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महायोजना: तीन गुना बढ़ा विकास प्राधिकरण का दायरा, 217 गांव बनेंगे शहर
Sat, 20 Jul 2024 03:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 20 Jul 2024 03:53 AM IST
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प्रशासन को परियोजना के ब्योरे का इंतजार, नए सिरे से बनेगा ग्रीन जोन
- नगर पालिका क्षेत्र समेत 69 गांवों की जगह दायरे में अब होंगे 217 गांव
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बीडीए की महायोजना मंजूर होने से शहर का दायरा सौ वर्ग किलोमीटर बढ़ जाएगा। महायोजना 2021 के हिसाब से बीडीए का क्षेत्रफल 51 वर्ग किमी था। अब महायोजना 2031 में क्षेत्रफल बढ़कर 151.50 वर्ग किमी हो गया है। पहले नगर पालिका समेत 69 गांव थे तो नए मास्टर प्लान में नगर पालिका सहित 217 गांव बीडीए के दायरे में लाए गए हैं। हालांकि अभी स्थानीय प्रशासन के पास नक्शा आदि ब्योरा उपलब्ध नहीं हो पाया है। प्राधिकरण के सचिव/ एडीएम प्रतिपाल चौहान ने बताया कि नक्शा आ जाने के बाद स्पष्ट जानकारी हो पाएगी कि महायोजना 2031 का स्वरूप क्या होगा।
महायोजना 2031 के प्रस्ताव की फाइल वर्ष 2016 से ही चक्कर काट रही है। तीन बार कोई न कोई आपत्ति लगाकर शासन से फाइल वापस आ जाती रही। आखिरी बार इसमें तीन बिंदुओं पर आपत्ति लगाई गई थी। जिसमें कहा गया था कि भूमि प्रकार की जानकारी नहीं दर्शाई गई है। बीडीए में शहर से सटे कुल 217 गांव शामिल हैं। शासन से कहा गया है कि शहरी विस्तार से संबंधित गांवों में सरकारी एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि का स्पष्ट उल्लेख हो। मास्टर प्लान में तालाब, कब्रिस्तान, चारागाह, बंजर एवं अन्य किस्म की सरकारी भूमि इंगित होनी चाहिए।
इसके अलावा देवापार, सोनूपार और बेलवाडाड़ को प्राधिकरण में शामिल न करने को लेकर भी शासन की टिप्पणी आई थी। कहा गया कि इन गांवों में महायोजना में शामिल करने के साथ वहां की भौगोलिक स्थिति का विवरण भी दिया जाए। धरातलीय स्थिति के उल्लेख से ही विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी। तीसरी आपत्ति मास्टर प्लान-2031 में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के उल्लेख न होने को लेकर थी। जिसमें बीडीए को स्पष्ट करना था कि नदी के तटवर्ती गांव कौन से है, जहां बाढ़ की संभावना रहती है। इन्हें महायोजना में अलग केटेगरी में रखना है। इसके अलावा बड़े जलाशय, पोखरे भी मास्टर प्लान में अलग से चिह्नित किए जाएंगे। राजस्व अभिलेखों से इसका उल्लेख होना जरूरी है। इन सभी आपत्तियों के निस्तारण के बाद स्वीकृति की राह बनी।
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क्या है ग्रीन जोन और ग्रीन बेल्ट
- ऐसी जमीनें जो राजस्व अभिलेख में सरकारी एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि के रूप में दर्ज है, उन्हें ग्रीन जोन के रूप में चिह्नित किया गया है। इसमें बंजर, चारागाह, पार्क, चकमार्ग, तालाब, पोखरे एवं अन्य जलाशय शामिल है। यहां निर्माण प्रतिबंधित है। इसके अलावा हाईवे के दोनों तरफ 87.5 मीटर तक तथा कुआनो नदी के दोनों तरफ 80 मीटर तक ग्रीन बेल्ट निर्धारित है। यहां भी निर्माण प्रतिबंधित है।
