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गोंडी समाज की समस्याओं के लिए लामबंद
bhadohi hindi news
Updated Sat, 25 Jun 2016 01:40 AM IST
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वीरांगना महारानी दुर्गावती के 452वें बलिदान दिवस पर अखिल भारतीय गोंड महासभा की जिला इकाई की ओर से शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पर केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ धरना दिया गया। अंत में प्रधानमंत्री और राज्यपाल को संबोधित युवाओं, किसानों और गोंडी समाज से जुड़ी समस्याओं का 19 सूत्री ज्ञापन डीएम को सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट और प्रदेश मुख्यालय पर वीरांगना दुर्गावती की प्रतिमा लगवाने की मांग की।
संगठन के श्यामलाल गोंड ने महारानी दुर्गावती के चित्र पर माल्यार्पण और हल्दी चावल का टीका लगाकर धरने का शुभारंभ किया। कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकारें गोंड समाज को सिर्फ वोट बैंक के रूप में प्रयोग कर रही हैं। गोंड समाज अब चुप नहीं बैठेगा। लोक बहादुर गोंड ने कहा कि देश के इतिहास में अंकित है कि इसके लिए वीरांगनाओं ने अपने जीवन को न्यौछावर कर दिया। संगठन की 19 सूत्री मांगों में गोंडी धर्म को अलग धर्म की मान्यता दें, गोंडी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल करें, आदिवासी महापुरुषों की प्रतिमा और पार्क स्थापित करने के लिए जिला मुख्यालय पर जमीन का आवंटन, गोंड धुरिया समुदाय को 13 जिलों की तरह एसटी में रखा जाए, समुदाय में मरने वाले लोगों को दफनाने के लिए जिलों में जमीन आवंटित हो, देश में एक समान शिक्षा व्यवस्था प्रभावी हो, शराब, गुटखा, गांजा, भांग पर प्रतिबंध लगे, सार्वजनिक स्थलों से मंदिर, मस्जिद हटाए जाएं, सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों में संविधान निर्माता के विचारों को पढ़ाया जाए, भदोही में सफाईकर्मी पद की नियुक्ति को बहाल करें, किसानों को सूखाराहत का चेक भेदभाव पूर्ण मिले, सांसद, विधायक, मंत्री के लिए न्यूनतम शिक्षा प्रभावी हो, स्नातक, स्नातकोत्तर समेत अन्य शिक्षा ग्रहण करने वाले गोंडी समुदाय के लोगों को छात्रवृत्ति और फीस प्रतिपूर्ति दी जाए। इस मौके पर राम आसरे गोंड, सूबेदार, रमाशंकर गोंड, महेंद्र कुमार गोंड, हरिनाथ, ललितराम, सुरेंद्र, लवकुश, आंचल, सुधा, फतेह बहादुर, विजयशंकर, सियाराम, आकाश सिंह, आशीष आदि मौजूद रहे।
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संगठन के श्यामलाल गोंड ने महारानी दुर्गावती के चित्र पर माल्यार्पण और हल्दी चावल का टीका लगाकर धरने का शुभारंभ किया। कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकारें गोंड समाज को सिर्फ वोट बैंक के रूप में प्रयोग कर रही हैं। गोंड समाज अब चुप नहीं बैठेगा। लोक बहादुर गोंड ने कहा कि देश के इतिहास में अंकित है कि इसके लिए वीरांगनाओं ने अपने जीवन को न्यौछावर कर दिया। संगठन की 19 सूत्री मांगों में गोंडी धर्म को अलग धर्म की मान्यता दें, गोंडी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल करें, आदिवासी महापुरुषों की प्रतिमा और पार्क स्थापित करने के लिए जिला मुख्यालय पर जमीन का आवंटन, गोंड धुरिया समुदाय को 13 जिलों की तरह एसटी में रखा जाए, समुदाय में मरने वाले लोगों को दफनाने के लिए जिलों में जमीन आवंटित हो, देश में एक समान शिक्षा व्यवस्था प्रभावी हो, शराब, गुटखा, गांजा, भांग पर प्रतिबंध लगे, सार्वजनिक स्थलों से मंदिर, मस्जिद हटाए जाएं, सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों में संविधान निर्माता के विचारों को पढ़ाया जाए, भदोही में सफाईकर्मी पद की नियुक्ति को बहाल करें, किसानों को सूखाराहत का चेक भेदभाव पूर्ण मिले, सांसद, विधायक, मंत्री के लिए न्यूनतम शिक्षा प्रभावी हो, स्नातक, स्नातकोत्तर समेत अन्य शिक्षा ग्रहण करने वाले गोंडी समुदाय के लोगों को छात्रवृत्ति और फीस प्रतिपूर्ति दी जाए। इस मौके पर राम आसरे गोंड, सूबेदार, रमाशंकर गोंड, महेंद्र कुमार गोंड, हरिनाथ, ललितराम, सुरेंद्र, लवकुश, आंचल, सुधा, फतेह बहादुर, विजयशंकर, सियाराम, आकाश सिंह, आशीष आदि मौजूद रहे।
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