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Basti News: जिला अस्पताल के डेंटल विभाग में ऑनलाइन परामर्श सेवा शुरू, मरीजों को सहूलियत
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बस्ती। जिला अस्पताल में एक और नई तकनीक विकसित की गई है। यहां अब डेंटल कक्ष में ऑनलाइन परामर्श सेवा शुरू की गई है। इससे मरीजों के साथ ही चिकित्सक को सहूलियत हो रही है।
जिला अस्पताल में रोजाना हजार के आसपास मरीज आते हैं। अभी यहां सभी विभागों में चिकित्सक मरीजों हाथ से दवा पर्ची लिखकर देते हैं और काउंटर पर मरीज जाकर प्राप्त करते हैं। कभी-कभी चिकित्सक की दवा लिखी कर्मी ही नहीं समझ पाते। मरीज भी नहीं जान पाते। अब प्रिंटेड दवा पर्ची निकल रही है, इससे मरीज और कर्मी आसानी से दवा पढ़ सकेंगे। पहले चरण में अभी यह सेवा सिर्फ डेंटल विभाग में शुरू की गई है। बताया गया कि यहां मरीजों की संख्या कम रहती है, ऐसे में ट्रायल के रूप में इस कक्ष को शामिल किया गया। पहले दिन 109 दवा पर्ची प्रिंटेड निकाली गई और मरीजों को दी गई। नोडल अधिकारी डॉ. आलोक पांडेय की अगुवाई में सीनियर सपोर्टर एग्जीक्यूटिव ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर इंचार्ज शाश्वत श्रीवास्तव ने इसके विकसित किया। बताया कि इसके बाद अन्य विभाग में भी यह व्यवस्था लागू की जाएगी। बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में कुल, 925 मरीज जांच के लिए पहुंचे थे। सर्वाधिक भीड़, त्वचा रोग, मेडिसिन और बाल रोग विभाग में रही। वहीं, बुधवार को जिला अस्पताल में 1025 मरीज आए थे। एसआईसी जिला अस्पताल डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि यह सेवा जल्द ही सभी ओपीडी कक्ष में होगी।
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महिला अस्पताल में 325 मरीज ओपीडी में आए
जिला महिला अस्पताल में बृहस्पतिवार को 325 मरीज आए। वहीं, बुधवार को 264 मरीज आए थे। संख्या बढ़ने से मरीजों को जांच और रिपोर्ट लेकर चिकित्सकों से दवा लिखवाने के लिए परेशान होना पड़ा। कई मरीज बिना रिपोर्ट दिखाए और दवा के वापस लौट गए। उनका कहना था कि सुबह आने के बाद भी दोपहर तक जांच कंपलीट नहीं होने से लौटना पड़ रहा है।
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15 दिन बाद बहाल हुई अल्ट्रासाउंड सेवा
जिला महिला अस्पताल में बृहस्पतिवार को 15 दिन बाद अल्ट्रासाउंड सेवा बहाल कराई गई। बताया गया कि मशीन में तकनीकी खराबी के कारण अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा था, इससे रोजाना 40 से 50 गर्भवती को लौटना पड़ता था। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विमल कुमार द्विवेदी ने मशीन बनने के बाद अल्ट्रासाउंड किए। इस दौरान मरीजों की संख्या काफी अधिक रही। सीएमएस डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, मशीन बन गई और सेवा बहाल करा दी गई है। दो बजे तक चिकित्सक ओपीडी में बैठते हैं।
बोले मरीज
सुबह 10 बजे आईं तो पर्चा बनवाने में समय लगा। फिर लाइन लगाकर चिकित्सक को दिखाया। उन्होंने अल्ट्रासाउंड जांच लिख दी। किसी तरह दो बजे के बाद नंबर आया और ढाई बजे जांच हुई। तब तक चिकित्सक कक्ष से चले गए थे। रिपोर्ट नहीं दिखा पाई और दवा भी नहीं मिली। -जनकनंदिनी, नरखोरिया