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ग्रीन बेल्ट की चौड़ाई होगी 20 मीटर
- एनएचएआई के अधीन फोरलेन की कुल चौड़ाई 75 मीटर है। सड़क के मध्य से 37.5 मीटर दोनों तरफ सड़क के लिए जमीन अधिग्रहित है। इसके बाद 50 मीटर चौड़ाई में ग्रीन बेल्ट घोषित है। यानी काफी बड़ा भू-भाग इस मानक की वजह से प्रभावित है। नए प्रस्ताव में ग्रीन बेल्ट की चौड़ाई 50 मीटर से घटाकर 20 मीटर की गई है। कुल 30 मीटर का दायरा कम किया गया है।
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विवाद की कम रहेगी गुंजाइश
- ग्रीन लैंड के चक्कर में काश्तकारों और बीडीए के बीच अक्सर विवाद सामने आता गया। काश्तकार अपनी जमीन में निर्माण कराना चाहते तो बीडीए ग्रीन लैंड का अडंगा खड़ा कर देता था। यदि कोई बिना मानचित्र के निर्माण कराते हुए मिल जाता तो उसे जुर्माना अदा करना पड़ता था। इसको लेकर कई बार हंगामा भी हो चुका है। बीडीए अधिकारियों पर रिश्वत मांगने तक के आरोप लगे। बहरहाल नए मास्टर प्लान के लागू हो जाने से यह दुश्वारी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
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तीन केटेगरी में पास होता है नक्शा
- बीडीए से तीन केटेगरी का नक्शा पास किया जाता है। यहां ज्यादा चलन हाई रिस्क वाले नक्शे का है। इसमें छोटे साइज वाले भूखंड पर मकान का नक्शा पास कराया जाता है। जिनका क्षेत्रफल बिस्वा में होता है। इसके बाद निवेश मित्रा कटेगरी का नक्शा पास हो रहा है। यह पूरी तरह कामर्शियल होता है। इसमें होटल, रेस्तरां, दुकान, माल, मैरेज हॉल जैसे निर्माण किए जाते हैं। तीसरी केटेगरी लो रिस्क है। इसका चलन यहां न के बराबर है। इसमें बड़े भू-भाग शामिल होते हैं। जिनमें समूह में आवासीय नक्शे पास किए जाते हैं। अमूमन रियल स्टेट कारोबारियों द्वारा लो रिस्क के नक्शे बनवाए जाते हैं। यहां ऐसे कारोबारियों की संख्या नहीं है।
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- नगर पालिका क्षेत्र समेत 69 गांवों की जगह दायरे में अब होंगे 217 गांव
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बीडीए की महायोजना मंजूर होने से शहर का दायरा सौ वर्ग किलोमीटर बढ़ जाएगा। महायोजना 2021 के हिसाब से बीडीए का क्षेत्रफल 51 वर्ग किमी था। अब महायोजना 2031 में क्षेत्रफल बढ़कर 151.50 वर्ग किमी हो गया है। पहले नगर पालिका समेत 69 गांव थे तो नए मास्टर प्लान में नगर पालिका सहित 217 गांव बीडीए के दायरे में लाए गए हैं। हालांकि अभी स्थानीय प्रशासन के पास नक्शा आदि ब्योरा उपलब्ध नहीं हो पाया है। प्राधिकरण के सचिव/ एडीएम प्रतिपाल चौहान ने बताया कि नक्शा आ जाने के बाद स्पष्ट जानकारी हो पाएगी कि महायोजना 2031 का स्वरूप क्या होगा।
महायोजना 2031 के प्रस्ताव की फाइल वर्ष 2016 से ही चक्कर काट रही है। तीन बार कोई न कोई आपत्ति लगाकर शासन से फाइल वापस आ जाती रही। आखिरी बार इसमें तीन बिंदुओं पर आपत्ति लगाई गई थी। जिसमें कहा गया था कि भूमि प्रकार की जानकारी नहीं दर्शाई गई है। बीडीए में शहर से सटे कुल 217 गांव शामिल हैं। शासन से कहा गया है कि शहरी विस्तार से संबंधित गांवों में सरकारी एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि का स्पष्ट उल्लेख हो। मास्टर प्लान में तालाब, कब्रिस्तान, चारागाह, बंजर एवं अन्य किस्म की सरकारी भूमि इंगित होनी चाहिए।
