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Bhadohi News: सात लेखपालों के खिलाफ अधिवक्ताओं ने खोला मोर्चा
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सर्रोई। भदोही तहसील में सालों से जमे राजस्वकर्मियों एवं आउटसाइडरों की मनमानी को लेकर अधिवक्ता मुखर हो गए हैं। सोमवार को नाराज अधिवक्ताओं ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि तहसील के सात लेखपाल कुछ आउटसाइडरों के सहयोग से महत्वपूर्ण पत्रावलियों में हेरफेर करते हैं। इससे वादकारियों को न्याय नहीं मिल पाता है।
अधिवक्ताओं ने केंद्रीय जांच ब्यूरो समेत शासन को पत्र लिखकर सालों से जमे लेखपालों को स्थानांतरित करने की मांग की है। अधिवक्ताओं ने कहा कि नायब तहसीलदार के यहां चलने वाले मुकदमों में फैसला होने के बाद साजिश के तहत रिस्टोर प्रार्थना पत्र डाला जाता है। इसमें तहसील के सात लेखपाल और आउटसाइडरों की भूमिका रहती है।
तहसील स्तर पर शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हुई। आरोप लगाया कि तहसील के लेखपाल रिशुन यादव, श्रवण कुमार मिश्रा, राज विमल, अनुराग चौधरी, राहुल गौड़, नीति शुक्ला, शुभम ओझा कई साल से एक ही हल्के में तैनात है। इसमें कुछ लेखपालों को पूर्व में एंटी करप्शन टीम रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर चुकी है, हालांकि बाद में निलंबन से बहाल होने पर उनको पूर्व का ही हल्का दिया गया है। इससे तहसील में भ्रष्टाचार कम नहीं हो रहा है।
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अधिवक्ता संदीप कुमार यादव ने बताया कि सात मार्च को उनके पक्ष में आदेश हुआ, लेकिन 29 मई को रेस्टोरेशन दाखिल कर मूल पत्रावली ही हटा दी गई।
सातों लेखपाल को हटाने की मांग की गई। कहा कि अगर सुनवाई नहीं होगी तो आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर रुद्रदेव मौर्य, अंकित पांडेय, रामकृष्ण यादव, अशोक यादव, कमलेश कुमार, सतीश यादव, लालचंद विश्वकर्मा, नीरज यादव, जय कृष्ण यादव, रामकृष्ण यादव आदि रहे।
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अधिवक्ताओं ने केंद्रीय जांच ब्यूरो समेत शासन को पत्र लिखकर सालों से जमे लेखपालों को स्थानांतरित करने की मांग की है। अधिवक्ताओं ने कहा कि नायब तहसीलदार के यहां चलने वाले मुकदमों में फैसला होने के बाद साजिश के तहत रिस्टोर प्रार्थना पत्र डाला जाता है। इसमें तहसील के सात लेखपाल और आउटसाइडरों की भूमिका रहती है।
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तहसील स्तर पर शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हुई। आरोप लगाया कि तहसील के लेखपाल रिशुन यादव, श्रवण कुमार मिश्रा, राज विमल, अनुराग चौधरी, राहुल गौड़, नीति शुक्ला, शुभम ओझा कई साल से एक ही हल्के में तैनात है। इसमें कुछ लेखपालों को पूर्व में एंटी करप्शन टीम रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर चुकी है, हालांकि बाद में निलंबन से बहाल होने पर उनको पूर्व का ही हल्का दिया गया है। इससे तहसील में भ्रष्टाचार कम नहीं हो रहा है।
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अधिवक्ता संदीप कुमार यादव ने बताया कि सात मार्च को उनके पक्ष में आदेश हुआ, लेकिन 29 मई को रेस्टोरेशन दाखिल कर मूल पत्रावली ही हटा दी गई।
सातों लेखपाल को हटाने की मांग की गई। कहा कि अगर सुनवाई नहीं होगी तो आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर रुद्रदेव मौर्य, अंकित पांडेय, रामकृष्ण यादव, अशोक यादव, कमलेश कुमार, सतीश यादव, लालचंद विश्वकर्मा, नीरज यादव, जय कृष्ण यादव, रामकृष्ण यादव आदि रहे।