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पीआईसीयू के तीन फिंगर प्रो व एक मानीटर खराब
Updated Mon, 21 Aug 2017 11:49 PM IST
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पीआईसीयू के तीन फिंगर प्रो खराब
बस्ती।
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स की लापरवाही सेे कई जानें चली गईं। इसके बाद इस कंपनी की कार्य प्रणाली को लेकर पूरा तंत्र सवालों के घेरे में खड़ा हो गया।
जिला चिकित्सालय में संचालित पीआईसीयू भी इसी कंपनी की देखरेख में है। तय अनुबंध के मुताबिक इस यूनिट के संसाधनों को सुसज्जित रखने की जिम्मेदारी उक्त कंपनी की है। इस यूनिट में लगाए गए दस बेडों की चार मशीन पिछले तीन माह से खराब हैं। यही नहीं इन मशीनों के बारे में कंपनी ने सर्वे भी कराया था। बावजूद इसके यह पूरी तरह बंद हैं। ऐसे में वार्ड के दस में से चार बेड पर मरीज तो भर्ती होते हैं, मगर उनकी मशीनों से देखरेख नहीं होती। और तो और कंपनी के कर्मचारी पिछले पांच माह से बगैर वेतन यहां काम कर रहे हैं।
मानव जीवन से खिलवाड़ करने के आरोप में घिरे पुष्पा सेल्स की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जिला चिकित्सालय में स्थापित इस कंपनी का पीआईसीयू की हालत भी ठीक नहीं है। हालांकि, स्वास्थ्य प्रशासन के प्रयास से इसे जैसे-तैसे संचालित किया जा रहा है, मगर यहां स्थापित तीन मशीनों के फिंगर प्रो यानी पल्स जांच, शरीर में ऑक्सीजन की स्थिति और रिस्प्रेशन जांचने की प्रक्रिया बाधित है। इसके चलते मॉनीटर काम नहीं करते और वे बेकार पड़े हुए हैं। इसके अलावा एक मॉनीटर भी खराब है। नतीजतन, पीआईसीयू में दस में से छह बेड ही संचालित हो पा रहे हैं।
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कर्मचारियों की मानें तो पिछले तीन माह से ये मशीनें खराब हैं। इसका सर्वे भी कंपनी ने कराया था, मगर उसके बाद चुप्पी साध ली। कर्मियों का कहना है कि मशीनें तो अलग हैं उनको भी पांच माह से वेतन नहीं दिया गया। बीच में कुछ दिनों तक उनकी सेवा ही समाप्त कर दी गई थी, मगर गोरखपुर में हुई घटना से कुछ रोज पहले उनकी संविदा बहाल की गई।
सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि जिन मशीनों को खराब होना बताया जा रहा है। उसके बारे में संबंधित कंपनी रिपोर्ट तैयार कर ले जा चुकी है। इसको जल्द से जल्द लगवा दिया जाएगा। वैसे यूनिट पूरी तरह से संचालित किया जा रहा है। रही कर्मियों के वेतन और बहाली की बात तो यह मेरे संज्ञान में है। कर्मियों की संविदा बढ़ा दी गई है। वेतन भी इन्हें जल्द से जल्द मिलेगा।
फोटो
फंगल संक्रमण के रोगियों की संख्या बढ़ी
हर दिन 250 मरीज पहुंच रहे जिला अस्पताल
दवा के प्रतिरोधी होने से बीमारी ठीक होने में आ रही दिक्कत
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती।
जिला चिकित्सालय में जहां बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है वहीं मौसम का असर फंगल संक्रमण पर भी पड़ा है। अस्पताल में हर दिन 250 मरीज त्वचा रोग यानी दाद, खाज और खुजली के आ रहे हैं।
इस चर्म रोग की चिकित्सक तो दवाएं दे रहे हैं, मगर इस संक्रमण के विषाणुओं पर इसका कोई विशेष असर नहीं हो रहा है। ऐसे में जहां तीन दिन में इससे निजात मिल जाती थी अब महीनों लग रहा है। ऐसे में घबरा कर मरीज डॉक्टर की शरण में आ रहे हैं। सोमवार को जिला चिकित्सालय के त्वचा रोग विशेषज्ञ के यहां मरीजों का हुजूम नजर आया। एक चिकित्सक ही इलाज करते दिखे। डॉक्टर के मुताबिक बरसात और गर्मी के बीच का मौसम फंगल संक्रमण के रोगियों को बढ़ाता है, मगर इस बार यह रोग आसनी से ठीक नहीं हो पा रहा है। दवाओं का इस पर बेहद कम असर है। नामचीन कंपनियों की दवाएं भी उस गति से काम नहीं कर रही हैं, जैसा पहले हुआ करता था।
जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. राम प्रकाश की मानें तो फंगल संक्रमण के विषाणु दवा प्रतिरोधी हो गए हैं। ऐसे में इनके ठीक होने में लंबा समय लग रहा है। वह भी साधारण दवाएं इस पर काम नहीं कर रही हैं। ऐसे में विशेष किस्म की दवाएं मरीजों को दी जा रही हैं, मगर वह भी ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पा रहा है। डॉ. राम प्रकाश बताते हैं कि फंगल संक्रमण के दवा प्रतिरोधी होने का कारण लगातार विभिन्न दवाओं का इस पर प्रयोग है। ऐसे में सामान्य दवाओं का असर पूरी तरह फंगस पर समाप्त हो चुका है। वे कहते हैं कि फंगस यदि परिवार के एक सदस्य को हो जाए तो उसके कपड़े, तौलिया, साबुन आदि का प्रयोग अन्य कोई न करे। ऐसे रोगियों के कपड़ों को गरम पानी में धुला जाए। कहते हैं कि फंगल संक्रमण के हर दिन ढाई सौ से तीन सौ मरीज अस्पताल में आ रहे हैं।
