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तो बरेली मंडल में पशु तस्करों पर होगा योगी का वार
बरेली।
Updated Sun, 19 Mar 2017 01:14 AM IST
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Yogi's war will be on animal smugglers in Bareilly division
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के नए मनोनीत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बरेली की चुनावी सभा में भाजपा सरकार बनने की स्थिति में यांत्रिक कत्लखाने बंद करने और पशु तस्करी के खिलाफ सख्त कदम उठाने का वादा किया था। सफेदपोशों और पुलिस के संरक्षण में शाहजहांपुर और बदायूं के कस्बों और ग्रामीण इलाकों से वाया बरेली होते हुए रामपुर तक बड़े पैमाने पर पशु तस्करी होती है। अवैध स्लाटर हाउसों पर रोजाना हजारों की संख्या में गोवंशीय पशु काटे जाते हैं। दो साल पहले पशु तस्करों ने फरीदपुर में दरोगा मनोज मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
बरेली में नगर निगम का स्लाटर हाउस लंबे समय से बंद चल रहा है। जबकि ठिरिया निजावत खां, बहेड़ी, रिछा, दमखोदा, शीशगढ़, नगरिया सादात, आंवला, विशारतगंज, शाही, मिलक और रामपुर में बड़े पैमाने पर अवैध कत्लखाने चल रहे हैं। इन पर पशुओं की सप्लाई हरदोई, शाहजहांपुर, एटा, इटावा, मैनपुरी, कासगंज और बदायूं से चोरी से लाए गए पशुओं से होती है। वैध कत्लखानों पर भी निर्धारित संख्या से ज्यादा पशुओं का कटान होता है। हर साल औसतन 50 करोड़ से ज्यादा पशु तस्करी के अवैध कारोबार को सपा सरकार में सत्ताधारी दल के नेताओं और पुलिस का संरक्षण रहा है। दिल्ली हाइवे पर हरदोई से रामपुर के बीच में पड़ने वाले प्रत्येक थाने और चौकी में तस्करों ने पशु लाने ले जाने के लिए महीना बांध रखा है। इसीलिए पुलिस अक्सर पशुओें से भरा वाहन तो पकड़ लेती है लेकिन तस्कर अक्सर फरार दिखाए जाते हैं। शाहजहांपुर से बाया बरेली और रामपुर तक हर एक नगरपालिका और नगर पंचायत के अलावा बड़ी ग्राम पंचायत में पांच से छह अवैध स्लाटर हाउस चलते हैं।
जानवर खरीद की बनती है फर्जी रसीद
देवचरा, बहेड़ी और गैनी में गाय, बैल, भैंसों की खरीद बिक्री के लिए नखासा बाजार लगते हैं। पशु तस्कर नखासे में पशु खरीदकर उनकी रसीद अन्य नामों से बनवाते हैं। फिर इनको आंवला के गुलड़िया, सिरौली, शाहाबाद और मीरगंज होते ही अवैध स्लाटर हाउसों पर कटवाया जाता है। फरीदपुर के आस-पास के गांवों में बड़ी संख्या में अवैध स्लाटर हाउस चल रहे हैं।
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मिली थीं 10 हजार पशुओं की खालें
तीन साल पहले बहेड़ी और रिछा में जमीन के अंदर 10 हजार से ज्यादा पशुओं की खालें बरामद हुई थीं। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने अपनी जांच रिपोर्ट मेें सपा नेताओं के संरक्षण में पशु के अवैध कटान का जिक्र किया था। हालांकि बाद में जांच रिपोर्ट दबा दी गई थी। 2013 में भमौरा थाने में पशुओं की खालों से भरा ट्रक पकड़ा गया। मगर, पुलिस को न तस्कर मिले और न ही उनको जेल भेजा गया।
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बरेली में नगर निगम का स्लाटर हाउस लंबे समय से बंद चल रहा है। जबकि ठिरिया निजावत खां, बहेड़ी, रिछा, दमखोदा, शीशगढ़, नगरिया सादात, आंवला, विशारतगंज, शाही, मिलक और रामपुर में बड़े पैमाने पर अवैध कत्लखाने चल रहे हैं। इन पर पशुओं की सप्लाई हरदोई, शाहजहांपुर, एटा, इटावा, मैनपुरी, कासगंज और बदायूं से चोरी से लाए गए पशुओं से होती है। वैध कत्लखानों पर भी निर्धारित संख्या से ज्यादा पशुओं का कटान होता है। हर साल औसतन 50 करोड़ से ज्यादा पशु तस्करी के अवैध कारोबार को सपा सरकार में सत्ताधारी दल के नेताओं और पुलिस का संरक्षण रहा है। दिल्ली हाइवे पर हरदोई से रामपुर के बीच में पड़ने वाले प्रत्येक थाने और चौकी में तस्करों ने पशु लाने ले जाने के लिए महीना बांध रखा है। इसीलिए पुलिस अक्सर पशुओें से भरा वाहन तो पकड़ लेती है लेकिन तस्कर अक्सर फरार दिखाए जाते हैं। शाहजहांपुर से बाया बरेली और रामपुर तक हर एक नगरपालिका और नगर पंचायत के अलावा बड़ी ग्राम पंचायत में पांच से छह अवैध स्लाटर हाउस चलते हैं।
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जानवर खरीद की बनती है फर्जी रसीद
देवचरा, बहेड़ी और गैनी में गाय, बैल, भैंसों की खरीद बिक्री के लिए नखासा बाजार लगते हैं। पशु तस्कर नखासे में पशु खरीदकर उनकी रसीद अन्य नामों से बनवाते हैं। फिर इनको आंवला के गुलड़िया, सिरौली, शाहाबाद और मीरगंज होते ही अवैध स्लाटर हाउसों पर कटवाया जाता है। फरीदपुर के आस-पास के गांवों में बड़ी संख्या में अवैध स्लाटर हाउस चल रहे हैं।
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मिली थीं 10 हजार पशुओं की खालें
तीन साल पहले बहेड़ी और रिछा में जमीन के अंदर 10 हजार से ज्यादा पशुओं की खालें बरामद हुई थीं। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने अपनी जांच रिपोर्ट मेें सपा नेताओं के संरक्षण में पशु के अवैध कटान का जिक्र किया था। हालांकि बाद में जांच रिपोर्ट दबा दी गई थी। 2013 में भमौरा थाने में पशुओं की खालों से भरा ट्रक पकड़ा गया। मगर, पुलिस को न तस्कर मिले और न ही उनको जेल भेजा गया।