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खाते से जालसाजों ने उड़ाये डेढ़ लाख
Updated Sat, 15 Sep 2018 11:59 PM IST
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खाते से जालसाजों ने उड़ाए डेढ़ लाख
भारतीय स्टेट बैंक भीटीमिश्र की घटना
शाखा प्रबंधक पर लगाया दौड़ाने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
पैकोलिया। क्षेत्र में स्थित भारतीय स्टेट बैंक शाखा भीटी मिश्र में जालसाज सक्रिय हैं। एक पेंशनर के खाते से डेढ़ लाख रुपये रुपये उड़ा दिए। शाखा प्रबंधक से शिकायत करने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।
मामला पैकोलिया थानाक्षेत्र के इटवा कुनगाई गांव निवासी रिटायर्ड शिक्षक विद्यासागर पाठक का है। शिक्षक करीब नब्बे साल के हैं जिससे उनका चलना-फिरना कठिन है। आरोप लगाया है कि बैंक की मिलीभगत से जालसाजों ने उनके खाते से 12 मार्च 18 से 25 जून 18 के बीच 34 बार में एक लाख 45 हजार 85 रुपये निकाल लिए हैं। पेंशनर को रुपये की आवश्यकता पड़ी तो किसी तरह पासबुक लेकर बैंक पहुंचे। पास बुक अपडेट कराने पर रुपये निकलते रहने की जानकारी हुई तो होश उड़ गए। शाखा प्रबंधक को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। 10 अगस्त से अबतक पीड़ित बैंक का चक्कर लगा रहा है। शाखा प्रबंधक दयानन्द ने बताया कि पेंशनर के खाते से रकम जालसाजी करके निकाल ली गई है। शिकायती पत्र पर मैंने बैंक के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा है।
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भारतीय स्टेट बैंक भीटीमिश्र की घटना
शाखा प्रबंधक पर लगाया दौड़ाने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
पैकोलिया। क्षेत्र में स्थित भारतीय स्टेट बैंक शाखा भीटी मिश्र में जालसाज सक्रिय हैं। एक पेंशनर के खाते से डेढ़ लाख रुपये रुपये उड़ा दिए। शाखा प्रबंधक से शिकायत करने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।
मामला पैकोलिया थानाक्षेत्र के इटवा कुनगाई गांव निवासी रिटायर्ड शिक्षक विद्यासागर पाठक का है। शिक्षक करीब नब्बे साल के हैं जिससे उनका चलना-फिरना कठिन है। आरोप लगाया है कि बैंक की मिलीभगत से जालसाजों ने उनके खाते से 12 मार्च 18 से 25 जून 18 के बीच 34 बार में एक लाख 45 हजार 85 रुपये निकाल लिए हैं। पेंशनर को रुपये की आवश्यकता पड़ी तो किसी तरह पासबुक लेकर बैंक पहुंचे। पास बुक अपडेट कराने पर रुपये निकलते रहने की जानकारी हुई तो होश उड़ गए। शाखा प्रबंधक को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। 10 अगस्त से अबतक पीड़ित बैंक का चक्कर लगा रहा है। शाखा प्रबंधक दयानन्द ने बताया कि पेंशनर के खाते से रकम जालसाजी करके निकाल ली गई है। शिकायती पत्र पर मैंने बैंक के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा है।
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