यूपी में इंसानियत का कत्ल: कहानी नहीं सच्चाई है एक लड़की की जो बिना शादी किए बन गई मां, फिर अपने हुए जल्लाद
सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष दिनेश चंद्रा ने बताया कि खुद को नानी बताने वाली महिला ने बच्चे के जन्म तारीख 11 जून बताई थी, जबकि नाबालिग मां ने 12 जून। दोनों के बयानों में अंतर को देखते ही बच्चे को किसी के सुपुर्द नहीं किया गया। पुलिस से किशोरी के बयानों और बच्चे की मां होने के उसके दावे की तस्दीक करने के लिए भी कहा गया है।
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'ऐसे रिश्ते का भरम रखना कोई खेल नहीं, तेरा होना भी नहीं और तेरा कहलाना भी' मशहूर शायर वसीम बरेलवी की ये पंक्तियां इस वाकए पर सटीक बैठती हैं। दुनिया में आने का जिक्र हुआ तो पहले उसकी राह में कांटे बिछाए गए। तमाम रुकावटों पर जीत हासिल कर किसी तरह उसने इस दुनिया में आंखें खोलीं तो सामाजिक रवायतों में नहीं बंध पाने की वजह से उसे झाड़ियों में फेंक दिया गया। यहां उसने कीड़े-मकोड़ों से भी जंग लड़ी। फिर जब बेगाने से पनाह मिली तो उसकी उम्मीद जगी लेकिन फिर भी दुनिया से रुखसत होना पड़ा। इस तरह सात दिनों तक वह जिंदगी के लिए तड़पता रहा...तरसता रहा।
यह दास्तां 14 जून की है। इज्जतनगर इलाके के रहपुरा चौधरी में झाड़ियों के बीच बोरे में बंद एक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनकर पड़ोस के इफ्तेखार ने उसे उठाकर निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। मामला पुलिस और चाइल्ड लाइन की जानकारी में पहुंचा। पीलिया की शिकायत होने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। यहां से निजी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। जहां शुक्रवार सुबह उसकी मौत हो गई। जांच शुरू हुई तो पता चला कि इज्जतनगर इलाके में एक परिवार रहता है। उसमें चार लड़कियां हैं। सबसे छोटी लड़की की शादी नहीं हुई है। उसकी उम्र अभी 16 वर्ष है।
लड़की की मां ने बताया कि उनकी बड़ी बेटी की शादी भोजीपुरा इलाके में हुई है। बड़ी लड़की के देवर के साथ छोटी लड़की का प्रेम प्रसंग था। कुछ दिन पहले उनकी छोटी लड़की वहां गई थी। इस बीच दोनों में संबंध बन गए। जब वह लौटकर आई तो उसके गर्भवती होने की जानकारी हुई। 11 जून को घर पर ही उसकी डिलीवरी कराई गई और उसी दिन बच्चे को बोरे में बंद कर झाड़ियों में फेंक दिया।
नवजात तीन दिन तक झाड़ियों में ही पड़ा रहा। इससे उसकी हालत खराब थी। कीड़ों ने उसको अपना निवाला बनाने की कोशिश की। 14 जून को जब इफ्तेखार को बच्चा मिला तो उसके शरीर पर जगह-जगह नोचे जाने के निशान थे। ऐसे में इफ्तेखार की इंसानियत नजीर बनी और उसे कुछ दिन और जीने का मौका मिल गया।
बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) तक मामला पहुंचा तो लड़की बार-बार अपना बयान बदलती रही। पता चला कि संतान पुत्र है और जीवित है तो उसकी ममता जाग उठी। समिति के यह कहने पर कि साबित करो बच्चा तुम्हारा है, किशोरी ने कहा कि बच्चा उसी का है और वह साथ लेकर जाएगी। उसे नहीं पता था कि नवजात बेटा है।
किशोरी के गर्भवती होने की बात पता चली तो मां ने लड़के से शादी की बात की। लड़के ने बच्चे के साथ लड़की से शादी करने से इनकार कर दिया। बाद में जेल जाने की डर से वह मान गया तो नानी ने बच्चा फेंककर दोनों का निकाह करा दिया।
नवजात तीन दिनों तक सीडब्ल्यूसी के संरक्षण में था। उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उसे निजी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। - दिनेश चंद्र, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी)
बच्चे की मौत के बाद अब पुलिस ने सीडब्ल्यूसी पर इलाज कराने में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। दरोगा आरके लहरी ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में स्टाफ दवाओं का इंतजाम करने के लिए परिवार को बुलाने की बात कह रहा था। इसके बाद भी बच्चे के परिवार को नहीं बुलाया गया और इसी लापरवाही में उसकी मौत हुई है।
सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष दिनेश चंद्रा ने बताया कि विभागीय नियमों के तहत बच्चे का इलाज चल रहा था। इस दौरान उसको बेहतर इलाज मुहैया कराया जा रहा था। डॉक्टरों से संपर्क के बारे में पूछने पर दिनेश चंद्रा ने कहा कि लगातार डॉक्टरों के संपर्क में थे और नंबर मांगने पर वह संकोच कर गए। उन्होंने कहा कि प्रोबेशन अधिकारी नीता अहिरवाल से ही नंबर मिल पाएगा, जो डॉक्टरों के संपर्क में थे।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दिनेश चंद्रा की संस्तुति के बाद पुलिस ने बच्चे को झाड़ियों में फेंकने वाली उसकी नानी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। इंस्पेक्टर संजय कुमार धीर ने बताया कि इसमें अभी और धाराएं बढ़ाई जाएंगी। बच्चे की मां नाबालिग है, इसके बाद भी उसकी शादी करा दी गई। नाबालिग के पति का मुकदमे में नाम बढ़ाने के साथ ही उस पर पॉक्सो एक्ट और बच्चे को झाड़ियों में फेंकने वाली नानी पर नाबालिग का विवाह कराने की धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं।