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Bareilly News: ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में महिलाएं पीछे
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बरेली। महिलाएं किसी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) के मामले में यह बात गलत साबित हो जाती है। महिलाएं भले स्कूटी, बाइक, कार से लेकर रोडवेज बसें, ट्रेन और हवाई जहाज तक चला रही हों, मगर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने को लेकर वह पुरुषों से पिछड़ रही हैं। पुरुषों के मुकाबले 10 फीसदी भी महिलाओं के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं हैं।
परिवहन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो तीन साल में जिले में 51,430 पुरुषों ने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाए हैं। इसके मुकाबले महिलाओं की संख्या सिर्फ 3,268 है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदन करने वालों की संख्या पर गौर करें तो महिलाओं की तादाद 30 फीसदी से ज्यादा है।
लर्निंग लाइसेंस के बाद स्थायी लाइसेंस देने से पहले परिवहन विभाग ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर टेस्ट लेता है। इसमें पुरुषों के मुकाबले ज्यादा महिलाएं फेल हो रही हैं। वर्ष 2023 से लेकर 2025 तक 20 हजार से ज्यादा महिलाओं ने लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त किए। जबकि 3268 महिलाएं ही स्थायी लाइसेंस के लिए टेस्ट पास कर सकीं। फेल होने वाले पुरुषों की संख्या कम है।
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लर्निंग लाइसेंस बनवाने के बाद 65 फीसदी से ज्यादा पुरुष पहली बार में ही टेस्ट पास कर लेते हैं। शेष दूसरी या फिर तीसरी बार टेस्ट पास करके स्थायी लाइसेंस प्राप्त कर लेते हैं। दूसरी ओर दूसरी और तीसरी बार फेल होने वालों में भी महिलाओं की संख्या ज्यादा है। संवाद
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टेस्ट में 90 फीसदी महिलाएं फेल
हर साल औसतन सात हजार महिलाएं स्थायी लाइसेंस बनवाने के लिए टेस्ट देती हैं, लेकिन इनमें 85 फीसदी ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्ट पास नहीं कर पातीं। तीन साल में जिन 3,268 महिलाओं ने स्थायी डीएल प्राप्त किया है उनमें दोपहिया वाहनों के ज्यादा डीएल हैं। चार पहिया वाहनों के लिए प्राप्त किए गए डीएल की संख्या महज 40 फीसदी है। दूसरी ओर पुरुषों में चार पहिया वाहन और हल्के मोटरयान के ड्राइविंग लाइसेंस का आंकड़ा 85 फीसदी से ज्यादा है।
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तीन साल में जारी स्थायी डीएल
वर्ष-- - पुरुष-- -- महिलाएं
2023-- 14021-- 897
2024-- 18197-- 1156
2025-- 19212-- 1215
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स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने वालों में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या काफी कम है। टेस्ट में फेल होने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। महिलाओं के पास दो पहिया वाहन के डीएल ज्यादा है, जबकि पुरुषों के पास हल्के चार पहिया मोटरयान के ड्राइविंग लाइसेंस ज्यादा हैंं।- डॉ. पीके सरोज, एआरटीओ प्रशासन
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परिवहन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो तीन साल में जिले में 51,430 पुरुषों ने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाए हैं। इसके मुकाबले महिलाओं की संख्या सिर्फ 3,268 है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदन करने वालों की संख्या पर गौर करें तो महिलाओं की तादाद 30 फीसदी से ज्यादा है।
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लर्निंग लाइसेंस के बाद स्थायी लाइसेंस देने से पहले परिवहन विभाग ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर टेस्ट लेता है। इसमें पुरुषों के मुकाबले ज्यादा महिलाएं फेल हो रही हैं। वर्ष 2023 से लेकर 2025 तक 20 हजार से ज्यादा महिलाओं ने लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त किए। जबकि 3268 महिलाएं ही स्थायी लाइसेंस के लिए टेस्ट पास कर सकीं। फेल होने वाले पुरुषों की संख्या कम है।
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लर्निंग लाइसेंस बनवाने के बाद 65 फीसदी से ज्यादा पुरुष पहली बार में ही टेस्ट पास कर लेते हैं। शेष दूसरी या फिर तीसरी बार टेस्ट पास करके स्थायी लाइसेंस प्राप्त कर लेते हैं। दूसरी ओर दूसरी और तीसरी बार फेल होने वालों में भी महिलाओं की संख्या ज्यादा है। संवाद
टेस्ट में 90 फीसदी महिलाएं फेल
हर साल औसतन सात हजार महिलाएं स्थायी लाइसेंस बनवाने के लिए टेस्ट देती हैं, लेकिन इनमें 85 फीसदी ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्ट पास नहीं कर पातीं। तीन साल में जिन 3,268 महिलाओं ने स्थायी डीएल प्राप्त किया है उनमें दोपहिया वाहनों के ज्यादा डीएल हैं। चार पहिया वाहनों के लिए प्राप्त किए गए डीएल की संख्या महज 40 फीसदी है। दूसरी ओर पुरुषों में चार पहिया वाहन और हल्के मोटरयान के ड्राइविंग लाइसेंस का आंकड़ा 85 फीसदी से ज्यादा है।
तीन साल में जारी स्थायी डीएल
वर्ष
2023
2024
2025
स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने वालों में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या काफी कम है। टेस्ट में फेल होने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। महिलाओं के पास दो पहिया वाहन के डीएल ज्यादा है, जबकि पुरुषों के पास हल्के चार पहिया मोटरयान के ड्राइविंग लाइसेंस ज्यादा हैंं।- डॉ. पीके सरोज, एआरटीओ प्रशासन