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Basti News: जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड और मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन बंदम
Fri, 11 Oct 2024 12:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 11 Oct 2024 12:33 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिला एवं मेडिकल कॉलेज स्तर के अस्पताल में भी मरीजों के साथ खेल हो रहा है। अक्सर जांच से संबंधित मशीनों में खराबी आ जा रही है। इससे मरीज माफिया की बहार आ जाती है।
किसी न किसी जांच के बहाने अस्पताल आए मरीजों को निजी सेंटरों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके बदले उनसे अच्छी खासी रकम ऐंठ ली जा रही है। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच एक माह से बंद है। मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली में मरीजों का सीटी स्कैन एक पखवाड़े से नहीं हो रहा है। यहां मशीन में यांत्रिक खराबी बताई जा रही है।
जिला अस्पताल आए रुधौली के सुभाष ने बताया कि सरकारी अस्पताल जैसी सुविधा निजी नर्सिंग होम एवं जांच सेंटरों पर नहीं है। वहां डिग्रीधारकों की भी कमी है। फिर भी मरीज ज्यादातर वहीं जा रहे हैं। यह मरीज माफिया के साजिश की देन हैं। यदि अस्पताल में नियमित रूप से जांच व्यवस्था संचालित हो तो शायद सरकारी अस्पताल के मरीजों को अंदर से बाहर ले जाने की गुंजाइश खत्म हो जाए। कप्तानगंज के विनोद का कहना है कि मशीन अपने आप थोड़े खराब होती है, उसकी गारंटी होती है। खराब होने के बाद तत्काल संबंधित कंपनी द्वारा ठीक कराने की भी व्यवस्था है। मगर, मरीज माफिया की सेटिंग की देन है कि अस्पताल में कभी जांच तो कभी ओटी की मशीन खराब हो जाती है, ताकि मरीजों को निजी सेंटरों तक पहुंचाने का एक बहाना रहे। इसकी तस्दीक इस नाते भी हो रही है कि जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच छह माह से ठप हैं।
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हालांकि, यहां मशीन खराब नहीं बताई जा रही है। अलबत्ता रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में यह सेंटर बंद चल रहा है। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी और भर्ती वार्ड तक चिकित्सकों द्वारा पेट से संबंधित एवं अन्य बीमारियों में अल्ट्रासाउंड जाचं जरूरी बताया जा रहा है।
बाद में मरीज माफिया के एजेंट मरीज के संपर्क में आकर उन्हें बाहर के सेंटर पर ले जा रहे हैं। मुंडेरवा के मो. फारूक ने बताया कि वह अपने भाई को दिखाने जिला अस्पताल आए हैं। एक चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड जांच कराने की सलाह दी। तभी वहीं बगल में खड़ा एक युवक उन्हें लेकर गेट से बाहर निजी सेंटर पर पहुंच गया। 800 रुपये जमा कराकर अल्ट्रासाउंड जांच की गई।
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बस्ती। जिला एवं मेडिकल कॉलेज स्तर के अस्पताल में भी मरीजों के साथ खेल हो रहा है। अक्सर जांच से संबंधित मशीनों में खराबी आ जा रही है। इससे मरीज माफिया की बहार आ जाती है।
किसी न किसी जांच के बहाने अस्पताल आए मरीजों को निजी सेंटरों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके बदले उनसे अच्छी खासी रकम ऐंठ ली जा रही है। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच एक माह से बंद है। मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली में मरीजों का सीटी स्कैन एक पखवाड़े से नहीं हो रहा है। यहां मशीन में यांत्रिक खराबी बताई जा रही है।
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जिला अस्पताल आए रुधौली के सुभाष ने बताया कि सरकारी अस्पताल जैसी सुविधा निजी नर्सिंग होम एवं जांच सेंटरों पर नहीं है। वहां डिग्रीधारकों की भी कमी है। फिर भी मरीज ज्यादातर वहीं जा रहे हैं। यह मरीज माफिया के साजिश की देन हैं। यदि अस्पताल में नियमित रूप से जांच व्यवस्था संचालित हो तो शायद सरकारी अस्पताल के मरीजों को अंदर से बाहर ले जाने की गुंजाइश खत्म हो जाए। कप्तानगंज के विनोद का कहना है कि मशीन अपने आप थोड़े खराब होती है, उसकी गारंटी होती है। खराब होने के बाद तत्काल संबंधित कंपनी द्वारा ठीक कराने की भी व्यवस्था है। मगर, मरीज माफिया की सेटिंग की देन है कि अस्पताल में कभी जांच तो कभी ओटी की मशीन खराब हो जाती है, ताकि मरीजों को निजी सेंटरों तक पहुंचाने का एक बहाना रहे। इसकी तस्दीक इस नाते भी हो रही है कि जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच छह माह से ठप हैं।
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हालांकि, यहां मशीन खराब नहीं बताई जा रही है। अलबत्ता रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में यह सेंटर बंद चल रहा है। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी और भर्ती वार्ड तक चिकित्सकों द्वारा पेट से संबंधित एवं अन्य बीमारियों में अल्ट्रासाउंड जाचं जरूरी बताया जा रहा है।
बाद में मरीज माफिया के एजेंट मरीज के संपर्क में आकर उन्हें बाहर के सेंटर पर ले जा रहे हैं। मुंडेरवा के मो. फारूक ने बताया कि वह अपने भाई को दिखाने जिला अस्पताल आए हैं। एक चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड जांच कराने की सलाह दी। तभी वहीं बगल में खड़ा एक युवक उन्हें लेकर गेट से बाहर निजी सेंटर पर पहुंच गया। 800 रुपये जमा कराकर अल्ट्रासाउंड जांच की गई।