फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   The autumnal 84 Kosi Parikrama started from Makhouda Dham.

Basti News: मखौड़ा धाम से शुरू हुई शरद कालीन 84 कोसी परिक्रमा

Fri, 07 Nov 2025 01:56 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 07 Nov 2025 01:56 AM IST
विज्ञापन
The autumnal 84 Kosi Parikrama started from Makhouda Dham.
साधु-संतों का स्वागत करते लोग।
छावनी (बस्ती)। अयोध्या क्षेत्र की मोक्ष दायिनी शरद कालीन 84 कोसी परिक्रमा बृहस्पतिवार को बस्ती जिले की पवित्र मख भूमि मखौड़ा धाम से प्रारंभ हो गई। परिक्रमा का शुभारंभ जानकी कुंड चित्रकूट धाम के महंत गोविंद दास की अगुवाई में मंत्रोच्चार और वैदिक रीति से किया गया। सुबह 10 बजे से ही साधु-संतों और श्रद्धालुओं का जत्था परिक्रमा के प्रथम पड़ाव रामरेखा मंदिर पर पहुंचना शुरू हो गया जो देर शाम तक जारी रहा।
विज्ञापन

परिक्रमा में शामिल श्रद्धालु यहां रात्रि विश्राम के बाद शुक्रवार सुबह हनुमान बाग चकोही के लिए प्रस्थान करेंगे। यह परिक्रमा 26 नवंबर तक बस्ती, आंबेडकरनगर, अयोध्या, बाराबंकी और गोंडा जिलों के मार्गों से होती हुई पुनः मखौड़ा धाम में पहुंचकर संपन्न होगी। परिक्रमा प्रवक्ता गोपालजी सोनी ने बताया कि इस बार परिक्रमा में लगभग एक हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। कई श्रद्धालु और साधु-संत अब भी रास्ते में हैं और आगामी चरणों में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि इस परिक्रमा का उद्देश्य अवध क्षेत्र की धार्मिक परंपरा को जीवंत रखना और लोक आस्था को सशक्त करना है।
विज्ञापन

रामरेखा मंदिर के पुजारी बाबा दयाशंकर दास ने बताया कि परिक्रमार्थियों के रहने, खाने-पीने, प्रकाश और सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की गई है। स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया। एमपी सिंह, अजीत सोनी, छोटू कसौधन सहित कई श्रद्धालु साधु-संतों की सेवा में लगे रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

यह है धार्मिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मखौड़ा धाम वही पावन स्थल है, जहां अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए श्रृंगी ऋषि के नेतृत्व में यज्ञ कराया था। यज्ञ के दौरान अग्निदेव ने खीर प्रदान की थी, जिसे ग्रहण करने के बाद महाराज दशरथ की तीनों रानियों, कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी ने श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न जैसे दिव्य पुत्रों को जन्म दिया। तभी से इस स्थल का धार्मिक महत्व बढ़ गया और यहीं से हर वर्ष 84 कोसी परिक्रमा आरंभ होती है। पहले यह परिक्रमा केवल चैत्र मास में की जाती थी लेकिन बीते दो वर्षों से साधु-संतों के आग्रह पर शरदकालीन परिक्रमा की परंपरा भी शुरू की गई है। मान्यता है कि इस परिक्रमा से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं। पूरे मार्ग में छावनी पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौकसी बरती हुई है। परिक्रमा के प्रारंभ के साथ ही पूरा मखौड़ा धाम ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा।


बुधवार को ही पहुंच गया था संतों का जत्था
परशुरामपुर। बृहस्पतिवार की भोर में साधु-संतों ने मखौड़ा धाम से 84 कोसी शरद कालीन परिक्रमा की शुरूआत की। चित्रकूट धाम से गोविंददास की अध्यक्षता में आए साधु-संतो का जत्था बुधवार को मखौड़ा धाम पहुंचा। मखौड़ा धाम में संतों ने देव दीपावली मे हिस्सा लिया और मंदिर परिसर में भोजन और विश्राम किया। बृहस्पतिवार की भोर में संतों ने मनोरमा नदी मे स्नान कर हवन-पूजन किया। इसके बाद जय श्री राम के उद्घोष के साथ सभी ने चौदह कोसी परिक्रमा की शुरूआत की। महंत गोविंद दास ने बताया कि 84 कोसी परिक्रमा से मनुष्य 84 लाख योनियों में भ्रमण से मुक्ति पाकर मोक्ष की प्राप्ति करता है। बताया कि 27 नवंबर सप्तमी तिथि को अयोध्या में सरयू स्नान के साथ परिक्रमा पूर्ण होगी। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed