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Basti News: पकड़ा गया आतंक का पर्याय बना खूंखार लंगूर
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महादेवा क्षेत्र में आतंक का पर्याय बने बंदर को मंकी कैचरों ने पकड़ लिया। संवाद
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- सदर ब्लाॅक के ठेकनापार गांव में घेरकर मंकी कैचरों ने पकड़ा
- दो महीने में 50 से ज्यादा लोगों पर हमला कर चुका है
संवाद न्यूज एजेंसी
महादेवा। दो महीने से मुंडेरवा-महादेवा क्षेत्र में ग्रामीणों लिए खौफ का पर्याय बने लंगूर को आखिरकार पकड़ लिया गया। मंकी कैचर टीम ने सुबह से पीछा करते हुए उसे जाल में फंसाया। लंगूर पकड़ने वालों का कहना है कि इसे वे कैंपियरगंज जंगल में ले जाकर छोड़ दिया गया है। बता दें कि इस लंगूर ने बनकटी, महादेवा, मुंडेरवा व लालगंज क्षेत्र के 50 गांवों में आतंक फैला रखा था, और 50 से ज्यादा लोगों को वह घायल कर चुका है।
क्षेत्र के ओरई गांव के फौजी दीपक मौर्य छुट्टी लेकर आए थे। तीन दिन पहले फौजी तथा उनकी भाभी को लंगूर ने काट लिया था। उसी दिन गांव के ही गुरु लाल सहाय श्रीवास्तव एवं नंद उपाध्याय को भी काटा। इस घटना के बाद पूरे गांव के लोगों ने चंदा लगाकर मंकी कैचर बुलवाया। मुजहना निवासी मोहम्मद अली और मोहम्मद उल्ला शनिवार को गांव पहुंचे। सुबह से शाम तक लंगूर की घेराबंदी करते रहे। आखिरकार सदर ब्लाॅक के ठेकनापार गांव में उसे घेर लिया, जिसके बाद जाल से उसे पकड़ लिया।
मोहम्मद अली और मोहम्मद उल्ला ने बताया कि लंगूर को कैंपियरगंज के जंगल में छोड़ दिया गया।
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- दो महीने में 50 से ज्यादा लोगों पर हमला कर चुका है
संवाद न्यूज एजेंसी
महादेवा। दो महीने से मुंडेरवा-महादेवा क्षेत्र में ग्रामीणों लिए खौफ का पर्याय बने लंगूर को आखिरकार पकड़ लिया गया। मंकी कैचर टीम ने सुबह से पीछा करते हुए उसे जाल में फंसाया। लंगूर पकड़ने वालों का कहना है कि इसे वे कैंपियरगंज जंगल में ले जाकर छोड़ दिया गया है। बता दें कि इस लंगूर ने बनकटी, महादेवा, मुंडेरवा व लालगंज क्षेत्र के 50 गांवों में आतंक फैला रखा था, और 50 से ज्यादा लोगों को वह घायल कर चुका है।
क्षेत्र के ओरई गांव के फौजी दीपक मौर्य छुट्टी लेकर आए थे। तीन दिन पहले फौजी तथा उनकी भाभी को लंगूर ने काट लिया था। उसी दिन गांव के ही गुरु लाल सहाय श्रीवास्तव एवं नंद उपाध्याय को भी काटा। इस घटना के बाद पूरे गांव के लोगों ने चंदा लगाकर मंकी कैचर बुलवाया। मुजहना निवासी मोहम्मद अली और मोहम्मद उल्ला शनिवार को गांव पहुंचे। सुबह से शाम तक लंगूर की घेराबंदी करते रहे। आखिरकार सदर ब्लाॅक के ठेकनापार गांव में उसे घेर लिया, जिसके बाद जाल से उसे पकड़ लिया।
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मोहम्मद अली और मोहम्मद उल्ला ने बताया कि लंगूर को कैंपियरगंज के जंगल में छोड़ दिया गया।