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गजब! जन्म लेते ही मिली नौकरी
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही
Updated Fri, 22 Apr 2016 01:51 AM IST
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के भुगतान का फार्मेट।
बाल विकास परियोजना विभाग में काम की पारदर्शिता को लेकर कितनी संजीदगी बरती जाती है, इसकी बानगी ऊपर के तीनों केस स्टडी में साफ देखी जा सकती है। बाल विकास परियोजना कार्यालय डीघ के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय भुगतान के फार्मेट में ब्लॉक के सभी 466 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी आंगनबाड़ी और सहायिकाओं की जन्मतिथि और सेवा योगदान की तिथि समान अंकित कर दी गई है। यह फार्मेट विभाग में नियुक्ति से जुड़ी सूचना के लिए डाले गए आरटीआई आवेदन के तहत मुहैया कराया गया है, इसलिए विभाग में की गई नियुक्तियां भी सवालों के घेरे में आ गईं हैं। जाहिर है विभागीय कारनामे के मुताबिक डीघ ब्लॉक में नियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जन्म लेते ही नौकरी पा गए।
जिले के डीघ ब्लॉक के बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति को लेकर आरटीआई के तहत हुए खुलासे में हजम न होने वाले मामले सामने आए हैं। सीडीपीओ डीघ की ओर से आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय भुगतान की जो सूची उपलब्ध कराई गई है, उसमें ब्लॉक की सभी 466 कार्यकर्ताओं की जो ज्वाइनिंग तिथि है वही उनकी जन्मतिथि भी है। हैरत की बात यह है कि इस बाबत किसी भी सवाल का विभाग के पास फिलहाल उत्तर नहीं है। सूत्रों
की मानें तो विभाग के पास नियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कोई रिकार्ड ही नहीं है। इसके चलते नियुक्ति में लीपापोती की पूरी गुंजाइश है। आरटीआई कार्यकर्ता विभूति नारायण दुबे के पांच अप्रैल 2012 को मांगी गई सूचना के बाबत सीडीपीओ डीघ प्रेमलता सिन्हा की ओर से सात नवंबर 2014 को उपलब्ध कराई गई सूचना में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति से जुड़ेेेे चौंकाने वाले तथ्य आने के बाद जिला प्रशासन के अधिकारी भी हैरत में हैं।
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जिले के डीघ ब्लॉक के बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति को लेकर आरटीआई के तहत हुए खुलासे में हजम न होने वाले मामले सामने आए हैं। सीडीपीओ डीघ की ओर से आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय भुगतान की जो सूची उपलब्ध कराई गई है, उसमें ब्लॉक की सभी 466 कार्यकर्ताओं की जो ज्वाइनिंग तिथि है वही उनकी जन्मतिथि भी है। हैरत की बात यह है कि इस बाबत किसी भी सवाल का विभाग के पास फिलहाल उत्तर नहीं है। सूत्रों
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की मानें तो विभाग के पास नियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कोई रिकार्ड ही नहीं है। इसके चलते नियुक्ति में लीपापोती की पूरी गुंजाइश है। आरटीआई कार्यकर्ता विभूति नारायण दुबे के पांच अप्रैल 2012 को मांगी गई सूचना के बाबत सीडीपीओ डीघ प्रेमलता सिन्हा की ओर से सात नवंबर 2014 को उपलब्ध कराई गई सूचना में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति से जुड़ेेेे चौंकाने वाले तथ्य आने के बाद जिला प्रशासन के अधिकारी भी हैरत में हैं।
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