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Basti News: दरिंदगी प्रकरणः नाबालिग बताया गया आरोपी ही घटना का मुख्य सूत्रधार
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बस्ती/गौर। हैवानियत की घटना की तफ्तीश में कई कड़ियां आपस में जुड़ती चली जा रही हैं। आरोपियों के मददगारों की पुलिस सूची तैयार कर रही है। अब तक की जांच में पाया गया कि इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य सूत्रधार सबसे पहले पकड़ा गया आरोपी ही है, जिसे नाबालिग बताकर बाल सुधार गृह भेजा गया है। दरिंदगी के दौरान किशोरी को अत्यधिक रक्तस्राव होते देख वह घबरा गया था। मदद के लिए उसने एक मेडिकल स्टोर संचालक को बुलाया था जो ग्रामीणों का इलाज भी करता है। उसके मृत घोषित कर देने के बाद आरोपी ने एक और साथी को फोन करके मदद मांगा था। विवेचक रामेश्वर यादव ने रविवार को इन दोनों से बयान लिया। उनसे सवाल पूछा कि आरोपी ने उन्हें क्या कहकर बुलाया या मदद मांगी। मेडिकल स्टोर संचालन से इसके पहले भी पुलिस पूछताछ कर चुकी है। इसके साथ ही परिवार में किशोरी के माता-पिता व भाई का भी बयान लिया। इस दौरान लोगों में कौतूहल बना रहा कि पुलिस का अगला कदम क्या होगा।
गौर थाने की विवेचना में क्या तथ्य छूटे या छोड़े गए थे, इस सवाल को विवेचक रामेश्वर यादव टाल गए। उनका कहना है कि तफ्तीश की बातों को मीडिया में शेयर नहीं किया जा सकता है। हालांकि वह भरोसा दिलाए कि सभी पहलुओं पर साक्ष्यों सहित विवेचना करके जल्द चार्जशीट तैयार करेंगे।
बता दें कि पांच जून को हुई घटना की तफ्तीश पहले गौर थाने के तत्कालीन एसएचओ ब्रिजेंद्र प्रसाद पटेल ने शुरू की थी। मगर उनके तौर-तरीकों से असंतुष्ट परिवार के लोगों ने एसपी से मिलकर विवेचक बदलने की मांग किया। साथ ही गौर थाने के सिपाहियों के साथ आरोपियों की तस्वीर वायरल होने के बाद उनके अविश्वास की खाई और गहरी हो गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसपी गोपाल कृष्ण चौधरी ने एसएचओ ब्रिजेंद्र पटेल को हटाकर राज कुमार पांडेय को प्रभारी निरीक्षक बनाया। जिसके बाद फिर विवेचना शुरू हुई। परिवार के लोगों ने उनकी तफ्तीश से भी असंतोष जाहिर करते हुए एसपी को प्रार्थनापत्र दिया कि उनकी विवेचना परशुरामपुर के एसएचओ रामेश्वर यादव से कराई जाए। उनकी मांग को मानते हुए एसपी ने रामेश्वर यादव को विवेचना सौंप दी। तीसरे विवेचक ने केस की फाइल लेने के बाद तफ्तीश तेज कर दी है।
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गौर थाने पर रखवाई गई किशोरी की साइकिल
- शर्मसार कर देने वाली घटना में जान गंवाने वाली किशोरी की साइकिल कई दिनों तक घटना स्थल के पास एक दुकान के सामने खड़ी रही। पुलिस यह कहते हुए उसे नजरअंदाज करती रही कि साइकिल से घटना का कोई लेनादेना नहीं है। हालांकि इस पर परिवार के लोगों ने आपत्ति की तो अधिकारियों ने इसे संज्ञान लिया। रविवार को विवेचक ने बताया कि वह साइकिल गौर थाने पर रखवाई गई है।
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पांच जून को बिरऊपुर में हुई थी दरिंदगी
