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मिनी पीआईसीयू को चिकित्सक का इंतजार
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मिनी पीआईसीयू में बाल रोग चिकित्सक नहीं
गौर (बस्ती)। सीएचसी गौर पर बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने से अस्पताल पर बच्चों के लिए बना मिनी पीआईसीयू कक्ष बेकार साबित हो रहा है। साथ ही पिछले एक दशक से महिला चिकित्सक की तैनाती न होने से गर्भवती महिलाओं सहित मरीजों को दूसरे अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
गौर क्षेत्र की आबादी करीब 2.28 लाख है। लेकिन, अस्पताल में डॉक्टरों की कमी एवं संसाधनों के अभाव में मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। तीस बेड का सीएचसी गौर का निर्माण लगभग 12 वर्ष से अधिक का समय बीत गया। अब तक किसी महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई। यही नहीं, इस अस्पताल पर न तो एक्स- रे मशीन है और न ही अल्ट्रासाउंड लगाया गया। वर्ष 2019 में अस्पताल पर बच्चों के लिए तीन बेड का वेंटीलेटर युक्त मिनी पीआईसीयू (पिडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) बनाया गया। कुछ दिन बाद बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सरदार मेहंदी की नियुक्ति हुई, जहां लोगों को इलाज मिलना भी शुरू हुआ। लेकिन, जुलाई 2021 में उनका स्थानांतरण लखनऊ हो गया। उसके बाद यह अस्पताल बाल रोग विशेषज्ञ विहीन हो गया। इसके साथ ही जुलाई में अस्पताल पर तैनात लैब टेक्नीशियन का स्थानांतरण भी गैर जनपद हो गया। जिसके चलते अस्पताल पर मरीजों को समुचित जांच की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. अमरजीत बरई ने बताया कि अस्पताल पर डॉ. रजनीश श्रीवास्तव सहित कुल 55 स्टाफ हैं। आबादी के हिसाब से जो सुविधाएं अस्पताल में होनी चाहिए वह नहीं है। प्रतिदिन लगभग 15 से 20 बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। गंभीर स्थिति में उन्हें 25 किमी दूर जिला अस्पताल के लिए रेफर करना पड़ता है। स्टाफ नर्स के सहारे महिलाओं का इलाज कराया जा रहा है। गंभीर बीमारी होने पर जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है।
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बोले ग्रामीण
केसरई गांव की महिला पिंका यादव ने बताया कि अस्पताल पर बच्चों के इलाज के लिए तीन बेड का वेंटीलेटर युक्त मिनी पीआईसीयू बनाया गया है, लेकिन पिछले आठ माह से डॉक्टर की तैनाती न होने से बच्चों का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है। छोटी सी बीमारी के लिए क्षेत्र के लोगों को 25 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल तक दौड़ लगानी पड़ रही है।
पौनी जप्ती गांव के कमलेश कुमार ने बताया कि अस्पताल पर जांच की कोई सुविधा नहीं है। लैब टेक्नीशियन की तैनाती न होने से मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है। कहने को तो सीएचसी है लेकिन अभी तक अस्पताल पर अल्ट्रासाउंड और एक्सरे मशीन की कोई सुविधा नहीं है।
धनघटा गांव की महिला सुधा ने बताया कि अस्पताल पर महिला डॉक्टर की तैनाती न होने से सबसे ज्यादा परेशानी महिला मरीजों को होती है। स्टाफ नर्स के सहारे महिलाओं की डिलीवरी कराई जाती है। कभी- कभार स्थिति बिगड़ने पर जच्चा-बच्चा दोनों को रेफर कर दिया जाता है।
केसरई गांव के चिंता यादव ने बताया कि गर्मी का मौसम धीरे-धीरे बढ़ रहा है। ओपीडी में मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। अस्पताल पर बाल रोग विशेषज्ञ न होने से सबसे ज्यादा बच्चों के इलाज को लेकर अभिभावकों में चिंता है।
