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सुसाइड के लिए मिल की चिमनी पर चढ़े कर्मचारी, हड़कंप

Sun, 28 Oct 2018 12:35 AM IST
Updated Sun, 28 Oct 2018 12:35 AM IST
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सुसाइड के लिए मिल की चिमनी पर चढ़े कर्मचारी, हड़कंप
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सुसाइड के लिए मिल की चिमनी पर चढ़े कर्मचारी, हड़कंप
24 दिन से धरना दे रहे थे वाल्टरगंज शुगर मिल के कर्मचारी
मिल को चलाने और मानदेय भुगतान की मांग कर रहे हैं कर्मी
एडीएम, एएसपी और डीएलसी पहुंचे मनाने, तीन घंटे तक हड़कंप
चिमनी से नीचे उतरते ही एक ने किया आत्मदाह का प्रयास
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती/वाल्टरगंज। वाल्टरगंज शुगर मिल पर किसानों और कर्मचारियों का करीब 42 करोड़ रुपये बकाया है। मिल प्रबंधन ने आगे पेराई करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। जिसे लेकर पिछले 24 दिन से कर्मचारी आंदोलित हैं। शनिवार को उनका धैर्य जवाब दे गया। आत्महत्या करने तीन कर्मचारी मिल की चिमनी पर चढ़ गए। सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया।
मिल कर्मचारियों के मुताबिक वाल्टरगंज शुगर मिल पिछले सत्र से ही डगमगा रही है। मिल की क्षमता 60 एमटी प्रतिदिन की है। पेराई सत्र 2017-18 में कम गन्ना आपूर्ति की बात कहकर समय से पहले ही मिल बंद कर दी गई। इसके बाद से ही स्थायी और सीजनल कर्मचारियों के अलावा किसानों का गन्ना मूल्य बकाया होता रहा है। जो बढ़कर 42 करोड़ रुपये पहुंच गया। अप्रैल और मई में चीनी मिल में मरम्मत कार्य होता है। अक्तूबर में नए सत्र के लिए बायलर की पूजा होती है जिसके बाद पेराई सत्र शुरू हो जाता है। लेकिन मरम्मत और पूजन नहीं होने से कर्मचारियों को यकीन हो गया कि अब मिल बंद हो गई है। जिसके विरोध में तीन अक्तूबर 18 से लगातार मिल गेट पर धरना शुरू हो गया। करीब 15 दिन पहले प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर पहुंचे और धरना खत्म कर बातचीत कराने के आश्वासन दिया था। इसके बाद मिल प्रबंधन व जिले के प्रशासनिक अफसरों के नहीं पहुंचने पर शनिवार को कर्मचारी उग्र हो गए। सतीश चौधरी, मनीराम और रामशरण मौर्य चिमनी पर चढ़कर आत्महत्या करने की धमकी देने लगे।
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मिल के डायरेक्टर को बुलाने की मांग
चिमनी पर चढ़े आंदोलनकारियों के समर्थन में बड़ी संख्या में मजदूर, कर्मचारी और किसान वहीं धरने पर बैठ गए। मौके पर एडीएम रमेशचंद्र, एएसपी पंकज, एसडीएम एसपी शुक्ल, सीओ आलोक सिंह व वाल्टरगंज, रुधौली तथा सोनहा थाने की फोर्स भी पहुंच गई। काफी मान मनौव्वल की लेकिन आंदोलनकारी रामप्रकाश चौधरी, विकास ठाकुर, बृजेश मिश्र आदि मिल के डायरेक्टर अशोक कुमार गुप्ता या प्रभाकर चंद्रा को धरनास्थल पर बुलाने पर अड़ गए। बाद में डीएम से फोन से वार्ता कर अफसरों ने कर्मचारियों की मांग बताई। सोमवार को जिला प्रशासन, मिल प्रबंधन, कर्मचारी और किसानों के आठ सदस्यीय दल के साथ वार्ता करने के समझौते पर मान गए।
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कर्मचारी ने आत्मदाह का किया प्रयास
सोमवार को जिला प्रशासन के समक्ष मिल प्रबंधन से वार्ता पर माने कर्मचारियों में एक ने अपने ऊपर डीजल छिड़क कर आत्मदाह का प्रयास कर रही रहा था कि मौजूद पुलिसकर्मियों ने पकड़ लिया। अधिकारियों के सामने आत्मदाह का प्रयास पर हड़कंप मच गया। बाद में किसी तरह समझा बुझाकर उसे शांत कराया गया।

29 को मिल प्रबंधन के साथ होगी वार्ता: एडीएम
कर्मचारियों और किसानों को मनाने पहुंचे अपर जिला अधिकारी रमेश चंद्र ने बताया कि डीएम डॉ. राजशेखर के साथ 29 अक्तूबर को बैठक होगी। जिसमें डीएम के अलावा मिलकर्मियों और किसानों का आठ सदस्यीय दल रहेगा। मिल प्रबंधन के जिम्मेदार भी बैठक में शामिल होंगे। जहां वार्ता के बाद सर्वमान्य हल निकाला जाएगा।

