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Basti News: लेआउट न नक्शा...धंधेबाजों ने खेतों में कर दी प्लाॅटिंग

Sun, 27 Apr 2025 12:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sun, 27 Apr 2025 12:28 AM IST
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No layout, no map...traders have done plotting in the fields
बस्ती। खेत और खाली पड़ी जमीन पर अवैध प्लाॅटिंग का धंधा जोरों पर है। बिना ले-आउट और नक्शा पास कराए ही कॉलोनाइजर ने कई कॉलोनियां बसा दी हैं। किसानों से कौड़ियों के भाव खेतों को लेकर इस पर प्लॉटिंग कर दी गई है।
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इन धंधेबाजों के खिलाफ बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने कुछ दिन सख्ती की, लेकिन इनका अभियान कुछ ही दिन बाद बंद हो गया। इसका लाभ बिना ले-आउट पास कराने वाले कॉलोनाइजर उठा रहे हैं।
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बीडीए की सुस्ती के चलते भूखंडों की आनन-फानन बिक्री शुरू कर दी गई है। ताकि कार्रवाई होने तक फायदे के साथ पूंजी भी निकल आए। इसके बाद लेटलतीफ यदि कार्रवाई हुई भी तो इसकी मार जाने-अनजाने में जमीन खरीदने वाले लोगों को झेलनी पड़ेगी।
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शहर और आसपास के क्षेत्र में प्लाॅटिंग कर जमीन बेचने का कारोबार बढ़ है। एक दशक में शहर का दायरा नगर पालिका से बाहर तीन से चार किमी के परिक्षेत्र में बढ़ा है। पांच साल पहले तक बीडीए का प्रभाव न होने से कॉलोनाइजर मनमाने ढंग से खेती योग्य जमीनों पर प्लॉटिंग करते चले गए, जिससे शहर के आसपास अनियोजित बस्ती की भरमार हो गई है।
इस बीच बीडीए ने कई बार सख्ती बरतने का प्रयास किया लेकिन, कॉलोनाइजराें के रसूख के चलते मामला हर बार दबता गया। नतीजा 12 से 15 फीट चौड़ाई वाले रास्ते पर दो सौ से तीन सौ घरों की कॉलोनियां बस गई हैं। नगर पालिका क्षेत्र से बाहर लौकियहवां, बेलगड़ी, डारीडीहा, मुंडेरवा, सुपेलवा, मड़वानगर, खीरीघाट, मिश्रौलिया, डिढौआ, बरगदवा, हवेलिया, मनहनडीह, लबनापार, जामडीह, जखनी आदि शहरी क्षेत्र से सटे गांवों में कई नई कॉलोनियां इसी पैटर्न पर बनकर तैयार हो चुकी है।
इन गांवों में खाली जमीनों पर अभी भी प्लाॅटिंग का कारोबार चल रहा है। पिछले साल बीडीए ने फिर से नियोजित कॉलोनी बसाने की मुहिम छेड़ी। इसके तहत कॉलोनाइजरों को खाली जमीनों पर ले-आउट पास कराने के लिए आमंत्रित किया गया। लेकिन बस्ती में कोई भी कॉलोनाइजर बीडीए के मानक पर कॉलोनी विकसित करने के लिए अब तक राजी नहीं हुआ। लोग बिना किसी ले-आउट के प्लॉटिंग करके जमीन लगातार बेच रहे हैं।
इसके बाद बीडीए ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी। जनवरी में बिना ले-आउट वाले 17 प्लाॅटिंग की जमीन चिह्नित की गई है। इन जमीनों में ईंटों की मार्किंग कर प्लाॅट बनाए गए हैं। 1500 से 2500 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के हिसाब से प्लाटों की बिक्री की जा रही है।
चिह्नित प्लाटिंग की जमीनों में कुछ भू-खंडों की बिक्री भी हो चुकी थी तो कुछ की बुकिंग की जा चुकी थी। इसी बीच बीडीए ने इनके ध्वस्तीकरण का आदेश भी पास कर दिया। इसके बाद कॉलोनाइजर और खरीदारों में हड़कंप मच गया है।
बीडीए ने शुरुआत में एक-एक बार शहर के आसपास क्षेत्रों में कुल चार जगहों पर की गई प्लाॅटिंग पर जेसीबी चलाकर ध्वस्तीकरण भी करा दिया। इसके बाद कार्रवाई बंद हो गई है। चिह्नित 13 जगहों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अभी बाकी है।

चर्चा है कि बिना ले-आउट के प्लाॅटिंग करने वाले कॉलोनाइजरों के रसूख के चलते कार्रवाई में ढील दे दी गई है। यह मौका पाते ही कॉलोनाइजर जमीनों का सौदा करने लगे हैं। कार्रवाई होने से पहले ही अधिकांश प्लाॅटों की बिक्री कर ली जाए।
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