- घर से सब्जी लाने निकली गौर थानाक्षेत्र की 14 वर्षीय किशोरी का एक किलोमीटर दूर बिरऊपुर के पास पांच जून को खून से लथपथ शव मिला था। पोस्टमार्टम में उसके साथ दरिंदगी की बात सामने आई थी। सूचना पर पहुंचे परिवार के लोग जिंदा होने की उम्मीद में पास के एक निजी डाक्टर के पास ले गए, लेकिन डाक्टर ने बताया कि उसकी करीब घंटे भर पहले ही मौत हो चुकी है। इसके बाद परिवार के लोग शव लेकर घर चले गए। पोस्टमार्टम में अप्राकृतिक दुष्कर्म की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने केस में नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो की धारा को शामिल किया। इस मामले में राजन निषाद, कुंदन सिंह और एक नाबालिग को पुलिस ने गिरफ्तार कर चुकी है।केस की विवेचना परशुरामपुर के एसएचओ रामेश्वर यादव कर रहे हैं।
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गौर थाने की विवेचना में क्या तथ्य छूटे या छोड़े गए थे, इस सवाल को विवेचक रामेश्वर यादव टाल गए। उनका कहना है कि तफ्तीश की बातों को मीडिया में शेयर नहीं किया जा सकता है। हालांकि वह भरोसा दिलाए कि सभी पहलुओं पर साक्ष्यों सहित विवेचना करके जल्द चार्जशीट तैयार करेंगे।
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बता दें कि पांच जून को हुई घटना की तफ्तीश पहले गौर थाने के तत्कालीन एसएचओ ब्रिजेंद्र प्रसाद पटेल ने शुरू की थी। मगर उनके तौर-तरीकों से असंतुष्ट परिवार के लोगों ने एसपी से मिलकर विवेचक बदलने की मांग किया। साथ ही गौर थाने के सिपाहियों के साथ आरोपियों की तस्वीर वायरल होने के बाद उनके अविश्वास की खाई और गहरी हो गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसपी गोपाल कृष्ण चौधरी ने एसएचओ ब्रिजेंद्र पटेल को हटाकर राज कुमार पांडेय को प्रभारी निरीक्षक बनाया। जिसके बाद फिर विवेचना शुरू हुई। परिवार के लोगों ने उनकी तफ्तीश से भी असंतोष जाहिर करते हुए एसपी को प्रार्थनापत्र दिया कि उनकी विवेचना परशुरामपुर के एसएचओ रामेश्वर यादव से कराई जाए। उनकी मांग को मानते हुए एसपी ने रामेश्वर यादव को विवेचना सौंप दी। तीसरे विवेचक ने केस की फाइल लेने के बाद तफ्तीश तेज कर दी है।
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गौर थाने पर रखवाई गई किशोरी की साइकिल
- शर्मसार कर देने वाली घटना में जान गंवाने वाली किशोरी की साइकिल कई दिनों तक घटना स्थल के पास एक दुकान के सामने खड़ी रही। पुलिस यह कहते हुए उसे नजरअंदाज करती रही कि साइकिल से घटना का कोई लेनादेना नहीं है। हालांकि इस पर परिवार के लोगों ने आपत्ति की तो अधिकारियों ने इसे संज्ञान लिया। रविवार को विवेचक ने बताया कि वह साइकिल गौर थाने पर रखवाई गई है।
पांच जून को बिरऊपुर में हुई थी दरिंदगी
- घर से सब्जी लाने निकली गौर थानाक्षेत्र की 14 वर्षीय किशोरी का एक किलोमीटर दूर बिरऊपुर के पास पांच जून को खून से लथपथ शव मिला था। पोस्टमार्टम में उसके साथ दरिंदगी की बात सामने आई थी। सूचना पर पहुंचे परिवार के लोग जिंदा होने की उम्मीद में पास के एक निजी डाक्टर के पास ले गए, लेकिन डाक्टर ने बताया कि उसकी करीब घंटे भर पहले ही मौत हो चुकी है। इसके बाद परिवार के लोग शव लेकर घर चले गए। पोस्टमार्टम में अप्राकृतिक दुष्कर्म की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने केस में नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो की धारा को शामिल किया। इस मामले में राजन निषाद, कुंदन सिंह और एक नाबालिग को पुलिस ने गिरफ्तार कर चुकी है।केस की विवेचना परशुरामपुर के एसएचओ रामेश्वर यादव कर रहे हैं।