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समायोजन की मांग पूरी होने पर अनुदेशकों व रसोईयों में मायूसी

Tue, 26 Apr 2022 11:37 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 26 Apr 2022 11:37 PM IST
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Rasoiya and Anudeshak Mayoos
समायोजन की मांग अधूरी होने पर अनुदेशक व रसोइया मायूस
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बस्ती। परिषदीय स्कूलों में तैनात अंशकालिक अनुदेशकों और रसोइयों का आंदोलन रंग लाने लगा है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी अनुदेशकों को समायोजित किए जाने पर निर्णय नहीं लिया है। लेकिन, अनुदेशकों का दो हजार और रसोइयों का पांच सौ रुपये मानदेय बढ़ा दिया गया है। वहीं, अनुदेशक व रसोइया इसे नाकाफी मान रहे हैं लिहाजा रसोइयों ने 30 अप्रैल को बीएसए कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।
समायोजन पर कोई निर्णय न होने से अनुदेशक और रसोइया मायूस हैं। परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुमार पांडेय ने बताया कि जिले के उच्च प्राथमिक विद्यालय में 354 कार्यरत अनुदेशकों को प्रतिमाह सात हजार रुपये के मानदेय दिया जाता है जो मौजूदा समय की महंगाई में काफी कम है। सरकार से न्यूनतम वेतन 18 हजार की मांग की जा रही थी। लेकिन, शासन ने केवल दो हजार रुपये बढ़ाया है। अभी शिक्षक पद पर समायोजन को लेकर न्यूनतम वेतन की मांग बाकी है। इस सरकार से पहले 84 सौ रुपये मिलते थे, लेकिन भाजपा सरकार बनने अनुदेशकों का मानदेय घटा दिया गया और जिले के 354 अनुदेशकों का नौ माह तक 1430 रुपये की रिकवरी भी कर ली गई। जब तक अनुदेशकों की मांग पूरी नहीं होती है तब संघर्ष जारी रहेगा।
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वहीं, मिड-डे मिल रसोइया कर्मचारी यूनियन के जिलामंत्री ध्रुवचंद्र ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में पांच हजार रसोइया कार्यरत हैं। जो बंधुआ मजदूरों की तरह मजदूरी करती आ रही हैं। इसे उच्च न्यायालय ने भी स्वीकार किया और रसोइयों को न्यूनतम मानदेय निर्धारित कर देने का निर्देश दिया। बावजूद इसके प्रदेश सरकार न्यूनतम मानदेय न देकर केवल पांच सौ रुपये की बढ़ोत्तरी की है। जो रसोइयों के साथ सौतेला व्यवहार है। रसोइयों को पांच माह से मानदेय भी नहीं मिला है जिससे परिवार का खर्च चलाने में काफी परेशानी हो रही है। मानदेय के लिए कई बार हेडमास्टर और खंड शिक्षा अधिकारी को भी लिखित पत्र दिया गया, लेकिन रुका हुआ मानदेय भी नहीं मिल रहा है।
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