{"_id":"64-115261","slug":"Bhadohi-115261-64","type":"story","status":"publish","title_hn":"बोर्ड परीक्ष्ाा में लगा फर्जी एडमिशन पर अंकुश ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बोर्ड परीक्ष्ाा में लगा फर्जी एडमिशन पर अंकुश
Bhadohi
Updated Mon, 02 Dec 2013 05:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्ञानपुर। ऑनलाइन आवेदन ने शिक्षा माफियाओं के चक्रव्यूह को ध्वस्त कर दिया है। ऑनलाइन दखल से यूपी बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं की तस्वीर साफ हो गई है। पिछले साल की तुलना में करीब छह हजार छात्र-छात्राओं की संख्या घट गई है। हाईस्कूल में जहां चार हजार वहीं इंटरमीडिएट में यह संख्या दो हजार कम हुई है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से प्रत्येक वर्ष होने वाली बोर्ड परीक्षा में शिक्षा माफियाओं की कारगुजारी हावी रहती थी। परीक्षा के दौरान नाम किसी का और परीक्षा कोई और दे रहा होता है। एक-एक छात्र-छात्राओं का कई जिले के विद्यालयों में एडमिशन करा दिया जाता था। शिक्षा माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए बीते वर्ष शासन ने आनलाइन पंजीकरण के तहत आवेदन लेने का निर्देश दिया। जिले में विभागीय अधिकारियों के सख्त रवैये के चलते छात्र-छात्राओं की वास्तविक तस्वीर खुलकर सामने आ गई। एक ही साल में छात्रसंख्या छह हजार तक घट गई। विभागीय आंकड़ो पर गौर किया जाए तो वर्ष 2012-13 में नौंवी में 34 हजार 315 और 11वीं में 26 हजार 222 समेत करीब 60 हजार छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया था वहीं वर्ष 2013-14 में आनलाइन व्यवस्था प्रभावी होने के बाद नौंवी में 30 हजार और इंटरमीडिएट में 24 हजार समेत 54 हजार संख्या पहुंच गई है। ऑनलाइन आवेदन के चलते जिले में करीब छह हजार छात्र-छात्राओं का आवेदन नहीं हो सका। आनलाइन व्यवस्था से शिक्षा माफियाओं की ओर से की सभी तैयारी धरी की धरी रह गई। शासन के इस पहल पर फर्जी तरीके से आवेदन करने वाले छात्र-छात्राओं पर अंकुश लग गया है।
जिला विद्यालय निरीक्षक आनंदकर पांडेय ने कहा कि शासन के निर्देश पर जनपद स्तर पर सभी को हिदायत दी गई थी। विभागीय सख्ती के चलते आवेदनों की संख्या घटी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से प्रत्येक वर्ष होने वाली बोर्ड परीक्षा में शिक्षा माफियाओं की कारगुजारी हावी रहती थी। परीक्षा के दौरान नाम किसी का और परीक्षा कोई और दे रहा होता है। एक-एक छात्र-छात्राओं का कई जिले के विद्यालयों में एडमिशन करा दिया जाता था। शिक्षा माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए बीते वर्ष शासन ने आनलाइन पंजीकरण के तहत आवेदन लेने का निर्देश दिया। जिले में विभागीय अधिकारियों के सख्त रवैये के चलते छात्र-छात्राओं की वास्तविक तस्वीर खुलकर सामने आ गई। एक ही साल में छात्रसंख्या छह हजार तक घट गई। विभागीय आंकड़ो पर गौर किया जाए तो वर्ष 2012-13 में नौंवी में 34 हजार 315 और 11वीं में 26 हजार 222 समेत करीब 60 हजार छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया था वहीं वर्ष 2013-14 में आनलाइन व्यवस्था प्रभावी होने के बाद नौंवी में 30 हजार और इंटरमीडिएट में 24 हजार समेत 54 हजार संख्या पहुंच गई है। ऑनलाइन आवेदन के चलते जिले में करीब छह हजार छात्र-छात्राओं का आवेदन नहीं हो सका। आनलाइन व्यवस्था से शिक्षा माफियाओं की ओर से की सभी तैयारी धरी की धरी रह गई। शासन के इस पहल पर फर्जी तरीके से आवेदन करने वाले छात्र-छात्राओं पर अंकुश लग गया है।
विज्ञापन
जिला विद्यालय निरीक्षक आनंदकर पांडेय ने कहा कि शासन के निर्देश पर जनपद स्तर पर सभी को हिदायत दी गई थी। विभागीय सख्ती के चलते आवेदनों की संख्या घटी है।
विज्ञापन