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गौर (बस्ती)। सीएचसी गौर पर बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने से अस्पताल पर बच्चों के लिए बना मिनी पीआईसीयू कक्ष बेकार साबित हो रहा है। साथ ही पिछले एक दशक से महिला चिकित्सक की तैनाती न होने से गर्भवती महिलाओं सहित मरीजों को दूसरे अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
गौर क्षेत्र की आबादी करीब 2.28 लाख है। लेकिन, अस्पताल में डॉक्टरों की कमी एवं संसाधनों के अभाव में मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। तीस बेड का सीएचसी गौर का निर्माण लगभग 12 वर्ष से अधिक का समय बीत गया। अब तक किसी महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई। यही नहीं, इस अस्पताल पर न तो एक्स- रे मशीन है और न ही अल्ट्रासाउंड लगाया गया। वर्ष 2019 में अस्पताल पर बच्चों के लिए तीन बेड का वेंटीलेटर युक्त मिनी पीआईसीयू (पिडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) बनाया गया। कुछ दिन बाद बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सरदार मेहंदी की नियुक्ति हुई, जहां लोगों को इलाज मिलना भी शुरू हुआ। लेकिन, जुलाई 2021 में उनका स्थानांतरण लखनऊ हो गया। उसके बाद यह अस्पताल बाल रोग विशेषज्ञ विहीन हो गया। इसके साथ ही जुलाई में अस्पताल पर तैनात लैब टेक्नीशियन का स्थानांतरण भी गैर जनपद हो गया। जिसके चलते अस्पताल पर मरीजों को समुचित जांच की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है।
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सीएचसी अधीक्षक डॉ. अमरजीत बरई ने बताया कि अस्पताल पर डॉ. रजनीश श्रीवास्तव सहित कुल 55 स्टाफ हैं। आबादी के हिसाब से जो सुविधाएं अस्पताल में होनी चाहिए वह नहीं है। प्रतिदिन लगभग 15 से 20 बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। गंभीर स्थिति में उन्हें 25 किमी दूर जिला अस्पताल के लिए रेफर करना पड़ता है। स्टाफ नर्स के सहारे महिलाओं का इलाज कराया जा रहा है। गंभीर बीमारी होने पर जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है।
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बोले ग्रामीण
केसरई गांव की महिला पिंका यादव ने बताया कि अस्पताल पर बच्चों के इलाज के लिए तीन बेड का वेंटीलेटर युक्त मिनी पीआईसीयू बनाया गया है, लेकिन पिछले आठ माह से डॉक्टर की तैनाती न होने से बच्चों का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है। छोटी सी बीमारी के लिए क्षेत्र के लोगों को 25 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल तक दौड़ लगानी पड़ रही है।
पौनी जप्ती गांव के कमलेश कुमार ने बताया कि अस्पताल पर जांच की कोई सुविधा नहीं है। लैब टेक्नीशियन की तैनाती न होने से मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है। कहने को तो सीएचसी है लेकिन अभी तक अस्पताल पर अल्ट्रासाउंड और एक्सरे मशीन की कोई सुविधा नहीं है।
धनघटा गांव की महिला सुधा ने बताया कि अस्पताल पर महिला डॉक्टर की तैनाती न होने से सबसे ज्यादा परेशानी महिला मरीजों को होती है। स्टाफ नर्स के सहारे महिलाओं की डिलीवरी कराई जाती है। कभी- कभार स्थिति बिगड़ने पर जच्चा-बच्चा दोनों को रेफर कर दिया जाता है।
केसरई गांव के चिंता यादव ने बताया कि गर्मी का मौसम धीरे-धीरे बढ़ रहा है। ओपीडी में मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। अस्पताल पर बाल रोग विशेषज्ञ न होने से सबसे ज्यादा बच्चों के इलाज को लेकर अभिभावकों में चिंता है।