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इसके अलावा देवापार, सोनूपार और बेलवाडाड़ को प्राधिकरण में शामिल न करने को लेकर भी शासन की टिप्पणी आई थी। कहा गया कि इन गांवों में महायोजना में शामिल करने के साथ वहां की भौगोलिक स्थिति का विवरण भी दिया जाए। धरातलीय स्थिति के उल्लेख से ही विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी। तीसरी आपत्ति मास्टर प्लान-2031 में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के उल्लेख न होने को लेकर थी। जिसमें बीडीए को स्पष्ट करना था कि नदी के तटवर्ती गांव कौन से है, जहां बाढ़ की संभावना रहती है। इन्हें महायोजना में अलग केटेगरी में रखना है। इसके अलावा बड़े जलाशय, पोखरे भी मास्टर प्लान में अलग से चिह्नित किए जाएंगे। राजस्व अभिलेखों से इसका उल्लेख होना जरूरी है। इन सभी आपत्तियों के निस्तारण के बाद स्वीकृति की राह बनी।
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क्या है ग्रीन जोन और ग्रीन बेल्ट
- ऐसी जमीनें जो राजस्व अभिलेख में सरकारी एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि के रूप में दर्ज है, उन्हें ग्रीन जोन के रूप में चिह्नित किया गया है। इसमें बंजर, चारागाह, पार्क, चकमार्ग, तालाब, पोखरे एवं अन्य जलाशय शामिल है। यहां निर्माण प्रतिबंधित है। इसके अलावा हाईवे के दोनों तरफ 87.5 मीटर तक तथा कुआनो नदी के दोनों तरफ 80 मीटर तक ग्रीन बेल्ट निर्धारित है। यहां भी निर्माण प्रतिबंधित है।
ग्रीन बेल्ट की चौड़ाई होगी 20 मीटर
- एनएचएआई के अधीन फोरलेन की कुल चौड़ाई 75 मीटर है। सड़क के मध्य से 37.5 मीटर दोनों तरफ सड़क के लिए जमीन अधिग्रहित है। इसके बाद 50 मीटर चौड़ाई में ग्रीन बेल्ट घोषित है। यानी काफी बड़ा भू-भाग इस मानक की वजह से प्रभावित है। नए प्रस्ताव में ग्रीन बेल्ट की चौड़ाई 50 मीटर से घटाकर 20 मीटर की गई है। कुल 30 मीटर का दायरा कम किया गया है।
विवाद की कम रहेगी गुंजाइश
- ग्रीन लैंड के चक्कर में काश्तकारों और बीडीए के बीच अक्सर विवाद सामने आता गया। काश्तकार अपनी जमीन में निर्माण कराना चाहते तो बीडीए ग्रीन लैंड का अडंगा खड़ा कर देता था। यदि कोई बिना मानचित्र के निर्माण कराते हुए मिल जाता तो उसे जुर्माना अदा करना पड़ता था। इसको लेकर कई बार हंगामा भी हो चुका है। बीडीए अधिकारियों पर रिश्वत मांगने तक के आरोप लगे। बहरहाल नए मास्टर प्लान के लागू हो जाने से यह दुश्वारी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
तीन केटेगरी में पास होता है नक्शा
- बीडीए से तीन केटेगरी का नक्शा पास किया जाता है। यहां ज्यादा चलन हाई रिस्क वाले नक्शे का है। इसमें छोटे साइज वाले भूखंड पर मकान का नक्शा पास कराया जाता है। जिनका क्षेत्रफल बिस्वा में होता है। इसके बाद निवेश मित्रा कटेगरी का नक्शा पास हो रहा है। यह पूरी तरह कामर्शियल होता है। इसमें होटल, रेस्तरां, दुकान, माल, मैरेज हॉल जैसे निर्माण किए जाते हैं। तीसरी केटेगरी लो रिस्क है। इसका चलन यहां न के बराबर है। इसमें बड़े भू-भाग शामिल होते हैं। जिनमें समूह में आवासीय नक्शे पास किए जाते हैं। अमूमन रियल स्टेट कारोबारियों द्वारा लो रिस्क के नक्शे बनवाए जाते हैं। यहां ऐसे कारोबारियों की संख्या नहीं है।