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साहित्य में डॉ. किशोरी लाल गुप्त का योगदान अतुलनीय : डॉ. राही

Sun, 08 Jun 2025 12:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 08 Jun 2025 12:27 AM IST
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Dr. Kishori Lal Gupta's contribution to literature is incomparable: Dr. Rahi
जंगीगंज। भदोही के रसखान स्मृति शेष डॉ. किशोरी लाल गुप्त के जन्मदिन पर शुक्रवार की शाम उनके पैतृक आवास सुधवै में संगोष्ठी व काव्यपाठ का आयोजन हुआ। इसमें जनपद सहित जौनपुर व प्रयागराज के कई साहित्यकारों की जुटान हुई।
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साहित्यकारों ने डॉ. किशोरी लाल गुप्त के कृतित्व व्यक्तित्व और उनके साहित्यिक अवदानों पर प्रकाश डाला। उनके कनिष्ठ पुत्र डॉ. रविंद्र कुमार गुप्त ने कहा कि उनसे मिले संस्कारों से ही उन्होंने साहित्य की विशेषताओं को जाना है। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कृष्ण अवतार त्रिपाठी राही ने कहा कि साहित्य के क्षेत्र में डॉ. गुप्त का योगदान अतुलनीय है। उनके द्वारा संपादित कई पुस्तकों ने समाज को नई दिशा दी। उनकी हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में अच्छी पकड़ थी।
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उन्होंने अंग्रेजी में कामायनी का अनुवाद भी किया है। वे ब्रजभाषा भाषा के देश भर में प्रसिद्ध विद्वान थे। उनकी 139 पुस्तकें प्रकाशित हैं। इस दौरान नरेंद्र सिंह, संदीप बालाजी, इंदु चंद्र पांडेय, अमित शर्मा आदि रहे। संचालन पारस नाथ और आभार डॉ. रविन्द्र गुप्त ने किया। संवाद
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