{"_id":"6287fa687f641c252550cd1c7e14f0b7","slug":"expressions-of-devotion-should-be-selfless-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भक्ति निष्काम भाव से होनी चाहिए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भक्ति निष्काम भाव से होनी चाहिए
ब्यूरो/ अमर उजाला, भदोही
Updated Tue, 09 Feb 2016 11:45 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाके के जीयनपुर गांव में आयोजित श्रीरामकथा में मंगलवार को अयोध्या से आए मानस मर्मज्ञ केशरी दास रामायणी जी महाराज ने भगवत भक्ति का मर्म समझाया। कहा कि भगवान के चरित्र के श्रवण मात्र से भक्त उनके धाम को प्राप्त करता है। शर्त यही है कि भक्ति निष्काम भाव से होनी चाहिए।
रामकथा शशि किरन समाना, संत चकोर करहिं जेहिं पाना...। चौपाई से कथा का आरंभ करते हुए रामायणी जी ने कहा कि श्रीरामकथा का मूल उद्देश्य जीवन का तीसरा नेत्र प्राप्त करना होता है। उन्होंने मानस के विभिन्न प्रसंगों के जरिए जीवन से सांसारिक दुखों को दूर करने के उपाय बताए। कहा कि ये उपाय कठिन जरूर हो सकते हैं, लेकिन विफल नहीं। भगवान की कथा मंगलकारी और कल्याणकारी होती है। इससे अच्छी और बुरी दोनों प्रवृत्तियों में फर्क समझने की शक्ति पैदा होती है। यह पाप और संताप को मिटाने वाली होती है।
उन्होंने भगवान श्रीराम के जरिए पत्थर की शिला बनीं अहिल्या के उद्धार का मार्मिक वर्णन किया। प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दीर्घा में मौजूद रहे। कथा के दौरान बीच-बीच में जयकारे भी लगते रहे। अंत में आरती के बाद प्रसाद वितरण कार्यक्रम किया गया। रमाकांत तिवारी, हरिओम सिंह, बिंदू देवी, प्रीति देवी, अमला देवी, मीरा देवी, राजमणि उपाध्याय, कृष्णचंद्र उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
रामकथा शशि किरन समाना, संत चकोर करहिं जेहिं पाना...। चौपाई से कथा का आरंभ करते हुए रामायणी जी ने कहा कि श्रीरामकथा का मूल उद्देश्य जीवन का तीसरा नेत्र प्राप्त करना होता है। उन्होंने मानस के विभिन्न प्रसंगों के जरिए जीवन से सांसारिक दुखों को दूर करने के उपाय बताए। कहा कि ये उपाय कठिन जरूर हो सकते हैं, लेकिन विफल नहीं। भगवान की कथा मंगलकारी और कल्याणकारी होती है। इससे अच्छी और बुरी दोनों प्रवृत्तियों में फर्क समझने की शक्ति पैदा होती है। यह पाप और संताप को मिटाने वाली होती है।
विज्ञापन
उन्होंने भगवान श्रीराम के जरिए पत्थर की शिला बनीं अहिल्या के उद्धार का मार्मिक वर्णन किया। प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दीर्घा में मौजूद रहे। कथा के दौरान बीच-बीच में जयकारे भी लगते रहे। अंत में आरती के बाद प्रसाद वितरण कार्यक्रम किया गया। रमाकांत तिवारी, हरिओम सिंह, बिंदू देवी, प्रीति देवी, अमला देवी, मीरा देवी, राजमणि उपाध्याय, कृष्णचंद्र उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन