए या तोड़ दिए। सरकारी दफ्तरों में भी 10 फीसदी पौधे नहीं बच सके। आंकड़ों पर गौर करें तो 2018 में 17 लाख, 2019 में सात लाख जबकि 2020 में 10.35 लाख पौधे लगे, कितने पौधे बचे इसका जवाब वन विभाग के पास भी नहीं है। पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड भी गिने-चुने स्थानों पर ही लगाए गए।
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प्रभागीय वनाधिकारी आलोक सक्सेना ने कहा कि शासन से मात्र 185 ट्री गार्ड का पैसा मिला। जिला मुख्यालय पर पौधों की सुरक्षा के लिए लगाया जा चुका है। सभी ध्यान देंगे तभी पौधे सुरक्षित रह पाएंगे।
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केस-1
ज्ञानपुर नगर के पुरानी कलेक्ट्रेट परिसर में फल संरक्षण विभाग कार्यालय के सामने 50 पौधे 10 दिन पूर्व रोपे गए, लेकिन अब वहां दो पौधे बचे हैं। शेष पौधे सूखकर नष्ट हो चुके हैं। कुछ गड्ढों में पौधे भी नहीं दिख रहे। ये पौधे लगे भी थे या नहीं, यह तो जांच का बिंदु है लेकिन हालात पौधारोपण अभियान की कलई यकीनन खोल रहे।
केस-2
डीघ और सुरियावां ब्लॉक में पौधरोपण अभियान में 200-200 पौधे लगाए गए। वर्तमान में 50-50 पौधे ही बचे हैं। 150 पौधे सूख गए या किसी ने उखाड़ दिए। कमोबेश यही स्थिति दूसरे ब्लॉकों की भी है।