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Basti News: क्रिटिकल केयर यूनिट का भवन अभी अधूरा, सुविधा के लिए अभी लंबा इंतजार
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ओपेक चिकित्सालय कैली परिसर में निर्माणाधीन क्रिटिकल केयर यूनिट भवन। संवाद
- फोटो : बंदी के कगार पर साइंस और ग्लासवेयर उद्योग, गैस का सिर्फ दो दिन का स्टॉक
बस्ती। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज बस्ती को आधुनिक आईसीयू से अपग्रेड करने की योजना तीन साल पहले बनी थी। जनवरी 2025 में ही यहां एनएचएम के तहत 50 शैय्या वाला क्रिटिकल केयर यूनिट चालू हो जाना चाहिए था। इसके लिए 50 लाख रुपये की परियोजना स्वीकृति हुई। मियाद पूरा हुए डेढ़ साल बीत गए अभी तक आईसीयू चालू होने को कौन कहें निर्माण एजेंसी राजकीय निर्माण निगम ने भवन ही हस्तांतरित नहीं कर पाया है।
निर्माण में लापरवाही इस कदर भारी पड़ी कि परियोजना पूर्ण होने की समयावधि खत्म हुए डेढ़ साल बीत गए अभी तक भवन पूरा होने की स्थिति में नहीं है। जिससे केंद्रीयकृत वातानुकूलित भवन में आईसीयू और ऑपरेशन थियेटर की स्थापना नहीं हो पा रही है। मेडिकल कॉलेज में पहुंचने वाले गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज प्रशासन के पास रेफर करने के सिवाय और कोई विकल्प नहीं है। यहां चिकित्सक वेंटीलेटर, आईसीयू आदि की सुविधा न होने का हवाला देकर प्रतिदिन औसत 10 से 15 गंभीर मरीजों को रेफर कर दे रहे हैं।
बता दें कि बस्ती में गंभीर मरीजों को त्वरित उपचार दिए जाने के उद्देश्य से एनएचएम के अधीन 50 बेड का क्रिटिकल केयर यूनिट वर्ष 2022 में आवंटित हुआ था। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद तय हुआ कि इसकी स्थापना मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली परिसर में की जाएगी। इसके लिए मेडिकल कॉलेज ने जगह भी उपलब्ध कराई। व्यवस्था बनी कि सीएमओ की मॉनीटरिंग में एनएचएम के तहत इस यूनिट का संचालन होगा और मेडिकल कॉलेज प्रशासन इसमें चिकित्सीय सेवा का जिम्मा संभालेगा।
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चार साल पहले बजट भी आवंटित हुआ। निर्माण की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई। वर्ष 2024 के आखिरी माह तक यह परियोजना पूर्ण होनी थी। मगर निर्माण कार्य में शुरू से ही लापरवाही सामने आई। तत्कालीन डीएम ने निरीक्षण के दौरान तीन बार कार्यदायी संस्था को सख्त हिदायत देते हुए परियोजना पूर्ण करने की चेतावनी दी। कार्यदायी संस्था ने पहले जनवरी 2025 और बाद में 31 मार्च 2025 तक परियोजना पूर्ण करने का समय भी मांगा।
बावजूद इसके यह परियोजना अभी तक पूर्ण नहीं हुई है। मौजूदा समय में भवन निर्माण का कार्य तो किसी तरह पूरा कर लिया गया है कि लेकिन, पेंटिंग, टाइलीकरण, साज-सज्जा अन्य कार्य अभी आधे-अधूरे स्थिति में है। इस भवन के हस्तांतरित होने में अभी अनिश्चितता बनी हुई है।
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निर्माण में लापरवाही इस कदर भारी पड़ी कि परियोजना पूर्ण होने की समयावधि खत्म हुए डेढ़ साल बीत गए अभी तक भवन पूरा होने की स्थिति में नहीं है। जिससे केंद्रीयकृत वातानुकूलित भवन में आईसीयू और ऑपरेशन थियेटर की स्थापना नहीं हो पा रही है। मेडिकल कॉलेज में पहुंचने वाले गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज प्रशासन के पास रेफर करने के सिवाय और कोई विकल्प नहीं है। यहां चिकित्सक वेंटीलेटर, आईसीयू आदि की सुविधा न होने का हवाला देकर प्रतिदिन औसत 10 से 15 गंभीर मरीजों को रेफर कर दे रहे हैं।
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बता दें कि बस्ती में गंभीर मरीजों को त्वरित उपचार दिए जाने के उद्देश्य से एनएचएम के अधीन 50 बेड का क्रिटिकल केयर यूनिट वर्ष 2022 में आवंटित हुआ था। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद तय हुआ कि इसकी स्थापना मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली परिसर में की जाएगी। इसके लिए मेडिकल कॉलेज ने जगह भी उपलब्ध कराई। व्यवस्था बनी कि सीएमओ की मॉनीटरिंग में एनएचएम के तहत इस यूनिट का संचालन होगा और मेडिकल कॉलेज प्रशासन इसमें चिकित्सीय सेवा का जिम्मा संभालेगा।
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चार साल पहले बजट भी आवंटित हुआ। निर्माण की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई। वर्ष 2024 के आखिरी माह तक यह परियोजना पूर्ण होनी थी। मगर निर्माण कार्य में शुरू से ही लापरवाही सामने आई। तत्कालीन डीएम ने निरीक्षण के दौरान तीन बार कार्यदायी संस्था को सख्त हिदायत देते हुए परियोजना पूर्ण करने की चेतावनी दी। कार्यदायी संस्था ने पहले जनवरी 2025 और बाद में 31 मार्च 2025 तक परियोजना पूर्ण करने का समय भी मांगा।
बावजूद इसके यह परियोजना अभी तक पूर्ण नहीं हुई है। मौजूदा समय में भवन निर्माण का कार्य तो किसी तरह पूरा कर लिया गया है कि लेकिन, पेंटिंग, टाइलीकरण, साज-सज्जा अन्य कार्य अभी आधे-अधूरे स्थिति में है। इस भवन के हस्तांतरित होने में अभी अनिश्चितता बनी हुई है।