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Basti News: उमंग, उल्लास के साथ मना गुरु ग्रंथ साहिब का पहला प्रकाश पर्व
Sun, 17 Sep 2023 02:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 17 Sep 2023 02:01 AM IST
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शबद कीर्तन करते ज्ञानी
बस्ती। श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 419वें प्रकाश पर्व के पहले दिन गुरुद्वारों में कीर्तन दरबार सजा। इस दौरान उमंग एवं उल्लास के साथ श्रद्धालुओं ने गुरु ग्रंथ साहिब के महिमा का बखान किया। भजन, सबद, कीर्तन की धूम रही। गुरुद्वारों में लंगर का आयोजन हुआ।
कंपनीबाग और गांधीनगर गुरुद्वारा में शनिवार को भोर से ही सिख संगत का गुरु चरणों में माथा टेकने का रस्म शुरू हुआ तो फिर थमने का नाम नहीं लिया। गुरु द्वारा कंपनी बाग में सबसे पहले केसरी निशान की सेवा सरदार सरबजीत सिंह मल्होत्रा परिवार की तरफ से की गई। यहां मगहर से आए कीर्तन प्रेमी रागी जत्था सिंह साहेब ने दरबार सजाया।
पूर्वांचल सिख वेलफेयर सोसाइटी के प्रदेश संयोजक सरदार जगबीर सिंह ने कहा गुरु ग्रंथ साहिब के आगे माथा टेकने के बाद ही किसी अच्छे कार्यक्रम की शुरुआत होती है। गुरु ग्रंथ साहिब की रचना पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में दरबार साहिब अमृतसर में की। तब पहला प्रकाश पर्व मनाया गया था। गुरु ग्रंथ साहिब केवल एक क्षेत्र, एक धर्म का पवित्र ग्रंथ नहीं है बल्कि मानवता की स्थापना के लिए सर्व सांझा ग्रंथ है। मुख्य सेवादार सरदार हरी सिंह, बबलू, दिल ज्योत सिंह, दिव्यजोत सिंह रहे। इनके परिवार की तरफ से गुरु के लंगर की सेवा भी की गई।
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कंपनीबाग और गांधीनगर गुरुद्वारा में शनिवार को भोर से ही सिख संगत का गुरु चरणों में माथा टेकने का रस्म शुरू हुआ तो फिर थमने का नाम नहीं लिया। गुरु द्वारा कंपनी बाग में सबसे पहले केसरी निशान की सेवा सरदार सरबजीत सिंह मल्होत्रा परिवार की तरफ से की गई। यहां मगहर से आए कीर्तन प्रेमी रागी जत्था सिंह साहेब ने दरबार सजाया।
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पूर्वांचल सिख वेलफेयर सोसाइटी के प्रदेश संयोजक सरदार जगबीर सिंह ने कहा गुरु ग्रंथ साहिब के आगे माथा टेकने के बाद ही किसी अच्छे कार्यक्रम की शुरुआत होती है। गुरु ग्रंथ साहिब की रचना पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में दरबार साहिब अमृतसर में की। तब पहला प्रकाश पर्व मनाया गया था। गुरु ग्रंथ साहिब केवल एक क्षेत्र, एक धर्म का पवित्र ग्रंथ नहीं है बल्कि मानवता की स्थापना के लिए सर्व सांझा ग्रंथ है। मुख्य सेवादार सरदार हरी सिंह, बबलू, दिल ज्योत सिंह, दिव्यजोत सिंह रहे। इनके परिवार की तरफ से गुरु के लंगर की सेवा भी की गई।

शबद कीर्तन करते ज्ञानी
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