शुगर मिल बंद नहीं होने देंगे: विधायक
सदर विधायक दयाराम चौधरी ने बताया कि वाल्टरगंज मिल की समस्या संज्ञान में है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने चार हजार करोड़ मिलों को सस्ते में कर्ज दिलाने की व्यवस्था की है। इससे मिल अपने कर्मियों को वेतन, किसानों को गन्ना मूल्य भुुगतान और मरम्मत में खर्च कर पेराई सत्र शुरू करेगा। केन कमिश्नर, गन्ना मंत्री और मिल प्रबंधन से भी बात हुई है। किसी भी कीमत पर मिल बंद नहीं होने पाएगी। अपील की कि मजदूर, मिलकर्मी और किसान धैर्य बनाए रखें।


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दरियादिली: शुगर मिल चलाएं, वेतन बाद में दें
उग्र हुए वाल्टरगंज मिलकर्मियों की प्रबंधन से अपील
मिल प्रबंधन ने 42 करोड़ के भुगतान से हाथ खड़ा किया
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। मार्च 2018 से वाल्टरगंज शुगर मिल के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला। किसानों का दो साल से गन्ना मूल्य भुगतान बकाया है। मिल पर 42 करोड़ की कर्मचारियों और किसानों की देनदारी है। फिर भी कर्मचारी मिल को पहले चलाने और बाद में भुगतान की गुहार मिल प्रबंधन से कर रहे हैं।
हर ओर से अनसुनी किए जाने पर कर्मचारियों के साथ शनिवार को किसान भी आंदोलन में शामिल हो गए। किसान व जिला पंचायत सदस्य रामप्रकाश चौधरी कहना था कि हम लोगों का प्रयास है कि मिल चलाई जाए। लेकिन मिल मालिक शासनस्तर से साठगांठ कर घाटे के बहाने मिल को बंद करना चाह रहा है। डायरेक्टर अशोक कुमार गुप्ता या प्रभाकर चंद्रा को अपनी समस्याएं हम लोगों के बीच रखनी चाहिए लेकिन कोई जिम्मेदार नहीं पहुंचा। अब मजबूरी में आंदोलन किया जा रहा है। विकास ठाकुर ने मिल प्रबंधन पर आरोप लगाए कहा कि पीएनबी गोरखपुर से इस मिल पर करीब 70 करोड़ कर्ज लेकर ललितपुर पॉवर प्लांट में रकम लगा दी। रुधौली की अठदमा मिल भी बजाज ग्रुप की है जिसकी पेराई क्षमता कहीं अधिक है। ऐसे में इस मिल को बंद कर सारा ध्यान अठदमा शुगर मिल पर है। ऐसा होने नहीं दिया जाएगा। ये लोग मिल चलाएं हम बाद में वेतन लेंगे। राजेश चौधरी कहते हैं कि वाल्टरगंज शुगर मिल घाटे में नहीं है। जान-बूझकर घाटा दिखाया जा रहा है। यहां के किसानों का गन्ना अठदमा मिल में भेज दिया जाता है। किसान हो या कर्मचारी सब कुछ समझ रहा है। यहां 600 के करीब सीजनल, मजदूर व कर्मचारी हैं। सभी को मार्च से वेतन नहीं दिया जा रहा जबकि मिल प्रबंधन दूसरे काम में लगा है। धरने में पहुंचे सपा नेता बृजेश मिश्र कहते हैं कि इससे पहले इस ग्रुप ने मिल बंद करना चाहा था। तब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे। उनसे वार्ता के बाद मिल चलती रही। जब से नारंग ग्रुप ने फिनाले ग्रुप को दिया तभी से ऐसे हालात हुए। बताया कि इस मिल के लिए संघर्ष किया है। 45 दिन जेल में भी बंद रहा हूं। यह गड़बड़ी ऊपरी स्तर से है। क्षेत्रीय गन्ना किसान राजेश का कहना है कि 800 करोड़ से बंद चीनी मिल मुंडेरवा को प्रदेश सरकार चलाने जा रही है जबकि चल रही वाल्टरगंज चीनी मिल को बंद होने से रोक नहीं पा रही है। कहते हैं कि यहां के नेताओं पर भी विश्वास नहीं। जब सत्ता में होते हैं तब मिल बंद कराते और बाहर होते हैं तो मिल चालू कराने की बात कहते हैं।

