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Basti News: मांगों पर अड़े लेखपाल, अतिरिक्त काम का बहिष्कार
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फोटो परिचय भानपुर तहसील मे मांगो को लेकर प्रदर्शन करते लेखपाल संवाद
बस्ती। आठ सूत्रीय मांगों पर शासन और राजस्व परिषद की ओर से प्रभावी कार्रवाई न होने से जिले के लेखपाल आंदोलन की राह पर हैं। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के आह्वान पर लेखपालों ने 22 सितंबर से अतिरिक्त हलकों का कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है।
कई तहसीलों में अतिरिक्त हलकों के बस्ते तहसील अथवा राजस्व निरीक्षक कार्यालय में जमा करा दिए गए हैं। इससे आय, जाति, निवास, वरासत, ईडब्ल्यूएस, अंश निर्धारण, नाम व अंश संशोधन समेत राजस्व से जुड़े कई काम प्रभावित हुए हैं। बुधवार को लेखपालों ने तहसीलों में धरना-प्रदर्शन कर मांगों के समर्थन में आवाज उठाई। साथ ही चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन और व्यापक किया जाएगा। रुधौली संवाद के अनुसार, तहसील में लेखपालों ने अतिरिक्त 31 हलकों के राजस्व अभिलेख तहसील प्रशासन को सौंप दिए हैं। इससे करीब 121 ग्राम पंचायतों में राजस्व संबंधी काम प्रभावित हैं। खरदेऊरा निवासी विनोद सिंह ने बताया कि उन्हें खेत के अंश निर्धारण का काम कराना था, लेकिन अतिरिक्त प्रभार वाले हलके के लेखपाल ने कार्य करने से मना कर दिया। बढ़या राजा निवासी राजेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी बेटी के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जरूरी है, लेखपालों के हड़ताल के कारण प्रमाणपत्र जारी कराने में दिक्कत हो रही है।
भानपुर संवाद के अनुसार, तहसील में 36 लेखपालों ने 46 गांवों के बस्ते राजस्व निरीक्षक कार्यालय में जमा किए हैं। इससे इन गांवों के काश्तकारों को तहसील से बैरंग लौटना पड़ रहा है। जमदाशाही निवासी शाहिद रजा बिछिया गांव में जमीन की वरासत के मामले में तहसील पहुंचे थे, लेकिन कार्य नहीं हो सका। हसनापुर निवासी नंदलाल यादव और आहर निवासी जदुनाथ ने भी नाम और खतौनी संशोधन संबंधी काम प्रभावित होने की बात कही। हर्रैया संवाद के अनुसार, लेखपालों ने अतिरिक्त हलकों के पूर्ण बहिष्कार का निर्णय लिया है। संघ ने एसडीएम के माध्यम से मुख्य सचिव को भेजे ज्ञापन में आठ सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें अंतर्मंडलीय स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल खोलना, वर्ष 2025-26 की लंबित पदोन्नति सूची जारी करना और वर्ष 2024 में नियुक्त लेखपालों की परीक्षा का परिणाम घोषित कर प्रमाणपत्र देने की मांग प्रमुख है।
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कई तहसीलों में अतिरिक्त हलकों के बस्ते तहसील अथवा राजस्व निरीक्षक कार्यालय में जमा करा दिए गए हैं। इससे आय, जाति, निवास, वरासत, ईडब्ल्यूएस, अंश निर्धारण, नाम व अंश संशोधन समेत राजस्व से जुड़े कई काम प्रभावित हुए हैं। बुधवार को लेखपालों ने तहसीलों में धरना-प्रदर्शन कर मांगों के समर्थन में आवाज उठाई। साथ ही चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन और व्यापक किया जाएगा। रुधौली संवाद के अनुसार, तहसील में लेखपालों ने अतिरिक्त 31 हलकों के राजस्व अभिलेख तहसील प्रशासन को सौंप दिए हैं। इससे करीब 121 ग्राम पंचायतों में राजस्व संबंधी काम प्रभावित हैं। खरदेऊरा निवासी विनोद सिंह ने बताया कि उन्हें खेत के अंश निर्धारण का काम कराना था, लेकिन अतिरिक्त प्रभार वाले हलके के लेखपाल ने कार्य करने से मना कर दिया। बढ़या राजा निवासी राजेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी बेटी के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जरूरी है, लेखपालों के हड़ताल के कारण प्रमाणपत्र जारी कराने में दिक्कत हो रही है।
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भानपुर संवाद के अनुसार, तहसील में 36 लेखपालों ने 46 गांवों के बस्ते राजस्व निरीक्षक कार्यालय में जमा किए हैं। इससे इन गांवों के काश्तकारों को तहसील से बैरंग लौटना पड़ रहा है। जमदाशाही निवासी शाहिद रजा बिछिया गांव में जमीन की वरासत के मामले में तहसील पहुंचे थे, लेकिन कार्य नहीं हो सका। हसनापुर निवासी नंदलाल यादव और आहर निवासी जदुनाथ ने भी नाम और खतौनी संशोधन संबंधी काम प्रभावित होने की बात कही। हर्रैया संवाद के अनुसार, लेखपालों ने अतिरिक्त हलकों के पूर्ण बहिष्कार का निर्णय लिया है। संघ ने एसडीएम के माध्यम से मुख्य सचिव को भेजे ज्ञापन में आठ सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें अंतर्मंडलीय स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल खोलना, वर्ष 2025-26 की लंबित पदोन्नति सूची जारी करना और वर्ष 2024 में नियुक्त लेखपालों की परीक्षा का परिणाम घोषित कर प्रमाणपत्र देने की मांग प्रमुख है।
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