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Basti News: चालकों की कमी.... कबाड़ हो रहे कूड़ा उठने वाले वाहन
Tue, 28 May 2024 02:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 28 May 2024 02:11 AM IST
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50 लाख रुपये खर्च कर मंगवाए गए हैं कूड़ा वाहन, अब जाकर हुआ पंजीयन
शहरी क्षेत्र में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए खरीदे गए हैं नौ वाहन
नए कूड़ा वाहन में गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग रखने की है व्यवस्था
पंजीयन के बाद अब चालक के अभाव में खड़े हैं कूड़ा वाहन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कूड़ा उठाने के नाम पर महज खानापूर्ति हो रही है। गलियों और मुख्य चौराहों पर रखे गए कूड़ेदान का भी अता-पता नहीं है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए चार माह पहले नगर पालिका को करीब 50 लाख रुपये की लागत से कूड़ादान से लैस नौ वाहन मिले हैं, लेकिन चालक की कमी से ये सभी खड़े-खड़े कबाड़ हो रहे हैं।
शासन से निर्धारित फर्म से सचल कूड़ादान वाले वाहन की खरीद की गई थी। प्रत्येक की लागत लगभग सात लाख रुपये बताई गई है। नौ वाहनों की खरीद पर करीब 50 लाख रुपये खर्च आया। इनकी खरीद डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए की गई, लेकिन ये सड़कों पर नजर नहीं आ रहे हैं। चार माह से ये नगर पालिका परिसर में धूल फांक रहे हैं। इसके पीछे नगर पालिका के अधिकारियों की दलील है कि चालकों की नियुक्ति नहीं होने से समस्या आ रही है।
सफाई निरीक्षक दिनेश वर्मा ने बताया कि प्रत्येक वाहन में चालक समेत दो सफाई कर्मियों की जरूरत होगी। ईओ सत्येंद्र सिंह के अनुसार नियुक्ति के लिए निर्धारित फर्म की ओर से टेंडर की प्रक्रिया जारी है। चुनाव बाद यह प्रक्रिया पूरी होगी। अभी घरों से कूड़ा का कलेक्टशन हाथ ट्राॅली और पुराने छोटे वाहनों से हो रहा है। जल्द ही नए वाहनों को प्रयोग में लाया जाएगा। पंजीयन परिवहन विभाग से हो गया है।
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छह साल में नहीं बन सका कूड़ा डंपिंग ग्राउंड
स्वच्छ भारत मिशन को छह साल पूरे हो गए, लेकिन शहर से रोजाना निकल रहे करीब 70 टन कूड़ा निस्तारण की यहां कोई व्यवस्था नहीं है। कूड़ा खुले में फेंका जा रहा है। सड़कों पर सफाई हो रही है, कूड़ा उठान की व्यवस्था है, लेकिन कूड़ा प्रबंधन की उचित व्यवस्था न होने से स्वच्छता अभियान परवान नहीं चढ़ पा रही। कोइलपुरा में भूमि चिह्नित हैं जहां कूड़ा निस्तारण केंद्र बनना है, लेकिन मामला तकनीकी पेंच में फंसा है। ऐसे में कूड़ा वहीं पर फेंक कर कर्मी चले आते हैं।
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शहरी क्षेत्र में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए खरीदे गए हैं नौ वाहन
नए कूड़ा वाहन में गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग रखने की है व्यवस्था
पंजीयन के बाद अब चालक के अभाव में खड़े हैं कूड़ा वाहन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कूड़ा उठाने के नाम पर महज खानापूर्ति हो रही है। गलियों और मुख्य चौराहों पर रखे गए कूड़ेदान का भी अता-पता नहीं है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए चार माह पहले नगर पालिका को करीब 50 लाख रुपये की लागत से कूड़ादान से लैस नौ वाहन मिले हैं, लेकिन चालक की कमी से ये सभी खड़े-खड़े कबाड़ हो रहे हैं।
शासन से निर्धारित फर्म से सचल कूड़ादान वाले वाहन की खरीद की गई थी। प्रत्येक की लागत लगभग सात लाख रुपये बताई गई है। नौ वाहनों की खरीद पर करीब 50 लाख रुपये खर्च आया। इनकी खरीद डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए की गई, लेकिन ये सड़कों पर नजर नहीं आ रहे हैं। चार माह से ये नगर पालिका परिसर में धूल फांक रहे हैं। इसके पीछे नगर पालिका के अधिकारियों की दलील है कि चालकों की नियुक्ति नहीं होने से समस्या आ रही है।
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सफाई निरीक्षक दिनेश वर्मा ने बताया कि प्रत्येक वाहन में चालक समेत दो सफाई कर्मियों की जरूरत होगी। ईओ सत्येंद्र सिंह के अनुसार नियुक्ति के लिए निर्धारित फर्म की ओर से टेंडर की प्रक्रिया जारी है। चुनाव बाद यह प्रक्रिया पूरी होगी। अभी घरों से कूड़ा का कलेक्टशन हाथ ट्राॅली और पुराने छोटे वाहनों से हो रहा है। जल्द ही नए वाहनों को प्रयोग में लाया जाएगा। पंजीयन परिवहन विभाग से हो गया है।
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छह साल में नहीं बन सका कूड़ा डंपिंग ग्राउंड
स्वच्छ भारत मिशन को छह साल पूरे हो गए, लेकिन शहर से रोजाना निकल रहे करीब 70 टन कूड़ा निस्तारण की यहां कोई व्यवस्था नहीं है। कूड़ा खुले में फेंका जा रहा है। सड़कों पर सफाई हो रही है, कूड़ा उठान की व्यवस्था है, लेकिन कूड़ा प्रबंधन की उचित व्यवस्था न होने से स्वच्छता अभियान परवान नहीं चढ़ पा रही। कोइलपुरा में भूमि चिह्नित हैं जहां कूड़ा निस्तारण केंद्र बनना है, लेकिन मामला तकनीकी पेंच में फंसा है। ऐसे में कूड़ा वहीं पर फेंक कर कर्मी चले आते हैं।