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Basti News: अल्ट्रासाउंड सेंटर का पंजीकरण निलंबित, संचालन पर रोक
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बस्ती। जिले में अल्ट्रासाउंड सेंटरों के संचालन में फर्जीवाड़े के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। विक्रमजोत के एक सेंटर में चिकित्सक की अनुमति के बिना उसकी डिग्री का इस्तेमाल कर पीसीपीएनडीटी के तहत पंजीकरण कराने का मामला सामने आया है। चिकित्सक की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सेंटर का पंजीकरण निलंबित करते हुए संचालन पर रोक लगा दी है। संचालक को नोटिस जारी कर दो दिन में साक्ष्य समेत स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं।
मेसर्स विमल डायग्नोस्टिक सेंटर, विक्रमजोत के निकट के संचालक ने कुसौरा निवासी डॉ. पवन कुमार चौधरी की डिग्री के आधार पर पिछले वर्ष सेंटर का पंजीकरण कराया था। इसकी जानकारी होने पर डॉ. पवन कुमार चौधरी ने छह अगस्त 2026 को सीएमओ को पत्र देकर बताया कि वह कुसौरा बाजार स्थित प्राइम डायग्नोस्टिक सेंटर में ही सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने किसी अन्य सेंटर पर सेवा देने या अपनी डिग्री के इस्तेमाल की अनुमति देने से भी इन्कार किया।
चिकित्सक का पत्र मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सेंटर संचालक को नोटिस जारी किया। सीएमओ की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि संचालक ने डिग्री के इस्तेमाल के संबंध में विभाग को कोई सूचना नहीं दी। चिकित्सक की डिग्री का फर्जी या कूटरचित तरीके से इस्तेमाल करना पीसीपीएनडीटी अधिनियम का उल्लंघन है। संचालक को पत्र प्राप्त होने के दो दिन के भीतर साक्ष्यों के साथ स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
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अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पंजीकरण निलंबित रहने के दौरान सेंटर का किसी भी स्थिति में संचालन नहीं किया जाएगा। संचालन होते पाए जाने पर सेंटर को सील कर अपंजीकृत केंद्र के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में सेंटर को सील करने के साथ सीजेएम न्यायालय में मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जाएगी।
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119 सेंटरों की होगी जांच
पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. एके चौधरी ने बताया कि जिले में करीब 119 अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हैं। सभी पंजीकृत सेंटरों पर लगाए गए चिकित्सकों की डिग्री और उनके वास्तविक कार्यस्थल का सत्यापन अभियान चलाकर कराया जाएगा। सूचीबद्ध सेंटरों की क्रमवार जांच के लिए टीम गोपनीय तरीके से भी पड़ताल करेगी। उन्होंने कहा कि डिग्री का कूटरचित तरीके से इस्तेमाल मिलने पर संबंधित के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। इससे फर्जी तरीके से डिग्री बदलकर सेंटर चलाने के मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
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मेसर्स विमल डायग्नोस्टिक सेंटर, विक्रमजोत के निकट के संचालक ने कुसौरा निवासी डॉ. पवन कुमार चौधरी की डिग्री के आधार पर पिछले वर्ष सेंटर का पंजीकरण कराया था। इसकी जानकारी होने पर डॉ. पवन कुमार चौधरी ने छह अगस्त 2026 को सीएमओ को पत्र देकर बताया कि वह कुसौरा बाजार स्थित प्राइम डायग्नोस्टिक सेंटर में ही सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने किसी अन्य सेंटर पर सेवा देने या अपनी डिग्री के इस्तेमाल की अनुमति देने से भी इन्कार किया।
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चिकित्सक का पत्र मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सेंटर संचालक को नोटिस जारी किया। सीएमओ की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि संचालक ने डिग्री के इस्तेमाल के संबंध में विभाग को कोई सूचना नहीं दी। चिकित्सक की डिग्री का फर्जी या कूटरचित तरीके से इस्तेमाल करना पीसीपीएनडीटी अधिनियम का उल्लंघन है। संचालक को पत्र प्राप्त होने के दो दिन के भीतर साक्ष्यों के साथ स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
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अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पंजीकरण निलंबित रहने के दौरान सेंटर का किसी भी स्थिति में संचालन नहीं किया जाएगा। संचालन होते पाए जाने पर सेंटर को सील कर अपंजीकृत केंद्र के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में सेंटर को सील करने के साथ सीजेएम न्यायालय में मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जाएगी।
119 सेंटरों की होगी जांच
पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. एके चौधरी ने बताया कि जिले में करीब 119 अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हैं। सभी पंजीकृत सेंटरों पर लगाए गए चिकित्सकों की डिग्री और उनके वास्तविक कार्यस्थल का सत्यापन अभियान चलाकर कराया जाएगा। सूचीबद्ध सेंटरों की क्रमवार जांच के लिए टीम गोपनीय तरीके से भी पड़ताल करेगी। उन्होंने कहा कि डिग्री का कूटरचित तरीके से इस्तेमाल मिलने पर संबंधित के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। इससे फर्जी तरीके से डिग्री बदलकर सेंटर चलाने के मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।