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प्रमुख सचिव ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया
basti
Updated Tue, 16 Aug 2016 11:46 PM IST
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जायजा
- फोटो : ramesh mishra
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बस्ती। प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अरुण सिन्हा और एनएचआरएम मिशन के निदेशक डॉ. आलोक कुमार ने मंगलवार को गोरखपुर जाते समय जिला अस्पताल, महिला एवं ओपेक चिकित्सालय कैली का औचक निरीक्षण किया। दवाओं और इलाज में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के जानकारी ली।
मंगलवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की काफी भीड़ थी। प्रमुख सचिव के दौरे से अस्पताल प्रशासन में हलचल रही। सुबह से ही पर्ची काउंटर पर पर्चे के लिए लंबी लाइन लग गई थी। दोपहर तक सात सौ पर्चे काटे जा चुके थे। प्रमुख सचिव के आने का असर डॉक्टरों में नहीं दिखा। कई चैंबर में डॉक्टर नदारद थे। मरीज दिखाने के लिए परेशान रहे। कई लोग निराश होकर लौट गए। उन्होंने सुबह 11 बजे जिला अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड, सर्जिकल वार्ड, चिल्ड्रेन वार्ड और ट्रॉमा सेंटर और ओपीडी का निरीक्षण किया। चिल्ड्रेन और सर्जिकल वार्ड में सफाई न होने से नाराज दिखे। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से सुधार लाने की हिदायत दी। जबकि महिला अस्पताल में मरीजों के पर्चे में बाहर की दवा डॉक्टरों ने लिखा था। उस पर नाराजगी जताई। कहा कि मरीजों की दवा अस्पताल की लिखी जानी चाहिए। महिला अस्पताल में तीन महीनों से जरूरी दवाएं नहीं हैं। वहीं, महिला पैथॉलाजी में जांच में कमी पाई गई। कई महिलाओं ने खून, पेशाब जांच के नाम कर्मचारियों पर रकम लेने की बात कही।
प्रमुख सचिव ने ओपेक चिकित्सालय कैली में इमरजेंसी, एक्सरे, अल्ट्रासांउड रूम का निरीक्षण किया। एक महीने से सीटी स्कैन मशीन खराब है। उसको ठीक कराने का निर्देश निदेशक एसएन त्रिपाठी को दिया। अस्पताल में आए मरीज राम सुभग, गीता देवी, कंचन देवी ने बताया कि अस्पताल में दलाल सक्रिय हैं। बिना इनके सहयोग से डॉक्टर को दिखाना मुश्किल है। मरीज के अस्पताल में आते ही दलाल पीछे लग जाते हैं। इस संबंध में सीएमओं डॉ. जेपी सिंह, ने बताया कि प्रमुख सचिव का गोरखपुर जाने का प्रोग्राम था। उन्होंने अचानक निरीक्षण का फैसला लिया। महिला अस्पताल में जो कमी मिली है उसकी जांच का आदेश दिया गया है। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी। दवाओं के लिए लिखा गया है। इस मौके पर डिप्टी सीएमओ सीएल कनौजिया, प्रभारी एसआईसी डॉ. मोहिबुल्लाह, सीबीएन त्रिपाठी, डॉ. रामजी सोनी, अजय श्रीवास्तव सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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मंगलवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की काफी भीड़ थी। प्रमुख सचिव के दौरे से अस्पताल प्रशासन में हलचल रही। सुबह से ही पर्ची काउंटर पर पर्चे के लिए लंबी लाइन लग गई थी। दोपहर तक सात सौ पर्चे काटे जा चुके थे। प्रमुख सचिव के आने का असर डॉक्टरों में नहीं दिखा। कई चैंबर में डॉक्टर नदारद थे। मरीज दिखाने के लिए परेशान रहे। कई लोग निराश होकर लौट गए। उन्होंने सुबह 11 बजे जिला अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड, सर्जिकल वार्ड, चिल्ड्रेन वार्ड और ट्रॉमा सेंटर और ओपीडी का निरीक्षण किया। चिल्ड्रेन और सर्जिकल वार्ड में सफाई न होने से नाराज दिखे। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से सुधार लाने की हिदायत दी। जबकि महिला अस्पताल में मरीजों के पर्चे में बाहर की दवा डॉक्टरों ने लिखा था। उस पर नाराजगी जताई। कहा कि मरीजों की दवा अस्पताल की लिखी जानी चाहिए। महिला अस्पताल में तीन महीनों से जरूरी दवाएं नहीं हैं। वहीं, महिला पैथॉलाजी में जांच में कमी पाई गई। कई महिलाओं ने खून, पेशाब जांच के नाम कर्मचारियों पर रकम लेने की बात कही।
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प्रमुख सचिव ने ओपेक चिकित्सालय कैली में इमरजेंसी, एक्सरे, अल्ट्रासांउड रूम का निरीक्षण किया। एक महीने से सीटी स्कैन मशीन खराब है। उसको ठीक कराने का निर्देश निदेशक एसएन त्रिपाठी को दिया। अस्पताल में आए मरीज राम सुभग, गीता देवी, कंचन देवी ने बताया कि अस्पताल में दलाल सक्रिय हैं। बिना इनके सहयोग से डॉक्टर को दिखाना मुश्किल है। मरीज के अस्पताल में आते ही दलाल पीछे लग जाते हैं। इस संबंध में सीएमओं डॉ. जेपी सिंह, ने बताया कि प्रमुख सचिव का गोरखपुर जाने का प्रोग्राम था। उन्होंने अचानक निरीक्षण का फैसला लिया। महिला अस्पताल में जो कमी मिली है उसकी जांच का आदेश दिया गया है। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी। दवाओं के लिए लिखा गया है। इस मौके पर डिप्टी सीएमओ सीएल कनौजिया, प्रभारी एसआईसी डॉ. मोहिबुल्लाह, सीबीएन त्रिपाठी, डॉ. रामजी सोनी, अजय श्रीवास्तव सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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