मिलों पर किसानों का बकाया गन्ना मूल्य
बभनान शुगर मिल पर लगभग 84 करोड़, रुधौली के अठदमा स्थित शुगर मिल पर 57 करोड़ और वाल्टरगंज चीनी मिल पर 42 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य की देनदारी है। गत बृहस्पतिवार को डीएम के साथ बैठक में यह तस्वीर उभर कर आई है। बभनान चीनी मिल प्रबंधन ने डीएम को आश्वस्त किया कि नवंबर 2018 तक कुल 84 करोड़ बकाया (किसान का बकाया गन्ना भुगतान) भुगतान कर देंगे। लेकिन अठदमा शुगर मिल ने पार्ट पेमेंट के तौर पर नवंबर के अंत तक सिर्फ 12 करोड़ रुपये अदा करने का आश्वासन दिया। बाकी रकम प्रदेश सरकार की तरफ से अठदमा शुगर मिल को प्राप्त होने वाली गन्ना प्रोत्साहन राशि जारी होने के बाद अदा की जाएगी।

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आत्मदाह के प्रयास पर अफरा-तफरी
वाल्टरगंज। शुगर मिल में पेराई सत्र शुरू करने और बकाये मानदेय की मांग को लेकर मिल मजदूर व किसान मिल की चिमनी पर चढ़ गए थे। प्रशासन के मान मनौव्वल के बाद तीनों लोग नीचे उतर गए। लेकिन उतरते ही एक मजूदर आत्मदाह की कोशिश की तो अफरा-तफरी मच गई। मिल मजदूर का आरोप था कि प्रशासन और मिल प्रबंधन के साठगांठ से मिल बंद की जा रही है। हम लोग भुखमरी के कगार पर आ गए हैं। जिसके चलते आत्मदाह करने के लिए मजबूर हैं। चंद्रेश प्रताप सिंह ने कहा कि हम सभी अपनी कुर्वानी देकर मिल को बंद नही होने देंगे यदि प्रशासन नहीं चेता तो किसी भी घटना की जिम्मेदारी उन्हीं की होगी।

कस्बे की शान पर ताला, छीन लेगा कई का निवाला
वाल्टरगंज शुगर मिल के वजूद पर संकट के बादल
लुट जाएगी रौनक, तो टूटेंगे कर्मचारियों के सपने
संतोष पाल
बस्ती। वाल्टरगंज कस्बे की शान शुगर मिल का वजूद खतरे में है। उस पर ताला लगने के आसार हैं। यदि ताला लग गया तो कई के निवाले पर संकट खड़ा हो जाएगा। मिल का पहिया हालांकि एक वर्ष पहले ही थमने लगा था, जिसे उस वर्ष किसी तरह दबाव में आकर मिल प्रबंधन ने घुमाया, लेकिन अब मिल प्रबंधन ने हाथ खड़े कर दिए हैं। शुगर मिल की बंदी से इलाके की रौनक तो लुट ही जाएगी कई के सपने भी टूट जाएंगे।

शुगर मिल वाल्टरगंज के संचालन को ग्रहण लगने वाला है। मिल का धुआं थम गया है। तमाम आंदोलन व धरना-प्रदर्शन के बावजूद प्रबंधन की सुगबुगाहट तक नहीं है। ऐसे में यह तय होने लगा है कि अब मिल शायद कभी धुआं नहीं देगी। मालिक व प्रबंधन के लिए मिल व्यवसाय है, मगर क्षेत्र के किसानों, श्रमिकों व व्यापारियों के लिए यह परिवार पालने का साधन था। मिल से ही कस्बे की रौनक को चार चांद लगता था। पेराई सत्र में यहां खूब भीड़ होती थी। बाजार की रौनक जहां किसानों ने बढ़ा रखी थी, वहीं, यहां काम करने वाले लोगों से व्यापार भी होता था। कस्बे की शान शुगर मिल के सहारे जिनके चूल्हे जलते थे वे ठंडे पड़ने लगे हैं। अस्सी वर्ष पहले पंजाब से यहां आकर चाय की दुकान व किराना स्टोर के सहारे परिवार का पेट पालने वाले रीता व मनमोहन चावला को उनका भविष्य अंधेरे से घिरा दिख रहा है। बातचीत में उनकी आंखें भर गईं। कहते हैं कि गन्ना सीजन में इतना कमा लेता था। इससे परिवार की जरूरत पूरी हो जाती थीं। बताया कि 1931 में हमारे बाबा यहां आए चौथी पीढ़ी इन्हीं दुकानों से पल रही है। मिल बंद होने से खरीदार नहीं आएंगे तो परिवार का पेट कैसे भरेगा। कहा कि नारंग साहब ने दुकान दिया था, जिसे बजाज ग्रुप ने छीन लिया। अब कैसे परिवार चलेगा, यह चिंता खाए जा रही है। चावला दंपती तो महज बानगी हैं। ऐसे ही न जाने कितने परिवार के रोजी रोटी का साधन शुगर मिल है। अब इनकी उम्मीद टूटने लगी है।
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