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एक ही क्रमांक, कभी अंगूठा तो कभी दस्तखत से भुगतान
Updated Tue, 28 Nov 2017 12:26 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)। मनरेगा मजदूरी के भुगतान में गड़बड़ी उजागर हुई है। एक ही क्रमांक के जॉबकार्ड पर दो अलग-अलग लोगों का भुगतान करा लिया गया है। खास बात यह कि एक ही मजदूर का भुगतान कभी अंगूठे का निशान लगाकर तो कभी दस्तखत के जरिए कराया गया है। गड़बड़ी का यह मामला क्षेत्र के संसारापुर गांव का है।
गरीब बेरोजगारों को गांव में ही रोजगार देने और विकास कार्यों के सृजन के लिए केंद्र सरकार की ओर से संचालित मनरेगा योजना में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ियां हुईं हैं। कहीं मनमाने ढंग से मास्टर रोल भरे जाने की शिकायत सामने आई है तो कहीं भुगतान में हेरफेर किया गया है। तमाम प्रयास के बाद भी इस महत्वाकांक्षी योजना में गड़बड़ियों पर अंकुश नहीं लगाया जा पा रहा है। ताजा मामला क्षेत्र के संसारापुर गांव का है, जहां आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में पहले तो सूचना देने में हीलाहवाली की गई, लेकिन बाद में आयोग की ओर से अर्थदंड लगाने के बाद जो सूचना मिली, वह चौंकाने वाली है। गांव में मनरेगा के तहत तालाब खोदाई के कार्य से जुड़े जॉबकार्ड, मजदूरी भुगतान आदि के संबंध में आरटीआई कार्यकर्ता विभूति नारायण दुबे ने आरटीआई से सूचना मांगी थी। सूचना न मिलने पर राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दाखिल किए जाने के बाद आयोग ने एडीओ पंचायत पर 25 हजार का जुर्माना लगाते हुए 15 दिन के भीतर सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इसके बाद जो सूचना मिली, उसमें मनरेगा मजदूरों का किसी मस्टररोल में हस्ताक्षर है तो किसी में अंगूठे का निशान लगा है। मजदूरी भुगतान के संबंध में की गई कंप्यूटर फीडिंग में भी गड़बड़ी की गई है। एक ही क्रमांक संख्या पर दो जॉबकार्डधारकों को दर्शाया गया है। यही नहीं दोनों का मजदूरी भुगतान का ब्योरा भी 106 जॉबकार्ड संख्या पर अंकित है। इससे गड़बड़ी की आशंका को बल मिल रहा है। शिकायतकर्ता ने इस मामले की शिकायत केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को पत्र भेजकर कर दी है।
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गरीब बेरोजगारों को गांव में ही रोजगार देने और विकास कार्यों के सृजन के लिए केंद्र सरकार की ओर से संचालित मनरेगा योजना में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ियां हुईं हैं। कहीं मनमाने ढंग से मास्टर रोल भरे जाने की शिकायत सामने आई है तो कहीं भुगतान में हेरफेर किया गया है। तमाम प्रयास के बाद भी इस महत्वाकांक्षी योजना में गड़बड़ियों पर अंकुश नहीं लगाया जा पा रहा है। ताजा मामला क्षेत्र के संसारापुर गांव का है, जहां आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में पहले तो सूचना देने में हीलाहवाली की गई, लेकिन बाद में आयोग की ओर से अर्थदंड लगाने के बाद जो सूचना मिली, वह चौंकाने वाली है। गांव में मनरेगा के तहत तालाब खोदाई के कार्य से जुड़े जॉबकार्ड, मजदूरी भुगतान आदि के संबंध में आरटीआई कार्यकर्ता विभूति नारायण दुबे ने आरटीआई से सूचना मांगी थी। सूचना न मिलने पर राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दाखिल किए जाने के बाद आयोग ने एडीओ पंचायत पर 25 हजार का जुर्माना लगाते हुए 15 दिन के भीतर सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इसके बाद जो सूचना मिली, उसमें मनरेगा मजदूरों का किसी मस्टररोल में हस्ताक्षर है तो किसी में अंगूठे का निशान लगा है। मजदूरी भुगतान के संबंध में की गई कंप्यूटर फीडिंग में भी गड़बड़ी की गई है। एक ही क्रमांक संख्या पर दो जॉबकार्डधारकों को दर्शाया गया है। यही नहीं दोनों का मजदूरी भुगतान का ब्योरा भी 106 जॉबकार्ड संख्या पर अंकित है। इससे गड़बड़ी की आशंका को बल मिल रहा है। शिकायतकर्ता ने इस मामले की शिकायत केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को पत्र भेजकर कर दी है।
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