पत्नी शुभी को दिखाने के लिए सुबह ही आए थे। पर्चा बनवाकर चिकित्सक को दिखाया। चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड के साथ ब्लड जांच कराने की सलाह दी। ब्लड जांच कराने में समय लग गया। दो बजे रिपोर्ट मिली तो पता चला कि चिकित्सक चले गए। ताला लगा होने पर लौट गए। -शेशिका प्रसाद, जगदीशपुर
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जिला अस्पताल में रोजाना हजार के आसपास मरीज आते हैं। अभी यहां सभी विभागों में चिकित्सक मरीजों हाथ से दवा पर्ची लिखकर देते हैं और काउंटर पर मरीज जाकर प्राप्त करते हैं। कभी-कभी चिकित्सक की दवा लिखी कर्मी ही नहीं समझ पाते। मरीज भी नहीं जान पाते। अब प्रिंटेड दवा पर्ची निकल रही है, इससे मरीज और कर्मी आसानी से दवा पढ़ सकेंगे। पहले चरण में अभी यह सेवा सिर्फ डेंटल विभाग में शुरू की गई है। बताया गया कि यहां मरीजों की संख्या कम रहती है, ऐसे में ट्रायल के रूप में इस कक्ष को शामिल किया गया। पहले दिन 109 दवा पर्ची प्रिंटेड निकाली गई और मरीजों को दी गई। नोडल अधिकारी डॉ. आलोक पांडेय की अगुवाई में सीनियर सपोर्टर एग्जीक्यूटिव ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर इंचार्ज शाश्वत श्रीवास्तव ने इसके विकसित किया। बताया कि इसके बाद अन्य विभाग में भी यह व्यवस्था लागू की जाएगी। बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में कुल, 925 मरीज जांच के लिए पहुंचे थे। सर्वाधिक भीड़, त्वचा रोग, मेडिसिन और बाल रोग विभाग में रही। वहीं, बुधवार को जिला अस्पताल में 1025 मरीज आए थे। एसआईसी जिला अस्पताल डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि यह सेवा जल्द ही सभी ओपीडी कक्ष में होगी।
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महिला अस्पताल में 325 मरीज ओपीडी में आए
जिला महिला अस्पताल में बृहस्पतिवार को 325 मरीज आए। वहीं, बुधवार को 264 मरीज आए थे। संख्या बढ़ने से मरीजों को जांच और रिपोर्ट लेकर चिकित्सकों से दवा लिखवाने के लिए परेशान होना पड़ा। कई मरीज बिना रिपोर्ट दिखाए और दवा के वापस लौट गए। उनका कहना था कि सुबह आने के बाद भी दोपहर तक जांच कंपलीट नहीं होने से लौटना पड़ रहा है।
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15 दिन बाद बहाल हुई अल्ट्रासाउंड सेवा
जिला महिला अस्पताल में बृहस्पतिवार को 15 दिन बाद अल्ट्रासाउंड सेवा बहाल कराई गई। बताया गया कि मशीन में तकनीकी खराबी के कारण अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा था, इससे रोजाना 40 से 50 गर्भवती को लौटना पड़ता था। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विमल कुमार द्विवेदी ने मशीन बनने के बाद अल्ट्रासाउंड किए। इस दौरान मरीजों की संख्या काफी अधिक रही। सीएमएस डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, मशीन बन गई और सेवा बहाल करा दी गई है। दो बजे तक चिकित्सक ओपीडी में बैठते हैं।
बोले मरीज
सुबह 10 बजे आईं तो पर्चा बनवाने में समय लगा। फिर लाइन लगाकर चिकित्सक को दिखाया। उन्होंने अल्ट्रासाउंड जांच लिख दी। किसी तरह दो बजे के बाद नंबर आया और ढाई बजे जांच हुई। तब तक चिकित्सक कक्ष से चले गए थे। रिपोर्ट नहीं दिखा पाई और दवा भी नहीं मिली। -जनकनंदिनी, नरखोरिया
पत्नी शुभी को दिखाने के लिए सुबह ही आए थे। पर्चा बनवाकर चिकित्सक को दिखाया। चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड के साथ ब्लड जांच कराने की सलाह दी। ब्लड जांच कराने में समय लग गया। दो बजे रिपोर्ट मिली तो पता चला कि चिकित्सक चले गए। ताला लगा होने पर लौट गए। -शेशिका प्रसाद, जगदीशपुर