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पवन को फांसी की खबर से गांव के लोग सन्न, बोलने से इंकार
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पवन के गांव में सन्नाटा, ग्रामीण बोलने से बचते रहे
लालगंज के जगन्नाथपुर का मूल निवासी है पवन
दिल्ली के आरकेपुरम रविदास कैंप में है परिवार
बस्ती। निर्भया कांड के चार गुनहगारों में एक पवन गुप्ता (कालू) के पैतृक गांव जगन्नाथपुर (लालगंज) में सन्नाटा है। गांव के लोगों को टीवी से पता चला कि 22 जनवरी को पवन को फांसी होगी, लेकिन उन्होंने इस बारे में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। उन्होंने इतना जरूर बताया कि गांव में उसके परिवार का आना-जाना न के बराबर है। उसका घर भी खंडहर में बदल चुका है।
दिल्ली के रिंग रोड पर 16 दिसंबर 2012 को जिस चलती बस में मेडिकल छात्रा के साथ गैंगरेप हुआ था, उसमें पवन गुप्ता उर्फ कालू भी अपने दोस्तों के साथ सवार था। मंगलवार को आखिरकार उसके विरुद्ध भी डेथ वारंट जारी हो गया। उसे भी 22 जनवरी को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी दी जाएगी। गांव के लोग कहते हैं कि बचपन से ही पवन परिवार के साथ दिल्ली में रहता है। वहां पढ़ाई के साथ ही वह जूस का व्यवसाय करने लगा। उसके पिता, दादी और बहन, चारा आदि परिवार के सदस्य आरकेपुरम इलाके के संतरविदास कैंप में रहते हैं। बकौल ग्रामीण, निर्भया कांड के बाद पवन की मां की मौत हो गई थी, तभी वे लोग गांव आए थे। दो भाई व दो बहनों में पवन सबसे बड़ा है। गांव छोड़कर पवन के पिता ने महादेवा चौराहे के पास नया मकान बनवाना शुरू किया था, मगर निर्भया कांड के बाद से काम ठप पड़ा है।
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लालगंज के जगन्नाथपुर का मूल निवासी है पवन
दिल्ली के आरकेपुरम रविदास कैंप में है परिवार
बस्ती। निर्भया कांड के चार गुनहगारों में एक पवन गुप्ता (कालू) के पैतृक गांव जगन्नाथपुर (लालगंज) में सन्नाटा है। गांव के लोगों को टीवी से पता चला कि 22 जनवरी को पवन को फांसी होगी, लेकिन उन्होंने इस बारे में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। उन्होंने इतना जरूर बताया कि गांव में उसके परिवार का आना-जाना न के बराबर है। उसका घर भी खंडहर में बदल चुका है।
दिल्ली के रिंग रोड पर 16 दिसंबर 2012 को जिस चलती बस में मेडिकल छात्रा के साथ गैंगरेप हुआ था, उसमें पवन गुप्ता उर्फ कालू भी अपने दोस्तों के साथ सवार था। मंगलवार को आखिरकार उसके विरुद्ध भी डेथ वारंट जारी हो गया। उसे भी 22 जनवरी को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी दी जाएगी। गांव के लोग कहते हैं कि बचपन से ही पवन परिवार के साथ दिल्ली में रहता है। वहां पढ़ाई के साथ ही वह जूस का व्यवसाय करने लगा। उसके पिता, दादी और बहन, चारा आदि परिवार के सदस्य आरकेपुरम इलाके के संतरविदास कैंप में रहते हैं। बकौल ग्रामीण, निर्भया कांड के बाद पवन की मां की मौत हो गई थी, तभी वे लोग गांव आए थे। दो भाई व दो बहनों में पवन सबसे बड़ा है। गांव छोड़कर पवन के पिता ने महादेवा चौराहे के पास नया मकान बनवाना शुरू किया था, मगर निर्भया कांड के बाद से काम ठप पड़ा है।
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