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रिपोर्ट कार्ड छपाई में फंसे बीएसए
Updated Mon, 24 Jul 2017 05:26 PM IST
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बस्ती। सर्व शिक्षा अभियान के मद से 32 लाख रुपये से छात्र प्रोफाइल और रिपोर्ट कार्ड की छपाई के मामले में पूर्व बीएसए एमपी वर्मा फंस गए हैं। कमिश्नर के निर्देश पर प्रकरण की जांच कर रहे एडी बेसिक डॉ. एसपी त्रिपाठी ने बताया कि आरोप सही पाए और कार्रवाई के लिए कमिश्नर और शासन को लिख दिया गया है। बताया कि यह कार्रवाई पत्रावली उपलब्ध न कराए जाने के परिपेक्ष में की गई। इस प्रकरण को अमर उजाला पिछले पांच माह से प्रमुखता से उठाता आ रहा है।
जिले के 1746 प्राइमरी और 639 जूनियर स्कूल सहित कुल 2385 स्कूलों के लगभग 2.50 लाख स्कूली बच्चों के लिए वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए 32 लाख रुपये की लागत से छात्र प्रोफाइल और रिपोर्ट कार्ड की छपाई के लिए कागजों में गाजीपुर के किसी जिला पंचायत उद्योग को आर्डर दिया, जबकि एडी बेसिक का कहना है कि नियमानुसार इसका टेंडर कराना चाहिए था। नियम विरुद्ध छपाई कराने की शिकायत पांच माह पहले कमिश्नर दिनेश कुमार सिंह से की गई, इसके एडी बेसिक जांच अधिकारी नामित किया गया। जांच अधिकारी का हैं कि वह पिछले पांच माह से बीएसए से छपाई से संबंधित पत्रावली की मांग कर रहे हैं, बीएसए को इसके लिए नोटिस भी जारी हुआ, फिर बाद में अचानक पता चला कि कार्यालय से पत्रावली ही गायब कर दी गई, और जब छह जुलाई को बीएसए का तबादला नोएडा हुआ तो वह अपने साथ पत्रावली भी ले कर चले गए, इसकी लिखित शिकायत संबंधित पटल सहायक ने की। इसी बीच शासन ने 22 जुलाई को बीएसए को नोएडा से मुख्यालय अटैच कर दिया। उसके बाद भी पत्रावली नहीं दी गई। बताया कि जब बीएसए ने पत्रावली इतने दिनों में भी उपलब्ध नहीं कराई तो यह मान लिया गया कि आरोप सही है, और इसकी रिपोर्ट शासन और कमिश्नर को कर दी गई। बाद में जब कार्यालय को पत्रावली मिली तो उसमें कई तथ्य सामने आए, जिसमें स्थानीय स्तर पर खाता खुलवाकर कंप्यूटर से निकाले बिल पर 32 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। इतना ही जिस जिला पंचायत के पैड पर छपाई का प्रस्ताव दिया और जिस पर पर दूरभाष नंबर दिया गया जब उस नंबर पर बात हुई तो पता कि यह नंबर किसी अन्य जनपद का है, और इस नंबर से जिला पंचायत उद्योग गाजीपुर से कोई सरोकार नहीं है। इतना ही इस गोलमाल का तार जिले के एक नामचीन फर्म से है और पूरा खेल इसी फर्म द्वारा खेला गया। छपाई से पहले जो नमूने दिए गए थे, वह छपाई के बाद दिए जाने वाले रिपोर्ट कार्ड और प्रोफाइल की गुणवत्ता में काफी अंतर है।
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जिले के 1746 प्राइमरी और 639 जूनियर स्कूल सहित कुल 2385 स्कूलों के लगभग 2.50 लाख स्कूली बच्चों के लिए वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए 32 लाख रुपये की लागत से छात्र प्रोफाइल और रिपोर्ट कार्ड की छपाई के लिए कागजों में गाजीपुर के किसी जिला पंचायत उद्योग को आर्डर दिया, जबकि एडी बेसिक का कहना है कि नियमानुसार इसका टेंडर कराना चाहिए था। नियम विरुद्ध छपाई कराने की शिकायत पांच माह पहले कमिश्नर दिनेश कुमार सिंह से की गई, इसके एडी बेसिक जांच अधिकारी नामित किया गया। जांच अधिकारी का हैं कि वह पिछले पांच माह से बीएसए से छपाई से संबंधित पत्रावली की मांग कर रहे हैं, बीएसए को इसके लिए नोटिस भी जारी हुआ, फिर बाद में अचानक पता चला कि कार्यालय से पत्रावली ही गायब कर दी गई, और जब छह जुलाई को बीएसए का तबादला नोएडा हुआ तो वह अपने साथ पत्रावली भी ले कर चले गए, इसकी लिखित शिकायत संबंधित पटल सहायक ने की। इसी बीच शासन ने 22 जुलाई को बीएसए को नोएडा से मुख्यालय अटैच कर दिया। उसके बाद भी पत्रावली नहीं दी गई। बताया कि जब बीएसए ने पत्रावली इतने दिनों में भी उपलब्ध नहीं कराई तो यह मान लिया गया कि आरोप सही है, और इसकी रिपोर्ट शासन और कमिश्नर को कर दी गई। बाद में जब कार्यालय को पत्रावली मिली तो उसमें कई तथ्य सामने आए, जिसमें स्थानीय स्तर पर खाता खुलवाकर कंप्यूटर से निकाले बिल पर 32 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। इतना ही जिस जिला पंचायत के पैड पर छपाई का प्रस्ताव दिया और जिस पर पर दूरभाष नंबर दिया गया जब उस नंबर पर बात हुई तो पता कि यह नंबर किसी अन्य जनपद का है, और इस नंबर से जिला पंचायत उद्योग गाजीपुर से कोई सरोकार नहीं है। इतना ही इस गोलमाल का तार जिले के एक नामचीन फर्म से है और पूरा खेल इसी फर्म द्वारा खेला गया। छपाई से पहले जो नमूने दिए गए थे, वह छपाई के बाद दिए जाने वाले रिपोर्ट कार्ड और प्रोफाइल की गुणवत्ता में काफी अंतर है।
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