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बस्ती चीनी मिल चलाने से हाथ खड़े किए
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 26 Nov 2015 12:53 AM IST
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बस्ती। पखवाड़े भर तक आंदोलन करने वाले चीनी मिल के कर्मचारी एक बार फिर
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छले गए हैं, क्योंकि बस्ती चीनी मिल के प्रबंधतंत्र ने इसे चलाने में
असमर्थता जताते हुए अपनी तकनीकी रिपोर्ट श्रम विभाग को सौंप दी है।
हालांकि जनप्रतिनिधियों की मंशा रही है कि एक बार चीनी मिल चल जाए। कर्मचारी नेताओं और जिले के गन्ना किसानों की नब्ज को समझते हुए सांसद, विधायक सहित व्यापारी नेता मिल के आंदोलन में शामिल थे।
सभी ने मिल कर्मचारियों को उनका हक दिलाने और चीनी मिल को चलवाने का दंभ भरा। नेताओं के भरोसे में आकर मिल के कर्मचारी भी आमरण अनशन पर बैठ गए। स्वास्थ्य खराब होने पर नाटकीय घटनाक्रम के तहत जिला प्रशासन ने आश्वासन देकर कर्मचारियों का अनशन समाप्त करवा दिया।
वहीं बस्ती चीनी मिल प्रबंधन ने श्रम विभाग को सौंपी अपनी तकनीकी रिपोर्ट में बताया है कि वर्ष 1927 में स्थापित बस्ती शुगर मिल काफी पुुरानी हो चुकी है। जिसकी मशीनरी पर 65 करोड़ रुपये खर्च करके उसका जीर्णोद्धार किया गया।
इसके बाद मिल में जब पेराई शुरू की गई तो मशीनों में आने वाली खराबी के चलते घाटा कम नहीं हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों की संख्या कम करने के लिए वर्ष 2011-12 में वीआरएस योजना लागू की गई।
इसका लाभ 218 कर्मचारियों ने लिया। इस पर करीब साढ़े आठ करोड़ रुपये व्यय किए गए। जिन कर्मचारियों ने इस योजना का लाभ नहीं लिया, उन्हें अन्य यूनिटों में भेज दिया गया।
चीनी मिल की कुल पेराई क्षमता 6000 टीसीडी है, जो वर्तमान में आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं मानी जाती है। इस वजह से पेराई सत्र 2013-14 में मिल को बंद करना पड़ा।
मिल प्रबंधन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि फैक्ट्री का क्रेन यार्ड रेलवे की जमीन पर पट्टा लेकर बनाया गया था। पट्टे की अवधि समाप्त हो चुुकी है और रेलवे ने अभी तक दोबारा पट्टा नहीं दिया है।
इस वजह से श्रमिकों के क्वार्टर को तोड़कर यार्ड बनाना पड़ा जो जरूरत से बहुत छोटा है। इस वजह से ट्रक रोड़ पर खड़े होने लगे। इससे जाम लगने पर आए दिन कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने लगी।
रिपोर्ट में बताया कि जमीन काफी कम होने के कारण फैक्ट्री का विस्तार नहीं किया जा सकता है और न ही उसके साथ पावर प्लांट और डिस्टिलरी लगाई जा सकती है। इसलिए पुरानी मशीनों और आर्थिक नुकसान के चलते बस्ती चीनी मिल को चलाया नहीं जा सकता है।
बस्ती शुगर मिल प्रबंधन ने अपनी तकनीकी रिपोर्ट दे दी है, जिसमें घाटा होने की वजह से चीनी मिल को चलाने में असमर्थता जताई है। -गौतम गिरी, सहायक श्रमायुक्त, बस्ती
चीनी मिल प्रबंधन ने श्रम विभाग को क्या तकनीकी रिपोर्ट सौंपी है। उसकी हमें जानकारी नहीं है। श्रम विभाग से रिपोर्ट को मंगवा कर अध्ययन किया जाएगा। उसके बाद ही कोई कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। -राकेश कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी, बस्ती।
हालांकि जनप्रतिनिधियों की मंशा रही है कि एक बार चीनी मिल चल जाए। कर्मचारी नेताओं और जिले के गन्ना किसानों की नब्ज को समझते हुए सांसद, विधायक सहित व्यापारी नेता मिल के आंदोलन में शामिल थे।
सभी ने मिल कर्मचारियों को उनका हक दिलाने और चीनी मिल को चलवाने का दंभ भरा। नेताओं के भरोसे में आकर मिल के कर्मचारी भी आमरण अनशन पर बैठ गए। स्वास्थ्य खराब होने पर नाटकीय घटनाक्रम के तहत जिला प्रशासन ने आश्वासन देकर कर्मचारियों का अनशन समाप्त करवा दिया।
वहीं बस्ती चीनी मिल प्रबंधन ने श्रम विभाग को सौंपी अपनी तकनीकी रिपोर्ट में बताया है कि वर्ष 1927 में स्थापित बस्ती शुगर मिल काफी पुुरानी हो चुकी है। जिसकी मशीनरी पर 65 करोड़ रुपये खर्च करके उसका जीर्णोद्धार किया गया।
इसके बाद मिल में जब पेराई शुरू की गई तो मशीनों में आने वाली खराबी के चलते घाटा कम नहीं हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों की संख्या कम करने के लिए वर्ष 2011-12 में वीआरएस योजना लागू की गई।
इसका लाभ 218 कर्मचारियों ने लिया। इस पर करीब साढ़े आठ करोड़ रुपये व्यय किए गए। जिन कर्मचारियों ने इस योजना का लाभ नहीं लिया, उन्हें अन्य यूनिटों में भेज दिया गया।
चीनी मिल की कुल पेराई क्षमता 6000 टीसीडी है, जो वर्तमान में आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं मानी जाती है। इस वजह से पेराई सत्र 2013-14 में मिल को बंद करना पड़ा।
मिल प्रबंधन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि फैक्ट्री का क्रेन यार्ड रेलवे की जमीन पर पट्टा लेकर बनाया गया था। पट्टे की अवधि समाप्त हो चुुकी है और रेलवे ने अभी तक दोबारा पट्टा नहीं दिया है।
इस वजह से श्रमिकों के क्वार्टर को तोड़कर यार्ड बनाना पड़ा जो जरूरत से बहुत छोटा है। इस वजह से ट्रक रोड़ पर खड़े होने लगे। इससे जाम लगने पर आए दिन कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने लगी।
रिपोर्ट में बताया कि जमीन काफी कम होने के कारण फैक्ट्री का विस्तार नहीं किया जा सकता है और न ही उसके साथ पावर प्लांट और डिस्टिलरी लगाई जा सकती है। इसलिए पुरानी मशीनों और आर्थिक नुकसान के चलते बस्ती चीनी मिल को चलाया नहीं जा सकता है।
बस्ती शुगर मिल प्रबंधन ने अपनी तकनीकी रिपोर्ट दे दी है, जिसमें घाटा होने की वजह से चीनी मिल को चलाने में असमर्थता जताई है। -गौतम गिरी, सहायक श्रमायुक्त, बस्ती
चीनी मिल प्रबंधन ने श्रम विभाग को क्या तकनीकी रिपोर्ट सौंपी है। उसकी हमें जानकारी नहीं है। श्रम विभाग से रिपोर्ट को मंगवा कर अध्ययन किया जाएगा। उसके बाद ही कोई कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। -राकेश कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी, बस्ती।