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Basti News: सरयू की धार तेज, तटबंधों पर दबाव बरकरार
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पकड़ी संग्राम गांव में हो रही कटान
बस्ती। सरयू नदी का जलस्तर घटने के साथ ही तटवर्ती इलाकों में कटान तेज हो गई है। कई स्थानों पर नदी की धारा आबादी की ओर बढ़ रही है और घरों के बेहद करीब पहुंच गई है। इससे ग्रामीणों में दहशत है। जलस्तर घटने से तटबंधों पर दबाव कुछ कम हुआ है, लेकिन संवेदनशील स्थानों पर खतरा बरकरार है। बाढ़ खंड की टीमें लगातार निगरानी और बचाव कार्य में जुटी हैं।
केंद्रीय जल आयोग, अयोध्या कार्यालय के अनुसार, रविवार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 92.05 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 92.73 मीटर से 68 सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर घटने से बाढ़ का पानी गांवों से तेजी से निकल रहा है और जनजीवन सामान्य होने लगा है। इसके बावजूद नदी की तेज धारा से कटान का खतरा बढ़ गया है।
कुदरहा क्षेत्र के कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिणी हिस्से में बसे महुआपार कला, मईपुर, बैडारी एहतमाली और टेंगरिहा राजा समेत कई गांवों में कटान जारी है। ग्रामीणों के मुताबिक, पहले ही काफी कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। बची जमीन पर खड़ी धान और गन्ने की फसल भी बाढ़ के पानी में डूबने से बर्बाद हो गई।
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अब जलस्तर घटने के साथ नदी की धारा तेज होने से रिहायशी इलाकों पर भी खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कटान नहीं रुकी तो नदी की धारा उनके घरों तक पहुंच सकती है।
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बोरी में ईंट-पत्थर भरकर रोक रहे कटान
बाढ़ खंड की टीम नदी किनारे बोरी में ईंट-पत्थर भरकर डालकर कटान रोकने का प्रयास कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि तेज धारा के सामने यह बचाव कार्य पर्याप्त नहीं है। कई जगह नदी लगातार जमीन काट रही है। ग्रामीणों ने बचाव कार्य तेज कराने और आबादी वाले हिस्सों को सुरक्षित करने की मांग की है। विक्रमजोत क्षेत्र में बीडी तटबंध के पास अर्जुनपुर, लकड़ी पांडेय, लकड़ी दूबे और पकड़ी संग्राम गांवों में रुक-रुककर कटान हो रही है। हालांकि जलस्तर घटने से तटबंधों पर दबाव कम हुआ है।
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बाढ़ के बाद संक्रमण का खतरा
बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब ग्रामीणों को संक्रमण फैलने की चिंता है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें बाढ़ चौकियों पर कैंप लगाकर लोगों की जांच कर दवाएं वितरित कर रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई गांवों में अभी तक दवाओं का छिड़काव नहीं हुआ है। दुबौलिया क्षेत्र के मैरुंड गांव सुविका बाबू में हालात सामान्य होने लगे हैं।
कोट
जलस्तर कम होने से तटबंधों पर दबाव घट रहा है। संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी की जा रही है और कटानरोधी कार्यों को मजबूत किया जा रहा है।
-बजेश सोनी, एसडीओ, बाढ़ खंड
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केंद्रीय जल आयोग, अयोध्या कार्यालय के अनुसार, रविवार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 92.05 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 92.73 मीटर से 68 सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर घटने से बाढ़ का पानी गांवों से तेजी से निकल रहा है और जनजीवन सामान्य होने लगा है। इसके बावजूद नदी की तेज धारा से कटान का खतरा बढ़ गया है।
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कुदरहा क्षेत्र के कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिणी हिस्से में बसे महुआपार कला, मईपुर, बैडारी एहतमाली और टेंगरिहा राजा समेत कई गांवों में कटान जारी है। ग्रामीणों के मुताबिक, पहले ही काफी कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। बची जमीन पर खड़ी धान और गन्ने की फसल भी बाढ़ के पानी में डूबने से बर्बाद हो गई।
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अब जलस्तर घटने के साथ नदी की धारा तेज होने से रिहायशी इलाकों पर भी खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कटान नहीं रुकी तो नदी की धारा उनके घरों तक पहुंच सकती है।
बोरी में ईंट-पत्थर भरकर रोक रहे कटान
बाढ़ खंड की टीम नदी किनारे बोरी में ईंट-पत्थर भरकर डालकर कटान रोकने का प्रयास कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि तेज धारा के सामने यह बचाव कार्य पर्याप्त नहीं है। कई जगह नदी लगातार जमीन काट रही है। ग्रामीणों ने बचाव कार्य तेज कराने और आबादी वाले हिस्सों को सुरक्षित करने की मांग की है। विक्रमजोत क्षेत्र में बीडी तटबंध के पास अर्जुनपुर, लकड़ी पांडेय, लकड़ी दूबे और पकड़ी संग्राम गांवों में रुक-रुककर कटान हो रही है। हालांकि जलस्तर घटने से तटबंधों पर दबाव कम हुआ है।
बाढ़ के बाद संक्रमण का खतरा
बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब ग्रामीणों को संक्रमण फैलने की चिंता है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें बाढ़ चौकियों पर कैंप लगाकर लोगों की जांच कर दवाएं वितरित कर रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई गांवों में अभी तक दवाओं का छिड़काव नहीं हुआ है। दुबौलिया क्षेत्र के मैरुंड गांव सुविका बाबू में हालात सामान्य होने लगे हैं।
कोट
जलस्तर कम होने से तटबंधों पर दबाव घट रहा है। संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी की जा रही है और कटानरोधी कार्यों को मजबूत किया जा रहा है।
-बजेश सोनी, एसडीओ, बाढ़ खंड