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Bhadohi News: कालीन उद्योग को बचाने के लिए मांगा 20 प्रतिशत बेल आउट पैकेज
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भदोही। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) ने अमेरिकी टैरिफ को भारत के हस्तनिर्मित कालीन उद्योग में लगे 20 लाख से अधिक ग्रामीण कारीगरों के अस्तित्व पर संकट करार देते हुए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। परिषद का कहना है कि अमेरिका के 25 प्रतिशत टैरिफ को मिलाकर भारतीय कालीनों पर अतिरिक्त शुल्क मिलाकर अब लगभग 30 प्रतिशत तक हो गया है। अचानक इस वृद्धि से भारतीय निर्यातकों का भारी नुकसान हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर ऑर्डर रद्द हो रहे हैं।
सीईपीसी चेयरमैन कुलदीप राज वाटल ने नई दिल्ली से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर, शाहजहांपुर, आगरा, पानीपत, जयपुर और श्रीनगर हमारे कालीन उत्पादन वाले क्षेत्र हैं। ट्रंप सरकार की नई टैरिफ व्यवस्था से इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नौकरियां खत्म होने की कगार पर पहुंच गई हैं। इससे विश्व बाजार में भारत की हिस्सेदारी कम होने का खतरा मंडरा रहा है। यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो तुर्की, चीन और पाकिस्तान जैसे देश इसका लाभ उठाएंगे। उन्होंने कहा कि हमारे हस्तनिर्मित कालीन निर्यात का 60 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को जाता है। ट्रंप के इस कदम का प्रभाव न केवल वाणिज्यिक है, बल्कि सामाजिक भी है। कालीन बुनाई हमारी विरासत का एक हिस्सा तो है ही, ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ भी है। 25 प्रतिशत टैक्स भारतीय कालीन उद्योग जैसे पारंपरिक रोज़गार-सृजनकारी उद्योग के लिए भारी नुकसान है। कहा कि हम लाखों मजदूरों, बुनकरों की ओर से प्रधानमंत्री से आग्रह करते हैं कि वे निर्यात बनाए रखने और कारीगरों की आजीविका की रक्षा के लिए भारतीय कालीन उद्योग के लिए 20 प्रतिशत का बेलआउट पैकेज की घोषणा करें।
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सीईपीसी चेयरमैन कुलदीप राज वाटल ने नई दिल्ली से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर, शाहजहांपुर, आगरा, पानीपत, जयपुर और श्रीनगर हमारे कालीन उत्पादन वाले क्षेत्र हैं। ट्रंप सरकार की नई टैरिफ व्यवस्था से इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नौकरियां खत्म होने की कगार पर पहुंच गई हैं। इससे विश्व बाजार में भारत की हिस्सेदारी कम होने का खतरा मंडरा रहा है। यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो तुर्की, चीन और पाकिस्तान जैसे देश इसका लाभ उठाएंगे। उन्होंने कहा कि हमारे हस्तनिर्मित कालीन निर्यात का 60 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को जाता है। ट्रंप के इस कदम का प्रभाव न केवल वाणिज्यिक है, बल्कि सामाजिक भी है। कालीन बुनाई हमारी विरासत का एक हिस्सा तो है ही, ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ भी है। 25 प्रतिशत टैक्स भारतीय कालीन उद्योग जैसे पारंपरिक रोज़गार-सृजनकारी उद्योग के लिए भारी नुकसान है। कहा कि हम लाखों मजदूरों, बुनकरों की ओर से प्रधानमंत्री से आग्रह करते हैं कि वे निर्यात बनाए रखने और कारीगरों की आजीविका की रक्षा के लिए भारतीय कालीन उद्योग के लिए 20 प्रतिशत का बेलआउट पैकेज की घोषणा करें।
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