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दो-तीन दिन के अंदर मिल सकती हाथी की दहशत से निजात
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बरेली। नेपाल से रास्ता भटक कर बरेली पहुंचे हाथियों की दहशत से निजात मिलने में दो से तीन दिन लग सकते हैं। लखनऊ से पहुंच कर यहां डेरा डाले प्रधान मुख्य वन संरक्षक अपने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ मंत्रणा कर इसकी रणनीति तैयार कर रहे हैं। दिल्ली से भी कुछ एक्सपर्ट बुलाए गए हैं।
नेपाल के जंगल से रास्ता भटक कर एक सप्ताह पहले बरेली पहुंचे दो हाथी अब एक वन रक्षक समेत चार लोगों की जान ले चुके हैं। वन विभाग इन्हें वापस उनके वास स्थल भेजना चाहता है, लेकिन उसके अब तक के किए गए सभी प्रयास असफल साबित हो रहे हैं। इसे लेकर वन महकमा खासा चिंतित है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील पांडेय भी बुधवार से यहां पहुंच डेरा जमाए हुए हैं। उनके साथ अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजय सिंह भी यहां मौजूद हैं। इसके अलावा कई मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक के साथ-साथ वन्यजीवों पर काम करने वाली दो एनजीओ के प्रतिनिधि भी बुला लिए गए हैं। विश्व प्रकृति निधि की ओर से डा. रोहित भी यहां पहुंच गए हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक इन सभी अधिकारियों से वार्ता कर हाथियों की दहशत से लोगों को उबारने के लिए किए जाने वाले प्रयासों पर सलाह मशविरा ले रहे हैं। शुक्रवार को दिल्ली से भी कुछ एक्सपर्ट बुलाए गए हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील पांडेय ने अधिकारियों से वार्ता के बाद तैयार पूरी रणनीति का तो खुलासा नहीं किया, लेकिन इतना जरूर कहा कि विभाग अब ऐसी रणनीति तैयार कर रहा है जिससे दो से तीन दिन के भीतर हाथियों की दहशत से लोग उबर सकें। यह पूछे जाने पर कि विभाग क्या इन्हें ट्रैक्यूलाइज कर शिफ्ट करने पर भी विचार कर सकता है, पर उन्होंने कहा कि हाथी काफी विशाल वन्यजीव है। यह कीचड़ नदी के किनारे आदि स्थानों पर शरण ले रहा है। अगर उसे ट्रैक्यूलाइज कर भी दिया जाए तो वहां से उसे लादने के लिए बड़ा वाहन का पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इस लिए वन विभाग का प्रयास पहले हांका अभियान से ही उसे निकट के जंगल के क्षेत्र में भेजना है। उन्होंने बताया कि हाथी काफी अकल वाला जीव है। वह जिस रास्ते से आया है उस रास्ते से वापस जा सकता है, लेकिन वह ग्रामीणों की भीड़ देख सशंकित हो जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी विभाग हाथी को अर्ध बेहोश करने पर विचार कर सकता है, लेकिन यह तभी संभव है जब हाथी की लोकेशन किसी माकूल स्थान पर मिले, लेकिन यह काम भी आसान नहीं है क्योकि इनकी संख्या दो है। दोनों को एक साथ अर्द्ध बेहोश कर दूसरे स्थान पर ले जाना काफी मुश्किल भरा काम है। यदि इनमें से किसी एक को शिफ्ट करते हैं तो दूसरा अकेला रहने पर और उग्र हो सकता है। इस लिए इन सभी बातों का ध्यान रखते हुए विभाग रणनीति तैयार कर रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि विभाग का प्रयास होगा कि दो-तीन दिन में लोग हाथी की दहशत से आजाद हों।
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नेपाल के जंगल से रास्ता भटक कर एक सप्ताह पहले बरेली पहुंचे दो हाथी अब एक वन रक्षक समेत चार लोगों की जान ले चुके हैं। वन विभाग इन्हें वापस उनके वास स्थल भेजना चाहता है, लेकिन उसके अब तक के किए गए सभी प्रयास असफल साबित हो रहे हैं। इसे लेकर वन महकमा खासा चिंतित है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील पांडेय भी बुधवार से यहां पहुंच डेरा जमाए हुए हैं। उनके साथ अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजय सिंह भी यहां मौजूद हैं। इसके अलावा कई मुख्य वन संरक्षक, वन संरक्षक के साथ-साथ वन्यजीवों पर काम करने वाली दो एनजीओ के प्रतिनिधि भी बुला लिए गए हैं। विश्व प्रकृति निधि की ओर से डा. रोहित भी यहां पहुंच गए हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक इन सभी अधिकारियों से वार्ता कर हाथियों की दहशत से लोगों को उबारने के लिए किए जाने वाले प्रयासों पर सलाह मशविरा ले रहे हैं। शुक्रवार को दिल्ली से भी कुछ एक्सपर्ट बुलाए गए हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील पांडेय ने अधिकारियों से वार्ता के बाद तैयार पूरी रणनीति का तो खुलासा नहीं किया, लेकिन इतना जरूर कहा कि विभाग अब ऐसी रणनीति तैयार कर रहा है जिससे दो से तीन दिन के भीतर हाथियों की दहशत से लोग उबर सकें। यह पूछे जाने पर कि विभाग क्या इन्हें ट्रैक्यूलाइज कर शिफ्ट करने पर भी विचार कर सकता है, पर उन्होंने कहा कि हाथी काफी विशाल वन्यजीव है। यह कीचड़ नदी के किनारे आदि स्थानों पर शरण ले रहा है। अगर उसे ट्रैक्यूलाइज कर भी दिया जाए तो वहां से उसे लादने के लिए बड़ा वाहन का पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इस लिए वन विभाग का प्रयास पहले हांका अभियान से ही उसे निकट के जंगल के क्षेत्र में भेजना है। उन्होंने बताया कि हाथी काफी अकल वाला जीव है। वह जिस रास्ते से आया है उस रास्ते से वापस जा सकता है, लेकिन वह ग्रामीणों की भीड़ देख सशंकित हो जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी विभाग हाथी को अर्ध बेहोश करने पर विचार कर सकता है, लेकिन यह तभी संभव है जब हाथी की लोकेशन किसी माकूल स्थान पर मिले, लेकिन यह काम भी आसान नहीं है क्योकि इनकी संख्या दो है। दोनों को एक साथ अर्द्ध बेहोश कर दूसरे स्थान पर ले जाना काफी मुश्किल भरा काम है। यदि इनमें से किसी एक को शिफ्ट करते हैं तो दूसरा अकेला रहने पर और उग्र हो सकता है। इस लिए इन सभी बातों का ध्यान रखते हुए विभाग रणनीति तैयार कर रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि विभाग का प्रयास होगा कि दो-तीन दिन में लोग हाथी की दहशत से आजाद हों।
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