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Basti News: जागरूकता से ही आत्महत्या जैसी घटनाओं पर लगेगा विराम
Wed, 11 Sep 2024 12:52 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 11 Sep 2024 12:52 AM IST
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मेडिकल कॉलेज में मनाया गया विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा इकाई ओपेक अस्पताल कैली के मानसिक रोग विभाग में मंगलवार को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया गया। इस दौरान जागरूकता फैलाने पर विशेष जोर दिया गया। कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि जागरूकता से ही आत्महत्या जैसी घटनाओं पर विराम लगेगा। विषम से विषम परिस्थितियों में भी व्यक्ति को घबराना नहीं चाहिए। साहस के साथ परिस्थितियों का सामना करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम के लिए युवा वर्ग को जागरूक करने की विशेष जरूरत हैं। आत्महत्या जैसी घटनाओं की रोकथाम के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 10 सितंबर को विश्वभर में यह दिवस मनाया जाता है। बढ़ते आत्महत्या के मामले में गंभीर चिंता का विषय हैं। इसकी रोकथाम में समाज के हर एक व्यक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। परिवार में पति-पत्नी को तालमेल बनाए रखना चाहिए। आसपास रहने वाले, दोस्तों, रिश्तेदारों, साथ काम करने वाले लोगों की स्थिति की हम सभी को समझ होती है।
कम्युनिटी मेडिसिन की विभागाध्यक्ष प्रियंका केसरवानी ने कहा कि पारिवारिक कलह, आर्थिक तंगी भी आत्महत्या की एक वजह बन रही है। हम अपने आसपास के लोगों के व्यवहार पर गंभीरता से ध्यान दें। नकारात्मक बदलाव होने पर लोगों को जागरूक करें। मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिलीप कुमार वर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कहा कि मन में आत्महत्या का विचार आना गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत है। इससे यह भी पता चलता है कि व्यक्ति लंबे समय से तनाव- अवसाद में जी रहा है। इसका समय रहते निदान और उपचार हो जाए तो लोगों को आत्म हत्या से बचाया जा सकता है। इस मौके पर डॉ. अखिलेश त्रिपाठी, डॉ. अनिल यादव, डॉ. बीएल कन्नौजिया , डॉ. अलका शुक्ला, डॉ. विजय शंकर आदि मौजूद रहे।
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बस्ती। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा इकाई ओपेक अस्पताल कैली के मानसिक रोग विभाग में मंगलवार को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया गया। इस दौरान जागरूकता फैलाने पर विशेष जोर दिया गया। कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि जागरूकता से ही आत्महत्या जैसी घटनाओं पर विराम लगेगा। विषम से विषम परिस्थितियों में भी व्यक्ति को घबराना नहीं चाहिए। साहस के साथ परिस्थितियों का सामना करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम के लिए युवा वर्ग को जागरूक करने की विशेष जरूरत हैं। आत्महत्या जैसी घटनाओं की रोकथाम के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 10 सितंबर को विश्वभर में यह दिवस मनाया जाता है। बढ़ते आत्महत्या के मामले में गंभीर चिंता का विषय हैं। इसकी रोकथाम में समाज के हर एक व्यक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। परिवार में पति-पत्नी को तालमेल बनाए रखना चाहिए। आसपास रहने वाले, दोस्तों, रिश्तेदारों, साथ काम करने वाले लोगों की स्थिति की हम सभी को समझ होती है।
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कम्युनिटी मेडिसिन की विभागाध्यक्ष प्रियंका केसरवानी ने कहा कि पारिवारिक कलह, आर्थिक तंगी भी आत्महत्या की एक वजह बन रही है। हम अपने आसपास के लोगों के व्यवहार पर गंभीरता से ध्यान दें। नकारात्मक बदलाव होने पर लोगों को जागरूक करें। मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिलीप कुमार वर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कहा कि मन में आत्महत्या का विचार आना गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत है। इससे यह भी पता चलता है कि व्यक्ति लंबे समय से तनाव- अवसाद में जी रहा है। इसका समय रहते निदान और उपचार हो जाए तो लोगों को आत्म हत्या से बचाया जा सकता है। इस मौके पर डॉ. अखिलेश त्रिपाठी, डॉ. अनिल यादव, डॉ. बीएल कन्नौजिया , डॉ. अलका शुक्ला, डॉ. विजय शंकर आदि मौजूद रहे।
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