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साईं कथा के समापन आयोजित हुई साहित्यिक संध्या
Basti
Updated Tue, 21 Oct 2014 05:30 AM IST
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बस्ती। साईं कृपा संस्थान की ओर से संगीतमयी साईं कथा के समापन सत्र में टाउनहाल में साम्प्रदायिक सौहार्द को समर्पित कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें नामचीन कवियों ने अपनी रचनायें पढ़ीं। एआरटीओ शंकरजी सिंह ने साईं आरती कर कार्यक्रम का उदघाटन किया। आयोजक मंडल के विनोद श्रीवास्तव की मौजूदगी में कवियों को माल्यार्पण के उपरान्त शाल भेंटकर उनका सम्मान किया गया।
शुरूआत बांसी से आये युवा कवि सुशील ‘सागर‘ की सरस्वती वन्दना ‘हे जगतजननी शारदे, अभिमान मन से निकाल दे‘ मै रहूं तेरे चरण में, अज्ञानता से उबार दे‘ से हुई। जनपद की माटी में पली बढ़ी युवा कवियत्री नैना पाण्डेय ने जैसे ही ‘हम हवाओं में चराग अपना जला देते हैं, दिल जिसे चाहे उसे अपना बना लेते हैं प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी। संचालन कर रहे ज्ञानेन्द्र द्विवेदी ‘दीपक‘ ने ऐ अब्र हमें क्यों सैलाब की धमकी देता है हम तो दरिया की छाती पर तरबूज की खेती करते हैं सुनाकर देश की अखंडता को प्रदर्शित किया। डा. लक्ष्मी श्रीवास्तव ने बेशक चिराग अलग अलग हों मेरे, लेकिन उजाला उनका अलग हो नही सकता‘ प्रस्तुत कर साम्प्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया। युवा रचनाकार अजय ‘अश्क‘ ने आधुनिकता की बयार रोकिये नही तो सच है शहीदों की निशानी भूल जाओगे, एक साथ पूजा और अजान करते हैं उन्मादियों को ये भी बताया जाना चाहिये‘ सुनाकर खूब वाहवाही लूटा। राधेश्याम वर्मा ‘जलज‘ ने नई पीढ़ी के द्वारा किये जा रहे माता पिता के तिरष्कार को अपनी रचना में कुछ यूं कहा, ‘जिनको चलना सिखाया था उंगली पकड़, आज वे हमको ठेंगा दिखाते रहे। हास्य व्यंग्यकार रामकृष्ण लाल ‘जगमग‘ की रचना ‘उनकी तिरछी निगाहों पर हम मर गये, बाद में पता चला कि वो तिरछा ही देखते हैं‘ सुनकर श्रोता हंसते हसंते लोटपोट हो गये।
सिद्धार्थनगर से आये ब्रहमदेव शास्त्री ने ‘कभी मैला हम अपना आचरण होने नही देंगे, विषैला विश्व का पर्यावरण होने नहीं देंगे सुनाया। कविता पाठ का क्रम देर रात तक चलता रहा। डा. विजयलक्ष्मी पण्डित, लालमणि प्रसाद, डा. भास्कर शर्मा, सत्येन्द्रनाथ मतवाला, रत्नेश चतुर्वेदी रत्न, तुलसीपुर के डा. ओम प्रकाश मिश्र ‘प्रकाश‘ हरदोई के देवेश तिवारी ने भी अपनी रचनाओं को साझा किया। कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति को कथावाचक उमांशकर ने सम्मानित किया। र्साइं कृपा संस्थान के संत कुमार नंदन ने जनपदवासियों, संाई भक्तों और अन्य सहयोगियों के प्रति आभार जताया।
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शुरूआत बांसी से आये युवा कवि सुशील ‘सागर‘ की सरस्वती वन्दना ‘हे जगतजननी शारदे, अभिमान मन से निकाल दे‘ मै रहूं तेरे चरण में, अज्ञानता से उबार दे‘ से हुई। जनपद की माटी में पली बढ़ी युवा कवियत्री नैना पाण्डेय ने जैसे ही ‘हम हवाओं में चराग अपना जला देते हैं, दिल जिसे चाहे उसे अपना बना लेते हैं प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी। संचालन कर रहे ज्ञानेन्द्र द्विवेदी ‘दीपक‘ ने ऐ अब्र हमें क्यों सैलाब की धमकी देता है हम तो दरिया की छाती पर तरबूज की खेती करते हैं सुनाकर देश की अखंडता को प्रदर्शित किया। डा. लक्ष्मी श्रीवास्तव ने बेशक चिराग अलग अलग हों मेरे, लेकिन उजाला उनका अलग हो नही सकता‘ प्रस्तुत कर साम्प्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया। युवा रचनाकार अजय ‘अश्क‘ ने आधुनिकता की बयार रोकिये नही तो सच है शहीदों की निशानी भूल जाओगे, एक साथ पूजा और अजान करते हैं उन्मादियों को ये भी बताया जाना चाहिये‘ सुनाकर खूब वाहवाही लूटा। राधेश्याम वर्मा ‘जलज‘ ने नई पीढ़ी के द्वारा किये जा रहे माता पिता के तिरष्कार को अपनी रचना में कुछ यूं कहा, ‘जिनको चलना सिखाया था उंगली पकड़, आज वे हमको ठेंगा दिखाते रहे। हास्य व्यंग्यकार रामकृष्ण लाल ‘जगमग‘ की रचना ‘उनकी तिरछी निगाहों पर हम मर गये, बाद में पता चला कि वो तिरछा ही देखते हैं‘ सुनकर श्रोता हंसते हसंते लोटपोट हो गये।
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सिद्धार्थनगर से आये ब्रहमदेव शास्त्री ने ‘कभी मैला हम अपना आचरण होने नही देंगे, विषैला विश्व का पर्यावरण होने नहीं देंगे सुनाया। कविता पाठ का क्रम देर रात तक चलता रहा। डा. विजयलक्ष्मी पण्डित, लालमणि प्रसाद, डा. भास्कर शर्मा, सत्येन्द्रनाथ मतवाला, रत्नेश चतुर्वेदी रत्न, तुलसीपुर के डा. ओम प्रकाश मिश्र ‘प्रकाश‘ हरदोई के देवेश तिवारी ने भी अपनी रचनाओं को साझा किया। कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति को कथावाचक उमांशकर ने सम्मानित किया। र्साइं कृपा संस्थान के संत कुमार नंदन ने जनपदवासियों, संाई भक्तों और अन्य सहयोगियों के प्रति आभार जताया।
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