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चिकित्सा व्यवस्था लड़खड़ाई, निराश लौटे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Mar 2016 11:57 PM IST
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महिला अस्पताल में एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर मीटिंग की।
- फोटो : रमेश मिश्र
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बस्ती। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के बैनर तले दूसरे दिन भी जिले भर के संविदा चिकित्सकों और कर्मचारियों ने विनियमितीकरण की मांग को लेकर विरोध जारी रखा। लखनऊ में संगठन के लोगों पर लाठी चार्ज की कड़े शब्दों में आलोचना की और कार्य बहिष्कार किया।
ससे अस्पतालों में चिकित्सीय व्यवस्था लड़खड़ा गई। मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। ओपीडी में संविदा चिकित्सक नहीं पहुंचेने से मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा। हालांकि राहत की बात यह रही कि इमरजेंसी, जेई आईसीयू, महिला अस्पताल में सिक न्यू बार्न केयर यूनिट में तैनात संविदा स्टाफ नर्सों ने काली पट्टी बांधकर कामकाज शुरू किया।
मंगलवार को भी शहर से लेकर ग्रामीण इलाके में स्थापित स्वास्थ्य केंद्रों पर ओपीडी व वार्डों में व्यवस्था प्रभावित रही। जिला अस्पताल के आयुष विंग के तीनों विधा के चिकित्सकों आयुर्वेद, यूूनानी और होम्योपैथ के हड़ताल में शामिल होने से मरीज को मुश्किलें आईं।
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महिला अस्पताल में बैठक की
महिला अस्पताल में डॉ शबनम के नेतृत्व में स्टाफ नर्सों और अन्य कर्मियों ने बैठक कर मांगें पूरी करने की बात कही। इसमें नीरज, बबिता गुप्ता, नीरज श्रीवास्तव, सीमा सिंह, अर्चना त्रिपाठी, शशिप्रभा, सुनीता देवी, संध्या रजक आदि शामिल रहीं।
मांगों को सरकार पूरा करे : डॉ जुनैद
जिला अस्पताल के आयुष विंग में तैनात यूनानी चिकित्सक और संगठन के अध्यक्ष डॉ जुनैद अहमद खान ने कहा कि लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में शांतिपूर्वक धरना दिया जा रहा था। कानून व्यवस्था की भी कोई समस्या उत्पन्न नहीं हुई। फिर भी पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठियां बरसाईं, जिससे बहुत से महिला व पुरुष कर्मचारी चोटिल हो गए। उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
कहा कि जब तक विनियमितीकरण न हो तब तक रिजवी कमेटी की सिफारिशों के आधार पर पे बैंड, सरकारी कर्मचारियों के समान न्यूनतम वेतन के बराबर मानदेय, एचआर पालिसी लागू किया जाए। बताया कि जनपद एवं ब्लॉक स्तर पर उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर कर संगठन के 55 चिकित्सक व तीन सौ के करीब पैरामेडिकल स्टाफ वित्तीय, भौतिक, चिकित्सीय सेवाओं का कार्य बहिष्कार कर रहे हैं।
बताया कि चिकित्सीय सुविधा के अभाव में किसी मरीज के साथ कोई अनहोनी न हो इसके चलते मंगलवार से एसएनसीयू, आईसीयू आदि में संविदा कर्मियों बांह पर काली पट्टी बांध कर काम की अनुमति दी गई है। विरोध जताने वालों में महामंत्री डॉ प्रदीप कुमार शुक्ल, डॉ वीके वर्मा, डॉ विनोद कुमार शर्मा, डॉ धर्मेंद्र चौधरी, डॉ डीके कुशवाहा, डॉ जमील अहमद, डॉ सतीश चौधरी, डॉ प्रीति मिश्रा, डॉ संजय श्रीवास्तव, सर्वेश, रामजीत चौरसिया, डॉ अमीश, डॉ विकास आदि शामिल रहे।
हड़ताल से निराशा हुई
डॉक्टर हड़ताल पर हैं इसकी जानकारी नहीं थी। आयुष चिकित्सक के न मिलने से निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है।
मोईद अहमद, निवासी ओरवाड़ा
दवा भी नहीं मिली
यूनानी चिकित्सक के न रहने से काफी दिक्कत हुई। परामर्श के साथ ही पर्ची पर लिखी दवा भी नहीं मिला, जिससे आज का आना बेकार साबित हुआ।
संजू, निवासी बरदहिया,
कब खत्म होगी हड़ताल
यूनानी चिकित्सक से परामर्श लेकर दवा लेने आई थी। हड़ताल की जानकारी नहीं थी। हड़ताल कब समाप्त होगी इसकी जानकारी लेने के लिए परेशान हो रही हूं।
