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Bareilly News: दिन में धूप, रात में ठंड... निमोनिया की चपेट में आ रहे बच्चे, 18 भर्ती
Thu, 29 Oct 2026 11:35 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Thu, 29 Oct 2026 11:35 PM IST
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बरेली। दिन में तेज धूप और रात का मौसम ठंडा हो रहा है। तापमान में करीब 12 डिग्री से अधिक का अंतर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में निमोनिया पीड़ित 18 और बुखार से पीड़ित दो बच्चे भर्ती हैं। इमरजेंसी में बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप गुप्ता के मुताबिक, तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच बच्चे बीमार हो रहे हैं। सर्दी-खांसी के साथ बुखार, सांस तेज चलना, पसलियों का अंदर धंसना, खाने-पीने में परेशानी और असामान्य सुस्ती निमोनिया के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर बच्चे को परामर्श पर ही दवा देनी चाहिए।
डॉ. संदीप के मुताबिक, छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। ऐसे में मौसम बदलने के दौरान ठंडी हवा के सीधे संपर्क से गले में जकड़न, नाक बंद होना, गले में संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। बृहस्पतिवार को ओपीडी में इलाज के लिए करीब डेढ़ सौ बच्चे आए। जिनमें गंभीर लक्षण मिले, उन्हें भर्ती किया गया।
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रोजाना ओपीडी में पहुंच रहे सांस के मरीज
ईएमओ डॉ. वैभव शुक्ला के मुताबिक, जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बुजुर्गों और पहले से अस्थमा, सीओपीडी या हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ी है। पहले दो-तीन मरीज पहुंचते थे पर अब आठ से दस रोज भर्ती हो रहे हैं। सुझाव दिया कि सांस फूलने, सीने में दर्द, तेज बुखार या पहले से मौजूद सांस की बीमारी के लक्षण बढ़ने पर चिकित्सक से सलाह लें। बंद कमरे में अंगीठी या कोयला जलाकर सोने से बचें, क्योंकि इससे जहरीली गैस का खतरा रहता है।
करवाचौथ पर ओपीडी में कम पहुंचे मरीज
करवाचौथ के मौके पर जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या कम रही। कुल 541 पर्चे बने, जो सामान्य दिनों की तुलना में आधे से भी कम रहे। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राहुल बाजपेई के मुताबिक, ओपीडी में ज्यादातर बैक्टीरियल, वायरल बीमारियों से पीड़ित लोग पहुंचे थे। उन्हें दवा के साथ बचाव के उपाय भी बताए गए।
इन बातों का रखें ध्यान
- बच्चों को सुबह और रात की ठंड से बचाएं, मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं।
- बच्चों को धुएं व धूल से दूर रखें। हाथ साफ रखें। खांसते-छींकते समय मुंह-नाक ढकें।
- बच्चे को बिना चिकित्सकीय सलाह एंटीबायोटिक या खांसी-जुकाम की दवा न दें।
- तेज सांस चलने, पसलियां धंसने, होंठ नीले पड़ने, बच्चे के दूध नहीं पीने पर डॉक्टर को दिखाएं।
- बुजुर्ग और सांस या हृदय रोग से पीड़ित लोग ठंड से बचें। परेशानी बढ़े तो डॉक्टर को दिखाएं।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप गुप्ता के मुताबिक, तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच बच्चे बीमार हो रहे हैं। सर्दी-खांसी के साथ बुखार, सांस तेज चलना, पसलियों का अंदर धंसना, खाने-पीने में परेशानी और असामान्य सुस्ती निमोनिया के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर बच्चे को परामर्श पर ही दवा देनी चाहिए।
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डॉ. संदीप के मुताबिक, छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। ऐसे में मौसम बदलने के दौरान ठंडी हवा के सीधे संपर्क से गले में जकड़न, नाक बंद होना, गले में संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। बृहस्पतिवार को ओपीडी में इलाज के लिए करीब डेढ़ सौ बच्चे आए। जिनमें गंभीर लक्षण मिले, उन्हें भर्ती किया गया।
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रोजाना ओपीडी में पहुंच रहे सांस के मरीज
ईएमओ डॉ. वैभव शुक्ला के मुताबिक, जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बुजुर्गों और पहले से अस्थमा, सीओपीडी या हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ी है। पहले दो-तीन मरीज पहुंचते थे पर अब आठ से दस रोज भर्ती हो रहे हैं। सुझाव दिया कि सांस फूलने, सीने में दर्द, तेज बुखार या पहले से मौजूद सांस की बीमारी के लक्षण बढ़ने पर चिकित्सक से सलाह लें। बंद कमरे में अंगीठी या कोयला जलाकर सोने से बचें, क्योंकि इससे जहरीली गैस का खतरा रहता है।
करवाचौथ पर ओपीडी में कम पहुंचे मरीज
करवाचौथ के मौके पर जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या कम रही। कुल 541 पर्चे बने, जो सामान्य दिनों की तुलना में आधे से भी कम रहे। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राहुल बाजपेई के मुताबिक, ओपीडी में ज्यादातर बैक्टीरियल, वायरल बीमारियों से पीड़ित लोग पहुंचे थे। उन्हें दवा के साथ बचाव के उपाय भी बताए गए।
इन बातों का रखें ध्यान
- बच्चों को सुबह और रात की ठंड से बचाएं, मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं।
- बच्चों को धुएं व धूल से दूर रखें। हाथ साफ रखें। खांसते-छींकते समय मुंह-नाक ढकें।
- बच्चे को बिना चिकित्सकीय सलाह एंटीबायोटिक या खांसी-जुकाम की दवा न दें।
- तेज सांस चलने, पसलियां धंसने, होंठ नीले पड़ने, बच्चे के दूध नहीं पीने पर डॉक्टर को दिखाएं।
- बुजुर्ग और सांस या हृदय रोग से पीड़ित लोग ठंड से बचें। परेशानी बढ़े तो डॉक्टर को दिखाएं।