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पड़िया हैचरी में तैयार होंगे बैकरी मछली के बच्चे
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पड़िया हैचरी में तैयार होंगे बैकरी मछली के बच्चे
- 16.22 लाख रुपये से बनवाया गया है तालाब
- राप्ती मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र पड़िया पर जल्द मिलने लगेंगे बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले के रुधौली मार्ग स्थित पड़िया हैचरी में अब बैकरी (पंगेशियस) मछली के बच्चों के तैयार किया जाएगा। इसकी तैयारी करीब-करीब पूरी हो गई है। इस हैचरी में बैकरी के 12 लाख फिंगरलिंग (बच्चे) तैयार कर मछली पालक किसानों को दिया जाएगा।
भारत सरकार के निर्देश पर पड़िया हैचरी को उप्र मत्स्य विकास निगम ने बेहतर तालाब व हाईटेक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए 16.22 लाख रुपये जारी किया था। इसके तहत ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) ने यहां तालाब का निर्माण करवा दिया गया है और जरूरी संशाधन भी लगाए जा रहे हैं। उम्मीद है कि अगस्त से इस नर्सरी से मत्स्य पालकों को फिंगरलिंग (बच्चे) मिलने शुरू हो जाएंगे।
पड़िया स्थित राप्ती मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र पर मंडल का पहला पंगेशियस तालाब स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए आरईडी ने दो हेक्टेयर जमीन में तालाब बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इस पर शासन ने धन मुहैया करवा दिया है। इसके लिए एक बार निविदा कुछ खामियों के कारण निरस्त हो गया। नतीजतन दोबारा टेंडर किए जाने की प्रक्रिया में देरी हुई है। आरईडी के अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार के अनुसार टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के कारण दो माह का विलंब हुआ है। अब यहां अत्याधुनिक संसाधन स्थापित किए जा रहे हैं। जल्द ही इसका लाभ मत्स्य पालकों को मिलने लगेगा।
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पश्चिम बंगाल से बच्चे आकर बनेंगे फिंगरलिंग
मत्स्य पालक विकास अभिकरण के प्रभारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी संदीप कुमार वर्मा ने बताया कि पड़िया हैचरी में पश्चिम बंगाल की प्रमाणित हैचरियों से बच्चे मंगाए जाएंगे। उन्हें 70 से 80 मिमी लंबे फिंगरलिंग में तैयार कर मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराया जाएगा।
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छह माह में बढ़ जाते हैं बच्चे
पंगेशियस मछली प्रोटीन की प्रचुरता के कारण जहां पौष्टिक मानी जाती है, वहीं सस्ते दामों पर भी उपलब्ध होती है। इसके बच्चे चार से पांच महीने में 700-800 ग्राम के हो जाते हैं। इसलिए हर छह माह में इनको तैयार कर बेचा जा सकता है। एक हेक्टेयर में तकरीबन तीन लाख फिंगरलिंग को तैयार करने की व्यवस्था होती है। इस तरह साल में प्रति हेक्टेयर छह लाख व दो हेक्टेयर में तकरीबन 12 लाख फिंगरलिंग तैयार किया जा सकेगा।
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ऑक्सीजन, फिल्टर मशीन व ब्लोअर का हो रहा इंतजाम
मत्स्य विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संदीप वर्मा ने बताया कि तालाब में मछलियों को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन व पानी को शुद्ध करने के लिए फिल्टर मशीन का भी इंतजाम किया जाएगा। इसके अलावा हर वक्त तापमान को 23-24 डिग्री सेल्सियस तक नियंत्रित करने के लिए सर्दी में ब्लोअर की व्यवस्था बनाई जाएगी। तेजी से पानी के फौव्वारे निकलने का इंतजाम किया जाएगा, ताकि बच्चे तेजी से विकसित हो सकें।
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- 16.22 लाख रुपये से बनवाया गया है तालाब
- राप्ती मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र पड़िया पर जल्द मिलने लगेंगे बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले के रुधौली मार्ग स्थित पड़िया हैचरी में अब बैकरी (पंगेशियस) मछली के बच्चों के तैयार किया जाएगा। इसकी तैयारी करीब-करीब पूरी हो गई है। इस हैचरी में बैकरी के 12 लाख फिंगरलिंग (बच्चे) तैयार कर मछली पालक किसानों को दिया जाएगा।
भारत सरकार के निर्देश पर पड़िया हैचरी को उप्र मत्स्य विकास निगम ने बेहतर तालाब व हाईटेक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए 16.22 लाख रुपये जारी किया था। इसके तहत ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) ने यहां तालाब का निर्माण करवा दिया गया है और जरूरी संशाधन भी लगाए जा रहे हैं। उम्मीद है कि अगस्त से इस नर्सरी से मत्स्य पालकों को फिंगरलिंग (बच्चे) मिलने शुरू हो जाएंगे।
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पड़िया स्थित राप्ती मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र पर मंडल का पहला पंगेशियस तालाब स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए आरईडी ने दो हेक्टेयर जमीन में तालाब बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इस पर शासन ने धन मुहैया करवा दिया है। इसके लिए एक बार निविदा कुछ खामियों के कारण निरस्त हो गया। नतीजतन दोबारा टेंडर किए जाने की प्रक्रिया में देरी हुई है। आरईडी के अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार के अनुसार टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के कारण दो माह का विलंब हुआ है। अब यहां अत्याधुनिक संसाधन स्थापित किए जा रहे हैं। जल्द ही इसका लाभ मत्स्य पालकों को मिलने लगेगा।
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पश्चिम बंगाल से बच्चे आकर बनेंगे फिंगरलिंग
मत्स्य पालक विकास अभिकरण के प्रभारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी संदीप कुमार वर्मा ने बताया कि पड़िया हैचरी में पश्चिम बंगाल की प्रमाणित हैचरियों से बच्चे मंगाए जाएंगे। उन्हें 70 से 80 मिमी लंबे फिंगरलिंग में तैयार कर मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराया जाएगा।
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छह माह में बढ़ जाते हैं बच्चे
पंगेशियस मछली प्रोटीन की प्रचुरता के कारण जहां पौष्टिक मानी जाती है, वहीं सस्ते दामों पर भी उपलब्ध होती है। इसके बच्चे चार से पांच महीने में 700-800 ग्राम के हो जाते हैं। इसलिए हर छह माह में इनको तैयार कर बेचा जा सकता है। एक हेक्टेयर में तकरीबन तीन लाख फिंगरलिंग को तैयार करने की व्यवस्था होती है। इस तरह साल में प्रति हेक्टेयर छह लाख व दो हेक्टेयर में तकरीबन 12 लाख फिंगरलिंग तैयार किया जा सकेगा।
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ऑक्सीजन, फिल्टर मशीन व ब्लोअर का हो रहा इंतजाम
मत्स्य विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संदीप वर्मा ने बताया कि तालाब में मछलियों को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन व पानी को शुद्ध करने के लिए फिल्टर मशीन का भी इंतजाम किया जाएगा। इसके अलावा हर वक्त तापमान को 23-24 डिग्री सेल्सियस तक नियंत्रित करने के लिए सर्दी में ब्लोअर की व्यवस्था बनाई जाएगी। तेजी से पानी के फौव्वारे निकलने का इंतजाम किया जाएगा, ताकि बच्चे तेजी से विकसित हो सकें।