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Basti News: मंदिरों में उमड़ी मातारानी के भक्तों की भीड़
Thu, 23 Mar 2023 01:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 23 Mar 2023 01:06 AM IST
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आवास विकास कॉलोनी गेट पर स्थित दुर्गा मंदिर में पूजा करतीं महिलाएं।
बस्ती। चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा पर मां भगवती का आगमन होते ही देवीभक्त भाव-विभोर हो गए। चारों ओर भक्ति की बयार बह रही है। नवरात्र के पहले दिन ‘शैलपुत्री’ की आराधना के साथ नवरात्र व्रत की शुरुआत हुई। जगह-जगह श्रीदुर्गा सप्तशती पाठ का अनुष्ठान शुरू हो गया। लोग दिन भर घरों में कलश स्थापना कराते रहे। लोग आदि शक्ति की आराधना में जुट गए हैं। नवरात्र के पहले दिन देवी मंदिरों में भोर से ही भक्तों का तांता लग गया था। सबसे ज्यादा रेलवे स्टेशन के पास के काली मंदिर और आवास विकास मोड़ के काली माता मंदिर पर भीड़ देखी गई। पूजा की थाल लेकर छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़े तक मां की पूजा में तल्लीन हो गए। गृहणियां कलश पूजन और फलाहार के इंतजाम में व्यस्त रहीं।
पंडित मोहित मिश्र के मुताबिक, हिमालय के घर पैदा होने की वजह इस देवी का नाम शैलपुत्री पड़ा। इनकी आराधना करते समय दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का स्मरण करना चाहिए। इस दिन योगियों का मन मूलाधार चक्र में होता है। दुर्बल चंद्रमा वाले जातकों को शैलपुत्री की पूजा विशेष फलदायी होती है। शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित माता के मंदिरों पर सुबह से ही पूजन-अर्चन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचने लगी। चहुंओर देवी के जयकारे और घंटे गूंजने लगे। घरों में कलश की स्थापना का कार्यक्रम पूरे दिन चलता रहा। जबकि माता का दर्शन और पाठ का क्रम शुरू हो गया।
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श्रद्धालुओं की कलश स्थापना
- श्रद्धालु स्नान आदि कर घरों से पूजा की थाल फूलों से सजाकर मंदिरों की ओर जाते दिखाई देने लगे। कुछ श्रद्धालुओं ने घर में ही कलश की स्थापना कर पूजा शुरू की।
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बाजार में बढ़ गई रौनक
नवरात्र शुरू होते ही चारों ओर रौनक आ गई है। बाजार में छाई मंदी अचानक दूर हो गई। दुकानों पर ग्राहक नजर आने लगे। इससे पहले दुकानदार खाली बैठे ऊंघते नजर आ रहे थे। मगर नवरात्र शुरू होते ही माहौल खुशनुमा हो गया। खासकर फल, फूल, मेवे की दुकानों पर अधिक गहमागहमी रही।
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पंडित मोहित मिश्र के मुताबिक, हिमालय के घर पैदा होने की वजह इस देवी का नाम शैलपुत्री पड़ा। इनकी आराधना करते समय दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का स्मरण करना चाहिए। इस दिन योगियों का मन मूलाधार चक्र में होता है। दुर्बल चंद्रमा वाले जातकों को शैलपुत्री की पूजा विशेष फलदायी होती है। शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित माता के मंदिरों पर सुबह से ही पूजन-अर्चन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचने लगी। चहुंओर देवी के जयकारे और घंटे गूंजने लगे। घरों में कलश की स्थापना का कार्यक्रम पूरे दिन चलता रहा। जबकि माता का दर्शन और पाठ का क्रम शुरू हो गया।
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श्रद्धालुओं की कलश स्थापना
- श्रद्धालु स्नान आदि कर घरों से पूजा की थाल फूलों से सजाकर मंदिरों की ओर जाते दिखाई देने लगे। कुछ श्रद्धालुओं ने घर में ही कलश की स्थापना कर पूजा शुरू की।
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बाजार में बढ़ गई रौनक
नवरात्र शुरू होते ही चारों ओर रौनक आ गई है। बाजार में छाई मंदी अचानक दूर हो गई। दुकानों पर ग्राहक नजर आने लगे। इससे पहले दुकानदार खाली बैठे ऊंघते नजर आ रहे थे। मगर नवरात्र शुरू होते ही माहौल खुशनुमा हो गया। खासकर फल, फूल, मेवे की दुकानों पर अधिक गहमागहमी रही।