{"_id":"5c967547bdec22140012d279","slug":"121553364295-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो रोजा सालाना उर्स का समापन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो रोजा सालाना उर्स का समापन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
भदोही। तकिया कल्लन शाह स्थित हजरत दाता कल्लन शाह शहरवर्दी रहमतुल्लाह अलैह का दो रोजा सालाना उर्स शनिवार की रात संपन्न हो गया। पहले दिन जलसा और दूसरे दिन कुरआन ख्वानी और रात में महफिले शमा का आयोजन किया गया। जलसे में बिहार से आए मौ. अब्दुल कादिर ने कुरआन और हदीश की रौशनी में लोगों को जिंदगी बशर करने के तौर तरीके बताए। उन्होंने मु सलमानों को इंसानियत पर चलने का पैगाम दिया।
मौलाना ने कहा कि मिलजुल कर रहना ही इस्लाम सिखाता है। आप जहां रहें उस मिट्टी से मोहब्बत करें। इस्लाम अपने वतन से मोहब्बत करने की भी सीख देता है। जो लोग दीन के रास्ते पर चलेंगे वे खुद ब खुद नमाज की राह पकड़ेंगे। ऐसे लोग अपने मां-बाप का सम्मान तो करेंगे ही अपने बुजुर्गों से सही के बताए रास्ते का अनुसरण करेंगे। मौलाना ने बुजुर्गानेदिन के मर्तबे पर भी खिताब किया। कहा बुजुर्गानेदीन से निस्बत में रखने से अल्लाह आपकी सुनता है। दीने हक पर चलने का जज्बा मिलता है। मौलाना अब्दुस्समद जेयाई ने मां-बाप की अजमत पर खिताब किया। मौ. फैसल अशर्फी ने वालदैन के हुकूक पर बयान किया और दुनियावी तालीम के साथ साथ दीनी तालीम भी हासिल करने पर जोर दिया।
शनिवार को सुबह कुरआन ख्वानी से उर्स की शुरुआत हुई। रात में महफिले शमा में में श्रोताओं ने दे रात तक कौव्वाली का आनंद लिया। उर्स के चलते उनके आस्ताने पर चहल पहल और मेले जैसा माहौल रहा। देर रात तक मजार पर चादर चढ़ाने वालों का तांता लगा रहा। शायर अरमान रजा हजारीबाग, रहमतुल्लाह अली चंदौली, हाफिज कारी आस मोहम्मद भिवडी, सैयारा कमर, अशफाक कामिल, फैय्याज भदोहवी, कारी आलम, असीम अशरी आदि ने नातेपाक का नजराना पेश किया।
भदोही। तकिया कल्लन शाह स्थित हजरत दाता कल्लन शाह शहरवर्दी रहमतुल्लाह अलैह का दो रोजा सालाना उर्स शनिवार की रात संपन्न हो गया। पहले दिन जलसा और दूसरे दिन कुरआन ख्वानी और रात में महफिले शमा का आयोजन किया गया। जलसे में बिहार से आए मौ. अब्दुल कादिर ने कुरआन और हदीश की रौशनी में लोगों को जिंदगी बशर करने के तौर तरीके बताए। उन्होंने मु सलमानों को इंसानियत पर चलने का पैगाम दिया।
मौलाना ने कहा कि मिलजुल कर रहना ही इस्लाम सिखाता है। आप जहां रहें उस मिट्टी से मोहब्बत करें। इस्लाम अपने वतन से मोहब्बत करने की भी सीख देता है। जो लोग दीन के रास्ते पर चलेंगे वे खुद ब खुद नमाज की राह पकड़ेंगे। ऐसे लोग अपने मां-बाप का सम्मान तो करेंगे ही अपने बुजुर्गों से सही के बताए रास्ते का अनुसरण करेंगे। मौलाना ने बुजुर्गानेदिन के मर्तबे पर भी खिताब किया। कहा बुजुर्गानेदीन से निस्बत में रखने से अल्लाह आपकी सुनता है। दीने हक पर चलने का जज्बा मिलता है। मौलाना अब्दुस्समद जेयाई ने मां-बाप की अजमत पर खिताब किया। मौ. फैसल अशर्फी ने वालदैन के हुकूक पर बयान किया और दुनियावी तालीम के साथ साथ दीनी तालीम भी हासिल करने पर जोर दिया।
विज्ञापन
शनिवार को सुबह कुरआन ख्वानी से उर्स की शुरुआत हुई। रात में महफिले शमा में में श्रोताओं ने दे रात तक कौव्वाली का आनंद लिया। उर्स के चलते उनके आस्ताने पर चहल पहल और मेले जैसा माहौल रहा। देर रात तक मजार पर चादर चढ़ाने वालों का तांता लगा रहा। शायर अरमान रजा हजारीबाग, रहमतुल्लाह अली चंदौली, हाफिज कारी आस मोहम्मद भिवडी, सैयारा कमर, अशफाक कामिल, फैय्याज भदोहवी, कारी आलम, असीम अशरी आदि ने नातेपाक का नजराना पेश किया।
विज्ञापन