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बस्ती।
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स की लापरवाही सेे कई जानें चली गईं। इसके बाद इस कंपनी की कार्य प्रणाली को लेकर पूरा तंत्र सवालों के घेरे में खड़ा हो गया।
जिला चिकित्सालय में संचालित पीआईसीयू भी इसी कंपनी की देखरेख में है। तय अनुबंध के मुताबिक इस यूनिट के संसाधनों को सुसज्जित रखने की जिम्मेदारी उक्त कंपनी की है। इस यूनिट में लगाए गए दस बेडों की चार मशीन पिछले तीन माह से खराब हैं। यही नहीं इन मशीनों के बारे में कंपनी ने सर्वे भी कराया था। बावजूद इसके यह पूरी तरह बंद हैं। ऐसे में वार्ड के दस में से चार बेड पर मरीज तो भर्ती होते हैं, मगर उनकी मशीनों से देखरेख नहीं होती। और तो और कंपनी के कर्मचारी पिछले पांच माह से बगैर वेतन यहां काम कर रहे हैं।
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मानव जीवन से खिलवाड़ करने के आरोप में घिरे पुष्पा सेल्स की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जिला चिकित्सालय में स्थापित इस कंपनी का पीआईसीयू की हालत भी ठीक नहीं है। हालांकि, स्वास्थ्य प्रशासन के प्रयास से इसे जैसे-तैसे संचालित किया जा रहा है, मगर यहां स्थापित तीन मशीनों के फिंगर प्रो यानी पल्स जांच, शरीर में ऑक्सीजन की स्थिति और रिस्प्रेशन जांचने की प्रक्रिया बाधित है। इसके चलते मॉनीटर काम नहीं करते और वे बेकार पड़े हुए हैं। इसके अलावा एक मॉनीटर भी खराब है। नतीजतन, पीआईसीयू में दस में से छह बेड ही संचालित हो पा रहे हैं।
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कर्मचारियों की मानें तो पिछले तीन माह से ये मशीनें खराब हैं। इसका सर्वे भी कंपनी ने कराया था, मगर उसके बाद चुप्पी साध ली। कर्मियों का कहना है कि मशीनें तो अलग हैं उनको भी पांच माह से वेतन नहीं दिया गया। बीच में कुछ दिनों तक उनकी सेवा ही समाप्त कर दी गई थी, मगर गोरखपुर में हुई घटना से कुछ रोज पहले उनकी संविदा बहाल की गई।
सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि जिन मशीनों को खराब होना बताया जा रहा है। उसके बारे में संबंधित कंपनी रिपोर्ट तैयार कर ले जा चुकी है। इसको जल्द से जल्द लगवा दिया जाएगा। वैसे यूनिट पूरी तरह से संचालित किया जा रहा है। रही कर्मियों के वेतन और बहाली की बात तो यह मेरे संज्ञान में है। कर्मियों की संविदा बढ़ा दी गई है। वेतन भी इन्हें जल्द से जल्द मिलेगा।
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फंगल संक्रमण के रोगियों की संख्या बढ़ी
हर दिन 250 मरीज पहुंच रहे जिला अस्पताल
दवा के प्रतिरोधी होने से बीमारी ठीक होने में आ रही दिक्कत
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती।
जिला चिकित्सालय में जहां बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है वहीं मौसम का असर फंगल संक्रमण पर भी पड़ा है। अस्पताल में हर दिन 250 मरीज त्वचा रोग यानी दाद, खाज और खुजली के आ रहे हैं।
इस चर्म रोग की चिकित्सक तो दवाएं दे रहे हैं, मगर इस संक्रमण के विषाणुओं पर इसका कोई विशेष असर नहीं हो रहा है। ऐसे में जहां तीन दिन में इससे निजात मिल जाती थी अब महीनों लग रहा है। ऐसे में घबरा कर मरीज डॉक्टर की शरण में आ रहे हैं। सोमवार को जिला चिकित्सालय के त्वचा रोग विशेषज्ञ के यहां मरीजों का हुजूम नजर आया। एक चिकित्सक ही इलाज करते दिखे। डॉक्टर के मुताबिक बरसात और गर्मी के बीच का मौसम फंगल संक्रमण के रोगियों को बढ़ाता है, मगर इस बार यह रोग आसनी से ठीक नहीं हो पा रहा है। दवाओं का इस पर बेहद कम असर है। नामचीन कंपनियों की दवाएं भी उस गति से काम नहीं कर रही हैं, जैसा पहले हुआ करता था।
जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. राम प्रकाश की मानें तो फंगल संक्रमण के विषाणु दवा प्रतिरोधी हो गए हैं। ऐसे में इनके ठीक होने में लंबा समय लग रहा है। वह भी साधारण दवाएं इस पर काम नहीं कर रही हैं। ऐसे में विशेष किस्म की दवाएं मरीजों को दी जा रही हैं, मगर वह भी ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पा रहा है। डॉ. राम प्रकाश बताते हैं कि फंगल संक्रमण के दवा प्रतिरोधी होने का कारण लगातार विभिन्न दवाओं का इस पर प्रयोग है। ऐसे में सामान्य दवाओं का असर पूरी तरह फंगस पर समाप्त हो चुका है। वे कहते हैं कि फंगस यदि परिवार के एक सदस्य को हो जाए तो उसके कपड़े, तौलिया, साबुन आदि का प्रयोग अन्य कोई न करे। ऐसे रोगियों के कपड़ों को गरम पानी में धुला जाए। कहते हैं कि फंगल संक्रमण के हर दिन ढाई सौ से तीन सौ मरीज अस्पताल में आ रहे हैं।