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मेडिकल कॉलेज: 200 शैय्या भवन निर्माण को मंजूरी
Sat, 23 Mar 2024 03:05 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 23 Mar 2024 03:05 PM IST
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कार्यदायी संस्था को मिले 2.60 करोड़ रुपये
दो माह में बनकर तैयार हो जाएगा भवन, संचालित होगा अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज के 200 शैय्या के नए भवन संचालन की मंजूरी शासन ने दे दी थी। यहां अधूरे निर्माण कार्य के लिए 13 करोड़ रुपये खर्च करने के लिए शासन ने निर्माण इकाई उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन को जिम्मेदारी दी है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने संबंधित इकाई को 2.60 करोड़ रुपये अवमुक्त कर दिए हैं। दो माह में यहां भवन संचालित होने लगेगा।
300 शैय्यायुक्त ओपेक चिकित्सालय कैली को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध किया गया है। यहां करीब दो वर्ष से 200 बेड का नया भवन बनकर तैयार है, मगर इसमें माड्यूलर ओटी, सेमी माड्यूलर ऑपरेशन थियेटर, गैस पाइप लाइन तथा सेंट्रल एसी का संचालन नहीं हो पा रहा है। शासन ने इसकी पूरी स्थिति जानने के बाद इसके संचालन न होने के पीछे के कारणों को लिखकर भेजने को कहा था।
प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने शासन को कार्यदायी संस्था नामित करने का अनुरोध किया। चिकित्सा अधीक्षक व कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार यादव ने बताया कि शासन की हरी झंडी मिल गई है। कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल को धन भी हस्तांतरित कर दिए गए हैं। यहां इसी सप्ताह से कार्य शुरू हो जाएगा। दो माह में यह भवन संचालित होने लगेगा। इस भवन में भी मरीजों को भर्ती करने की सुविधा शुरू हो जाएगी।
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दो माह में बनकर तैयार हो जाएगा भवन, संचालित होगा अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज के 200 शैय्या के नए भवन संचालन की मंजूरी शासन ने दे दी थी। यहां अधूरे निर्माण कार्य के लिए 13 करोड़ रुपये खर्च करने के लिए शासन ने निर्माण इकाई उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन को जिम्मेदारी दी है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने संबंधित इकाई को 2.60 करोड़ रुपये अवमुक्त कर दिए हैं। दो माह में यहां भवन संचालित होने लगेगा।
300 शैय्यायुक्त ओपेक चिकित्सालय कैली को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध किया गया है। यहां करीब दो वर्ष से 200 बेड का नया भवन बनकर तैयार है, मगर इसमें माड्यूलर ओटी, सेमी माड्यूलर ऑपरेशन थियेटर, गैस पाइप लाइन तथा सेंट्रल एसी का संचालन नहीं हो पा रहा है। शासन ने इसकी पूरी स्थिति जानने के बाद इसके संचालन न होने के पीछे के कारणों को लिखकर भेजने को कहा था।
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प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने शासन को कार्यदायी संस्था नामित करने का अनुरोध किया। चिकित्सा अधीक्षक व कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार यादव ने बताया कि शासन की हरी झंडी मिल गई है। कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल को धन भी हस्तांतरित कर दिए गए हैं। यहां इसी सप्ताह से कार्य शुरू हो जाएगा। दो माह में यह भवन संचालित होने लगेगा। इस भवन में भी मरीजों को भर्ती करने की सुविधा शुरू हो जाएगी।
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