अंजू निवासी बरदहिया
सरकार को मरीजों के बारे में भी सोचना चाहिए
सरकारी अस्पतालों में हड़ताल के विकल्प के बारे में सरकार को सोचना चाहिए। जिससे मरीजों को निराश होकर न लौटना पड़े। पूरा दिन बेकार चला गया।
इंद्रराश पति, निवासी गंधरिया गजराज।
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ससे अस्पतालों में चिकित्सीय व्यवस्था लड़खड़ा गई। मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। ओपीडी में संविदा चिकित्सक नहीं पहुंचेने से मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा। हालांकि राहत की बात यह रही कि इमरजेंसी, जेई आईसीयू, महिला अस्पताल में सिक न्यू बार्न केयर यूनिट में तैनात संविदा स्टाफ नर्सों ने काली पट्टी बांधकर कामकाज शुरू किया।
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मंगलवार को भी शहर से लेकर ग्रामीण इलाके में स्थापित स्वास्थ्य केंद्रों पर ओपीडी व वार्डों में व्यवस्था प्रभावित रही। जिला अस्पताल के आयुष विंग के तीनों विधा के चिकित्सकों आयुर्वेद, यूूनानी और होम्योपैथ के हड़ताल में शामिल होने से मरीज को मुश्किलें आईं।
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महिला अस्पताल में बैठक की
महिला अस्पताल में डॉ शबनम के नेतृत्व में स्टाफ नर्सों और अन्य कर्मियों ने बैठक कर मांगें पूरी करने की बात कही। इसमें नीरज, बबिता गुप्ता, नीरज श्रीवास्तव, सीमा सिंह, अर्चना त्रिपाठी, शशिप्रभा, सुनीता देवी, संध्या रजक आदि शामिल रहीं।
मांगों को सरकार पूरा करे : डॉ जुनैद
जिला अस्पताल के आयुष विंग में तैनात यूनानी चिकित्सक और संगठन के अध्यक्ष डॉ जुनैद अहमद खान ने कहा कि लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में शांतिपूर्वक धरना दिया जा रहा था। कानून व्यवस्था की भी कोई समस्या उत्पन्न नहीं हुई। फिर भी पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठियां बरसाईं, जिससे बहुत से महिला व पुरुष कर्मचारी चोटिल हो गए। उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
कहा कि जब तक विनियमितीकरण न हो तब तक रिजवी कमेटी की सिफारिशों के आधार पर पे बैंड, सरकारी कर्मचारियों के समान न्यूनतम वेतन के बराबर मानदेय, एचआर पालिसी लागू किया जाए। बताया कि जनपद एवं ब्लॉक स्तर पर उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर कर संगठन के 55 चिकित्सक व तीन सौ के करीब पैरामेडिकल स्टाफ वित्तीय, भौतिक, चिकित्सीय सेवाओं का कार्य बहिष्कार कर रहे हैं।
बताया कि चिकित्सीय सुविधा के अभाव में किसी मरीज के साथ कोई अनहोनी न हो इसके चलते मंगलवार से एसएनसीयू, आईसीयू आदि में संविदा कर्मियों बांह पर काली पट्टी बांध कर काम की अनुमति दी गई है। विरोध जताने वालों में महामंत्री डॉ प्रदीप कुमार शुक्ल, डॉ वीके वर्मा, डॉ विनोद कुमार शर्मा, डॉ धर्मेंद्र चौधरी, डॉ डीके कुशवाहा, डॉ जमील अहमद, डॉ सतीश चौधरी, डॉ प्रीति मिश्रा, डॉ संजय श्रीवास्तव, सर्वेश, रामजीत चौरसिया, डॉ अमीश, डॉ विकास आदि शामिल रहे।
हड़ताल से निराशा हुई
डॉक्टर हड़ताल पर हैं इसकी जानकारी नहीं थी। आयुष चिकित्सक के न मिलने से निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है।
मोईद अहमद, निवासी ओरवाड़ा
दवा भी नहीं मिली
यूनानी चिकित्सक के न रहने से काफी दिक्कत हुई। परामर्श के साथ ही पर्ची पर लिखी दवा भी नहीं मिला, जिससे आज का आना बेकार साबित हुआ।
संजू, निवासी बरदहिया,
कब खत्म होगी हड़ताल
यूनानी चिकित्सक से परामर्श लेकर दवा लेने आई थी। हड़ताल की जानकारी नहीं थी। हड़ताल कब समाप्त होगी इसकी जानकारी लेने के लिए परेशान हो रही हूं।
अंजू निवासी बरदहिया
सरकार को मरीजों के बारे में भी सोचना चाहिए
सरकारी अस्पतालों में हड़ताल के विकल्प के बारे में सरकार को सोचना चाहिए। जिससे मरीजों को निराश होकर न लौटना पड़े। पूरा दिन बेकार चला गया।
इंद्रराश पति, निवासी गंधरिया गजराज।