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स्कूलों की मान्यता में चल रहा खेल
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Sun, 03 Jul 2016 10:45 PM IST
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स्कूलों की मान्यता में चल रहा खेल
- फोटो : अमर उजाला
बेसिक शिक्षा विभाग में स्कूलों को मान्यता देने के मामले में मानकों का ध्यान नहीं रखा गया है। मान्यता देने से पहले एनबीसी यानि नेशनल बिल्डिगं कोड को भी नहीं देखा। मान्यता देने के इस खेल में खंड शिक्षा अधिकारियों को और मानक का सही होने का प्रमाण पत्र देने वाले सिंचाई, पीडब्लूडी और नहर विभाग के अवर अभियंताओं की बड़ी भूमिका रही है। इस वर्ष 37 ऐसे स्कूलों को मान्यता दे दी गई जो कहीं भी मानक पर खरा नहीं उतरते हैं।
मान्यता देने के बाद कभी स्कूलों की जांच तक नहीं की गई। तीन सौ से अधिक स्कूलों को मान्यता देने की तैयारी हो रहा है। बीएसए मनिराम सिंह ने बताया कि उन्होंने अभी हाल ही में ज्वाइन किया है, इस लिए यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। बताया कि अगर वाकई मानक के विपरीत मान्यता दी गई तो इसकी जांच कराकर इसके दोषियों के विरुद्घ कार्रवाई की जाएगी। मान्यता निरस्त करने के साथ संचालक के विरुद्घ विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
परिषदीय स्कूलों को मान्यता देने के मामले में सरकार का नियम कठिन हैं। इसके लिए एनबीसी को मानक बनाया है। नियमानुसार अगर कोई स्कूल नेशनल बिल्डिगं के तहत निर्माण नहीं हुआ है तो उसे मान्यता नहीं दी जा सकती है। इसके पीछे सरकार की मंशा बच्चों के जीवन को सुरक्षित करने और उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराने का है। मगर इस मामले में विभाग निरंतर अनदेखी करता आ रहा है। अनियमित तरीके से मान्यता देने के मामले में सबसे पहले खंड शिक्षा अधिकारी कटघरे में आते हैं, क्यों कि इन्हीं की ही रिपोर्ट पर किसी भी स्कूल को मान्यता दी जाती है। उसके बाद पीडब्लूडी, सिंचाई और नहर विभाग के अवर अभियंताओं को दोषी माना जाता है। यह तीनों मिलकर भवन का निर्माण एनबीसी के तहत होने का प्रमाण पत्र देते हैं।
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मान्यता देने के बाद कभी स्कूलों की जांच तक नहीं की गई। तीन सौ से अधिक स्कूलों को मान्यता देने की तैयारी हो रहा है। बीएसए मनिराम सिंह ने बताया कि उन्होंने अभी हाल ही में ज्वाइन किया है, इस लिए यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। बताया कि अगर वाकई मानक के विपरीत मान्यता दी गई तो इसकी जांच कराकर इसके दोषियों के विरुद्घ कार्रवाई की जाएगी। मान्यता निरस्त करने के साथ संचालक के विरुद्घ विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
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परिषदीय स्कूलों को मान्यता देने के मामले में सरकार का नियम कठिन हैं। इसके लिए एनबीसी को मानक बनाया है। नियमानुसार अगर कोई स्कूल नेशनल बिल्डिगं के तहत निर्माण नहीं हुआ है तो उसे मान्यता नहीं दी जा सकती है। इसके पीछे सरकार की मंशा बच्चों के जीवन को सुरक्षित करने और उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराने का है। मगर इस मामले में विभाग निरंतर अनदेखी करता आ रहा है। अनियमित तरीके से मान्यता देने के मामले में सबसे पहले खंड शिक्षा अधिकारी कटघरे में आते हैं, क्यों कि इन्हीं की ही रिपोर्ट पर किसी भी स्कूल को मान्यता दी जाती है। उसके बाद पीडब्लूडी, सिंचाई और नहर विभाग के अवर अभियंताओं को दोषी माना जाता है। यह तीनों मिलकर भवन का निर्माण एनबीसी के तहत होने का प्रमाण पत्र देते हैं।
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