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जमकर बरसे मेघ, पारा छह डिग्री लुढ़का

Tue, 16 Jun 2020 09:39 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jun 2020 09:39 PM IST
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जमकर बरसे मेघ, पारा छह डिग्री लुढ़का
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कृषि विज्ञानियों ने बारिश को बताया फसलों के लिए संजीवनी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मंगलवार अलसुबह से शुरू हुआ बारिश का क्रम देर शाम तक रुक-रुक कर जारी रहा। जिले में दोपहर तक नौ एमएम बारिश का रिकार्ड की गई। सोमवार की तुलना में अधिकतम तापमान 37 डिग्री से लुढ़ककर मंगलवार को 31 डिग्री सेल्सियस पर आ पहुंचा। आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्र का कहना है कि 20 जून तक मानसून बस्ती मंडल में आने पहुंचने का अनुमान है। आसमान में बादल बने रहेंगे।
कृषि विज्ञान केंद्र बंजरिया के कृषि विज्ञानी डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि खरीफ की फसल संभालने में जुटे किसानों को ऐसी ही बारिश का इंतजार था। धान की नर्सरी हो या ढैंचा की लहलहाती फसल हो, सबके लिए यह बारिश संजीवनी से कम नहीं साबित होगी।
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पशुओं का करा ले टीकाकरण
पशु चिकित्सक डॉ. विकास पाठक ने कहा कि मानसून की बारिश होते ही पशुओं में गलाघोंटू और एक टंगिया रोग होने की संभावना ज्यादा रहती है। ऐसे में पशुपालक और किसानों पशुओं में टीकाकरण करवा लें। मुर्गियों में रानीखेत रोग का खतरा रहता है। इसके लिए पहला टीका सात दिनों के अंदर और दूसरा टीका आठ सप्ताह की उम्र में लगवा दें।
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पालिका के दावों की खुली पोल, जगह-जगह जलभराव
बस्ती। चोक नालियों व नालों के चलते सड़कों से लेकर वार्ड की गलियों में बारिश का पानी भर गया। बारिश से नगर के बभनगांवा, आवास विकास, धर्मशाला रोड, पुरानी बस्ती, मंगलबाजार, नरहरिया, रौतापार, न्यू बैरिहवां कालोनी, इटैलिया आदि वार्डों में पानी भर गया। इस जलभराव ने नगर पालिका की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। रामेश्वरपुरी निवासी सुभाष श्रीवास्तव कहते हैं कि यदि समय से नालियों व नालों की सफाई हो तो यह दिन नहीं देखना पड़ता। हल्की बारिश में भी जल जमाव हो जाता है। मजबूरन लोगों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। बैरिहवां निवासी अभिषेक पांडेय कहते हैं कि जल जमाव के चलते संक्रामक बीमारियों का भय भी बना रहता है। जिम्मेदार समय से जाग जाएं तो वार्ड वासियों को इस समस्या से न जूझना पड़े। नरहरिया निवासी महेंद्र कुमार कहते हैं कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वायदे किए जाते हैं, जिसके बाद सब भूल जाते हैं। बारिश में शहर में जल निकासी एक बड़ी समस्या है।
नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी अखिलेश त्रिपाठी कहते हैं कि नालों की सफाई गई है, इसके साथ ही सफाई नायकों को नियमित नाली सफाई व्यवस्था देखने को कहा गया है। जल निकासी को लेकर विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं।
जल निकासी को लेकर नगर पालिका अध्यक्ष रूपम मिश्रा कहती हैं कि शहर के अधिकतर आवासीय कालोनियां गहराई में बसीं हैं। ऐसे में नाला होने के बावजूद पानी भराव हो जाता है। इससे निजात के लिए केवल पंपिंग सेट से पानी निकालना ही विकल्प है। नाला आदि की सफाई कराई गई है।
संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा
बस्ती। महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. पीके श्रीवास्तव ने कहा कि बारिश का मौसम सभी के लिए संवेदनशील होता है। उल्टी, दस्त, डायरिया, त्वचा संबंधी रोग के अलावा मस्तिष्क ज्वर व डेंगू के आसार बढ़ जाते हैं। इससे बचने के लिए कूलर आदि में पानी न जमा होने दें। हो सके तो कूलर का प्रयोग पानी के बिना करें। नवजात को मां अपने करीब रखे उसे दुग्ध पान कराती रहे। कम से कम लोग बच्चों को छुएं, जिससे संक्रमण न होने पाए।

जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. रामजी सोनी ने कहा कि इस मौसम में संक्रामक बीमारियों का खतरा अधिक होता है। ऐसे में बांसी भोजन आदि का प्रयोग न करें। यदि उल्टी दस्त शुरू हो जाए तो तत्काल डाक्टर से सलाह लें। मच्छरों से बचने के भी उपाय कर लें।
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