{"_id":"668ee8ecaae4aeb3850624d0","slug":"brother-sister-fight-for-job-basti-news-c-207-1-sgkp1006-120250-2024-07-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: मृतक आश्रित की नौकरी के लिए भाई-बहन में ठनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: मृतक आश्रित की नौकरी के लिए भाई-बहन में ठनी
Thu, 11 Jul 2024 01:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 11 Jul 2024 01:32 AM IST
विज्ञापन
वाल्टरगंज थाने पर हेड कांस्टेबल पद पर तैनात थे मूलचंद
आईजी ने प्रकरण की शुरू कराई जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। वाल्टरगंज थाने पर तैनात रहे दीवान मूलचंद प्रसाद की मौत के बाद मृतक आश्रित कोटे से नौकरी के लिए उनके बेटे और बेटी में खींचतान मची है। मूलचंद की पत्नी चाहती हैं कि उसकी बेटी को नौकरी मिले। जबकि बेटे की दलील है कि बहन शादीशुदा है, इसलिए उसे पिता की आश्रित की नौकरी पाने का कोई हक नहीं है। बुधवार को नौकरी के दावेदार अजय कुमार ने आईजी आरके भारद्वाज से मुलाकात कर प्रकरण को निस्तारित करने का निवेदन किया। आईजी ने बताया कि इसमें नियम के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। सभी पहलुओं पर जांच कराई जा रही है।
गोरखपुर जिले के सहजनवां क्षेत्र के सीहापार निवासी अजय कुमार ने प्रार्थनापत्र दिया है कि उसके पिता मूलचंद प्रसाद की मौत 20 जनवरी 2020 को जनपद बस्ती में कार्यरत रहने के दौरान हो गई थी। अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए उसने कई बार आवेदन पुलिस अधीक्षक को दिया। मगर, उन्होंने समुचित कार्रवाई नहीं की। जनसूचना के माध्यम से उक्त के संबंध में सूचना मांगी गई, लेकिन पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बड़े बाबू भ्रामक सूचना देकर परेशान कर रहे हैं। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से गुमराह किया जाता रहा।
उसका कहना है कि 09 फरवरी को पुलिस मुख्यालय पहुंचने पर जानकारी हुई कि पुलिस भर्ती के लिए आवेदक की बहन पूजा की उपनिरीक्षक पद के लिए लिखित परीक्षा कराई जा चुकी है, लेकिन वह परीक्षा में फेल हो गई है। जबकि मृतक आश्रित की नियुक्ति के लिए परिवार के सभी सदस्यों की अनुमति की आवश्यकता होती है। बिना सहमति के ही परीक्षा करा दी गई। कहना है कि आवेदक की बहन पूजा की फाइल भी पुलिस मुख्यालय में नहीं जमा है।
विज्ञापन
अजय का आरोप है कि उसकी बहन की फिर से लिपिक के लिए आवेदन किया गया है, जो अत्यंत गंभीर विषय है। उक्त प्रकरण में जनपद गोरखपुर से भी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, थाना सहजनवां, क्षेत्राधिकारी, जिलाधिकारी गोरखपुर व अन्य स्तर से भी जांच हुई है। यह मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा। उच्च न्यायालय ने पांच अप्रैल को 06 माह के अंदर निस्तारण करने का आदेश जारी किया है। ऐसे में उचित कार्रवाई की मांग की गई है।
विज्ञापन
आईजी ने प्रकरण की शुरू कराई जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। वाल्टरगंज थाने पर तैनात रहे दीवान मूलचंद प्रसाद की मौत के बाद मृतक आश्रित कोटे से नौकरी के लिए उनके बेटे और बेटी में खींचतान मची है। मूलचंद की पत्नी चाहती हैं कि उसकी बेटी को नौकरी मिले। जबकि बेटे की दलील है कि बहन शादीशुदा है, इसलिए उसे पिता की आश्रित की नौकरी पाने का कोई हक नहीं है। बुधवार को नौकरी के दावेदार अजय कुमार ने आईजी आरके भारद्वाज से मुलाकात कर प्रकरण को निस्तारित करने का निवेदन किया। आईजी ने बताया कि इसमें नियम के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। सभी पहलुओं पर जांच कराई जा रही है।
गोरखपुर जिले के सहजनवां क्षेत्र के सीहापार निवासी अजय कुमार ने प्रार्थनापत्र दिया है कि उसके पिता मूलचंद प्रसाद की मौत 20 जनवरी 2020 को जनपद बस्ती में कार्यरत रहने के दौरान हो गई थी। अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए उसने कई बार आवेदन पुलिस अधीक्षक को दिया। मगर, उन्होंने समुचित कार्रवाई नहीं की। जनसूचना के माध्यम से उक्त के संबंध में सूचना मांगी गई, लेकिन पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बड़े बाबू भ्रामक सूचना देकर परेशान कर रहे हैं। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से गुमराह किया जाता रहा।
विज्ञापन
उसका कहना है कि 09 फरवरी को पुलिस मुख्यालय पहुंचने पर जानकारी हुई कि पुलिस भर्ती के लिए आवेदक की बहन पूजा की उपनिरीक्षक पद के लिए लिखित परीक्षा कराई जा चुकी है, लेकिन वह परीक्षा में फेल हो गई है। जबकि मृतक आश्रित की नियुक्ति के लिए परिवार के सभी सदस्यों की अनुमति की आवश्यकता होती है। बिना सहमति के ही परीक्षा करा दी गई। कहना है कि आवेदक की बहन पूजा की फाइल भी पुलिस मुख्यालय में नहीं जमा है।
विज्ञापन
अजय का आरोप है कि उसकी बहन की फिर से लिपिक के लिए आवेदन किया गया है, जो अत्यंत गंभीर विषय है। उक्त प्रकरण में जनपद गोरखपुर से भी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, थाना सहजनवां, क्षेत्राधिकारी, जिलाधिकारी गोरखपुर व अन्य स्तर से भी जांच हुई है। यह मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा। उच्च न्यायालय ने पांच अप्रैल को 06 माह के अंदर निस्तारण करने का आदेश जारी किया है। ऐसे में उचित कार्रवाई की मांग की गई है।