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तीन नर्सिंग होम संचालकों को नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Dec 2015 12:08 AM IST
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बस्ती। डिप्टी सीएमओ की जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाए जाने पर तीन
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नर्सिंग होम संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। कार्रवाई की जद में
सावित्री हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, सागर हास्पिटल और हयात हास्पिटल आए
हैं। इन अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन समाप्त करने का नोटिस भेजा गया है।
डिप्टी सीएमओ डॉक्टर सीएल कन्नौजिया की जांच में पता चला कि नर्सिंग होम पर बुनियादी जरूरतें तक उपलब्ध नहीं हैं। कहीं पर पंजीकृत डॉक्टर नहीं हैं तो कहीं पर भर्ती होने वाले मरीजों का रिकॉर्ड नहीं है।
यहां तक कि पैरामेडिकल और ऑपरेशन के समय एनेस्थेटिस्ट (बेहोशी के डॉक्टर) का भी रिकॉर्ड नहीं मिला। कई नर्सिंग होम में तो सर्जन ही पंजीकृत नहीं हैं। डिप्टी सीएमओ के निरीक्षण में सबसे खराब स्थिति सागर हास्पिटल की मिली।
यहां पर ऑपरेशन तो हो रहे हैं, मगर इस हास्पिटल में कोई भी पंजीकृत सर्जन नहीं है। कमियां पाए जाने पर सावित्री हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, सागर हास्पिटल और हयात हास्पिटल प्रबंधकों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।
नोटिस का जवाब तीन दिन में देने के साथ यह भी कहा गया है कि क्यों न हास्पिटल का रजिस्ट्रेशन समाप्त कर दिया जाए। नोटिस उप मुख्य चिकित्याधिकारी डॉक्टर सीएल कन्नौजिया की ओर से भेजा गया है।
डिप्टी सीएमओ ने पहली जांच 19 नवंबर 2015 को टीबी हास्पिटल के निकट स्थित हयात हास्पिटल और उसी दिन दक्षिण दरवाजा के निकट स्थित सागर हास्पिटल का किया।
सागर हास्पिटल की जांच में सबसे बड़ी कमी पंजीकृत सर्जन का न मिलना रहा, जब कि यहां पर निरीक्षण के दौरान मंजू पत्नी दीनानाथ निवासी धौरहरा रामगर एवं शशिकला पत्नी संतोष का ऑपरेशन हुआ था और दोनों महिलाएं भर्ती पाई गई।
निरीक्षण में कोई भी पंजीकृत डॉक्टर नहीं है, और न पैरामेडिकल है। ओपीडी एवं ओटी में कितने मरीज भर्ती हैं, के संबंध में कोई अभिलेख नहीं मिला। हयात हास्पिटल की जांच में पंजीकृत सर्जन छोड़कर सागर हास्पिटल जैसी कमियां मिली।
तीसरी जांच 25 नवंबर 2015 को बांसी रोड बडेबन स्थित सावित्री हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की की गई। यहां पर भी अन्य हास्पिटल की तरह कमियां मिली।
डिप्टी सीएमओ डॉक्टर सीएल कन्नौजिया की जांच में पता चला कि नर्सिंग होम पर बुनियादी जरूरतें तक उपलब्ध नहीं हैं। कहीं पर पंजीकृत डॉक्टर नहीं हैं तो कहीं पर भर्ती होने वाले मरीजों का रिकॉर्ड नहीं है।
यहां तक कि पैरामेडिकल और ऑपरेशन के समय एनेस्थेटिस्ट (बेहोशी के डॉक्टर) का भी रिकॉर्ड नहीं मिला। कई नर्सिंग होम में तो सर्जन ही पंजीकृत नहीं हैं। डिप्टी सीएमओ के निरीक्षण में सबसे खराब स्थिति सागर हास्पिटल की मिली।
यहां पर ऑपरेशन तो हो रहे हैं, मगर इस हास्पिटल में कोई भी पंजीकृत सर्जन नहीं है। कमियां पाए जाने पर सावित्री हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, सागर हास्पिटल और हयात हास्पिटल प्रबंधकों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।
नोटिस का जवाब तीन दिन में देने के साथ यह भी कहा गया है कि क्यों न हास्पिटल का रजिस्ट्रेशन समाप्त कर दिया जाए। नोटिस उप मुख्य चिकित्याधिकारी डॉक्टर सीएल कन्नौजिया की ओर से भेजा गया है।
डिप्टी सीएमओ ने पहली जांच 19 नवंबर 2015 को टीबी हास्पिटल के निकट स्थित हयात हास्पिटल और उसी दिन दक्षिण दरवाजा के निकट स्थित सागर हास्पिटल का किया।
सागर हास्पिटल की जांच में सबसे बड़ी कमी पंजीकृत सर्जन का न मिलना रहा, जब कि यहां पर निरीक्षण के दौरान मंजू पत्नी दीनानाथ निवासी धौरहरा रामगर एवं शशिकला पत्नी संतोष का ऑपरेशन हुआ था और दोनों महिलाएं भर्ती पाई गई।
निरीक्षण में कोई भी पंजीकृत डॉक्टर नहीं है, और न पैरामेडिकल है। ओपीडी एवं ओटी में कितने मरीज भर्ती हैं, के संबंध में कोई अभिलेख नहीं मिला। हयात हास्पिटल की जांच में पंजीकृत सर्जन छोड़कर सागर हास्पिटल जैसी कमियां मिली।
तीसरी जांच 25 नवंबर 2015 को बांसी रोड बडेबन स्थित सावित्री हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की की गई। यहां पर भी अन्य हास्पिटल की तरह कमियां मिली।