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सूर्य ग्रहण आज, सूतक काल में न करें शुभ काम
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सूर्य ग्रहण आज, सूतक काल में न करें शुभ काम
बस्ती। साल का पहला सूर्य ग्रहण रविवार को लग रहा है। सूतक काल शनिवार रात से ही शुरू हो जाएगा। सूतक काल से पहले मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए, जो ग्रहण के मोक्ष के बाद खुलेंगे।
सूर्य ग्रहण लगने के 12 घंटे पहले से ही सूतक का समय शुरू हो जाता है। पं. भर्थाचार्य पाठक के अनुसार सूतक काल के दौरान खाना बनाने व खाने की मनाही रहती है। रविवार को ग्रहण से पहले शनिवार रात 10:31 बजे से सूतक काल शुरू हो जाएगा, जो अगले दिन रविवार को ग्रहण के मोक्ष पर खत्म होगा। उन्होंने बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में सूतक व ग्रहण के समय में थोड़ा अंतर रहेगा। ग्रहण रविवार सुबह 10:31 बजे लगेगा। इसका मोक्ष पूर्वाह्न 2:04 बजे होगा।
शास्त्रों में सूतक का माना गया है अशुभ
शास्त्रों में सूतक काल को अशुभ माना गया है। मान्यता है कि सूतक काल शुरू होने पर देवी-देवता कष्ट में रहते हैं। पं. मंगलाचार्य शास्त्री बताते हैं कि ग्रहण के दौरान राहू, सूर्य को कुछ देर के लिए अपना ग्रास बना लेता है। इसी कारण जब भी ग्रहण लगता है तो इसके प्रभाव को कम करने के लिए मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। ग्रहण के खत्म होते ही सूतक काल भी समाप्त हो जाता है। इसके बाद स्नानादि कर पूजा-पाठ किया जाता है।
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बस्ती। साल का पहला सूर्य ग्रहण रविवार को लग रहा है। सूतक काल शनिवार रात से ही शुरू हो जाएगा। सूतक काल से पहले मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए, जो ग्रहण के मोक्ष के बाद खुलेंगे।
सूर्य ग्रहण लगने के 12 घंटे पहले से ही सूतक का समय शुरू हो जाता है। पं. भर्थाचार्य पाठक के अनुसार सूतक काल के दौरान खाना बनाने व खाने की मनाही रहती है। रविवार को ग्रहण से पहले शनिवार रात 10:31 बजे से सूतक काल शुरू हो जाएगा, जो अगले दिन रविवार को ग्रहण के मोक्ष पर खत्म होगा। उन्होंने बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में सूतक व ग्रहण के समय में थोड़ा अंतर रहेगा। ग्रहण रविवार सुबह 10:31 बजे लगेगा। इसका मोक्ष पूर्वाह्न 2:04 बजे होगा।
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शास्त्रों में सूतक का माना गया है अशुभ
शास्त्रों में सूतक काल को अशुभ माना गया है। मान्यता है कि सूतक काल शुरू होने पर देवी-देवता कष्ट में रहते हैं। पं. मंगलाचार्य शास्त्री बताते हैं कि ग्रहण के दौरान राहू, सूर्य को कुछ देर के लिए अपना ग्रास बना लेता है। इसी कारण जब भी ग्रहण लगता है तो इसके प्रभाव को कम करने के लिए मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। ग्रहण के खत्म होते ही सूतक काल भी समाप्त हो जाता है। इसके बाद स्नानादि कर पूजा-पाठ किया जाता है।
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