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मदर्स डे: कविताओं के जरिए किया मां को नमन
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ज्ञानपुर। इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है, मां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है...। मदर्स डे के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में शुक्रवार को मुनौवर राणा की इन लाइनों के जरिए मां की महिमा का बखान किया गया। कवियों और बुद्धिजीवियों ने अपनी मां के लिए कुछ इसी अंदाज में स्नेह बिखेरा। एलसीसी कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र में प्रयास फाउंडेशन महथुआ की ओर से आयोजित मातृ दिवस कार्यक्रम में कवियों, युवाओं और बुद्धिजीवियों ने अपनी रचनाओं, गीतों और वक्तव्यों के जरिए शब्द वैभव बिखेरा। इस मौके पर उत्कृष्ट गायन के लिए प्रतिमा मिश्रा को मातृत्व वात्सल्य सम्मान देकर प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत गायन से हुई। इसमें दिव्या दुबे, आर्यन दुबे, ज्योति पाठक, शालिनी दुबे, दीपिका दुबे, अंकिता चौबे, कीर्ति पाठक आदि ने मां पर आधारित गीतों के जरिए लोगों को भावविभोर कर दिया। सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट गायन के लिए कांवल गांव निवासी प्रतिमा को सम्मानित किया गया। इसके बाद शायर अनिल जख्मी ने पढ़ा-बेटोन भूलो स्वर्ग का सामान है माता, सबसे बड़ा जमाने का अरमान हैं माता...। इस पर खूब तालियां बजीं। संचालन कर रहे संस्था के अध्यक्ष शिवानंद चौबे बीच-बीच में अपनी रचनाओं के जरिए मां के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते रहे। उन्होंने मां वेद है मां पुराण है मां सृष्टि का आधार है, गंगा सी पावन अश्रुजल मां खुशियों का संसार है...पढ़कर वाहवाही लूटी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यूबीआई के वित्तीय सलाहकार महेंद्र सिंहने कहा कि हम सभी ऋण से मुक्तहो सकते हैं, लेकिन मातृ ऋण से नहीं। विशिष्ट अतिथि देवेंद्र दुबे ने कहा कि मां अपने आप में अविभक्त हैं। एलसीसी के डायरेक्टर योगेंद्र पाठक ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस मौके पर नरेंद्र दुबे, विभव मिश्र, अभिषेक दीक्षित, नीरज दुबे, कृष्णानंद, आकाश मिश्र, सौरभ दीक्षित, परमानंद चौबे, रोहित यादव, ममता दुबे, नरेंद्रदु बे, अनुराधा पांडेय आदि रहे।
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कार्यक्रम की शुरुआत गायन से हुई। इसमें दिव्या दुबे, आर्यन दुबे, ज्योति पाठक, शालिनी दुबे, दीपिका दुबे, अंकिता चौबे, कीर्ति पाठक आदि ने मां पर आधारित गीतों के जरिए लोगों को भावविभोर कर दिया। सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट गायन के लिए कांवल गांव निवासी प्रतिमा को सम्मानित किया गया। इसके बाद शायर अनिल जख्मी ने पढ़ा-बेटोन भूलो स्वर्ग का सामान है माता, सबसे बड़ा जमाने का अरमान हैं माता...। इस पर खूब तालियां बजीं। संचालन कर रहे संस्था के अध्यक्ष शिवानंद चौबे बीच-बीच में अपनी रचनाओं के जरिए मां के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते रहे। उन्होंने मां वेद है मां पुराण है मां सृष्टि का आधार है, गंगा सी पावन अश्रुजल मां खुशियों का संसार है...पढ़कर वाहवाही लूटी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यूबीआई के वित्तीय सलाहकार महेंद्र सिंहने कहा कि हम सभी ऋण से मुक्तहो सकते हैं, लेकिन मातृ ऋण से नहीं। विशिष्ट अतिथि देवेंद्र दुबे ने कहा कि मां अपने आप में अविभक्त हैं। एलसीसी के डायरेक्टर योगेंद्र पाठक ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस मौके पर नरेंद्र दुबे, विभव मिश्र, अभिषेक दीक्षित, नीरज दुबे, कृष्णानंद, आकाश मिश्र, सौरभ दीक्षित, परमानंद चौबे, रोहित यादव, ममता दुबे, नरेंद्रदु बे, अनुराधा पांडेय आदि रहे।
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